दर्द-ए-अल्फ़ाज़

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दरवाज़े से बाहर जाने से पहलेअपने जूतों के तस्मे बाँधने के लिए मैं झुकता हूँरोटी का कौर तोड़ने और खाने के लिएझुकता हूँ अप...
21/05/2025

दरवाज़े से बाहर जाने से पहले
अपने जूतों के तस्मे बाँधने के लिए मैं झुकता हूँ

रोटी का कौर तोड़ने और खाने के लिए
झुकता हूँ अपनी थाली पर

जेब से अचानक गिर गई क़लम या सिक्के को उठाने को
झुकता हूँ

झुकता हूँ लेकिन उस तरह नहीं
जैसे एक चापलूस की आत्मा झुकती है
किसी शक्तिशाली के सामने
जैसे लज्जित या अपमानित होकर झुकती हैं आँखें

झुकता हूँ
जैसे शब्दों को पढ़ने के लिए आँखें झुकती हैं

06/04/2025
हमीं ने कर दिया ऐलान-ए-गुमरही वर्नाहमारे पीछे बहुत लोग आने वाले थेउन्हें क़रीब न होने दिया कभी मैं नेजो दोस्ती में हदें ...
16/01/2025

हमीं ने कर दिया ऐलान-ए-गुमरही वर्ना
हमारे पीछे बहुत लोग आने वाले थे

उन्हें क़रीब न होने दिया कभी मैं ने
जो दोस्ती में हदें भूल जाने वाले थे

मैं जिन को जान के पहचान भी नहीं सकता
कुछ ऐसे लोग मिरा घर जलाने वाले थे

ये कैसी तअल्लुक़ की राह थी जिस में
वही मिले जो बहुत दिल दुखाने वाले थे

अगर बच सका, तो वही बचेगाहम सबमें थोड़ा-सा आदमीजो रौब के सामने नहीं गिड़गिड़ाता, अपने बच्चे के नंबर बढ़वाने नहीं जाता मास...
01/12/2024

अगर बच सका, तो वही बचेगा
हम सबमें थोड़ा-सा आदमी

जो रौब के सामने नहीं गिड़गिड़ाता,
अपने बच्चे के नंबर बढ़वाने नहीं जाता मास्टर के घर,

जो रास्ते पर पड़े घायल को सब काम छोड़कर
सबसे पहले अस्पताल पहुंचाने का जतन करता है,
जो अपने सामने हुई वारदात की गवाही देने से नहीं हिचकिचाता–

वही थोड़ा-सा आदमी–
जो धोखा खाता है पर प्रेम करने से नहीं चूकता,

जो अपनी बेटी के अच्छे फ्राक के लिए
दूसरे बच्चों को थिगड़े पहनने पर मजबूर नहीं करता,

जो दूध में पानी मिलाने से हिचकता है,
जो अपनी चुपड़ी खाते हुए दूसरे की सूखी के बारे में सोचता है,

वही थोड़ा-सा आदमी–
जो बूढ़ों के पास बैठने से नहीं ऊबता
जो अपने घर को चीजों का गोदाम होने से बचाता है,

जो दुख को अर्जी में बदलने की मजबूरी पर दुखी होता है
और दुनिया को नरक बना देने के लिए दूसरों को ही नहीं कोसता

वही थोड़ा-सा आदमी– जिसे ख़बर है कि
वृक्ष अपनी पत्तियों से गाता है अहरह एक हरा गान,
आकाश लिखता है नक्षत्रों की झिलमिल में एक दीप्त वाक्य,
पक्षी आंगन में बिखेर जाते हैं एक अज्ञात व्याकरण

वही थोड़ा-सा आदमी– अगर बच सका तो
वही बचेगा।

21/11/2024

मैं वो इंसान हूँ जो निभा जाऊँ तो जान दे दूँ…
और अगर मुकर जाऊँ एक बार तो पहचानने से भी इंकार कर दूँ!

पहला नियम तो ये था कि औरत रहे औरत, फिर औरतों को जन्म देने से बचे औरत; आर. चेतनक्रांतिSource: वीरता पर विचलित book (page....
05/06/2023

पहला नियम तो ये था कि औरत रहे औरत,
फिर औरतों को जन्म देने से बचे औरत;

आर. चेतनक्रांति
Source: वीरता पर विचलित book (page. 63)

मैं लाख कह दूँ कि आकाश हूँ ज़मीं हूँ मैं मगर उसे तो ख़बर है कि कुछ नहीं हूँ मैं….
07/05/2023

मैं लाख कह दूँ कि आकाश हूँ ज़मीं हूँ मैं
मगर उसे तो ख़बर है कि कुछ नहीं हूँ मैं….

Part-2वो लड़की अब पराई हो चुकी है“वो उंगली जब मेरे हाथों से छूटीपहन ली उसने हीरे की अंगूठी”
04/03/2023

Part-2
वो लड़की अब पराई हो चुकी है

“वो उंगली जब मेरे हाथों से छूटी
पहन ली उसने हीरे की अंगूठी”

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