Manoj Kumar Sharma

Manoj Kumar Sharma Social Worker

21/04/2021

सभी रामभक्तो को
जय श्री राम ।।

09/07/2019

पहली बार जहां युवाओं को बंद मुट्ठी कर एक स्वर में भारत माता की जयनाद करते सुना।
पहली बार जहां युवा को जिम्मेदार नागरिक समझे जाने की बात सुनी ।
पहली बार जहां हमने शिक्षा में सुधार के लिए शिक्षक शिक्षार्थी और शिक्षाविद की शैक्षिक परिवार संकल्पना को समझा ।
पहली बार हमने भारत माता से पुत्रवत्त रिश्ते की बात को जाना।
जी,हां ! वही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जिसे ज्ञान- शील -एकता का मंत्र लेकर केसरिया ध्वज उठाये युवाओं को शैक्षिक परिसरों में राष्ट्रवाद का अलख जगाते देखा जा सकता है।
सत्ता की छाया में पलने वाले वहीं खड़े रह गए और केवल सत्ता नहीं समाज भी बदलने का ध्येय लिये विद्यार्थी परिषद ने अपने देव दुर्लभ कार्यकर्ताओं के तप,त्याग प्राणोत्सर्ग से विश्व के सबसे बड़े छात्र संगठन होने का गौरव पाया।
यह यात्रा श्रमसाध्य रही क्योंकि ध्येय रहा भारत माता की जय...स्कूल की पानी की टंकी से कॉलेज की कैंटीन,बस्ते की पुस्तक से लेकर शैक्षिक संस्थानों की स्वायत्तता, अधिकारों से पहले कर्तव्य के बोध की समझ से लेकर....देश के नेतृत्व से युवाओं के हक के लिये हुंकार तक,आग्रह से आंदोलन तक सब कुछ किया पर झुके नहीं,रुके नहीं....
स्कूल आते एक सामान्य विद्यार्थी को राष्ट्रवाद से जोड़कर विशिष्ट बनाने का सामर्थ्य रखने वाली विद्यार्थी परिषद के विशाल वट वृक्ष से जुड़ने का मुझे भी सौभाग्य मिला,यह मेरे लिए गौरव का विषय है।
मैं गौरवान्वित हूँ, विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में सदा....इस परिवार का मेरे कारण कभी अनर्थ ना हो,नुकसान ना हो यह मेरा संकल्प है।
मेरा मानना है,विद्यार्थी परिषद का बढ़ता व्याप,राष्ट्रीय एकात्मकता के लिए आरम्भ किये परम पूज्य डॉ केशव बलिराम हेडगेवार जी के राष्ट्रीय यज्ञ में समिधा का काम करेगा।
आज राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस पर देश के सभी राष्ट्रवादी नागरिकों का अभिनंदन।
भारत माता की जय।।
।।शिव।।

14/04/2019

हम सबसे पहले और अंत में भारतीय हैं!

डॉ बाबासाहेब अांबेडकर जी के विचार, उनका व्यक्तित्व हम सबके लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। जीवन पर्यन्त सामाजिक समरसता के लिए कार्य करने वाले बाबासाहेब ने हमें सर्वसमावेशी संविधान दिया जिससे हर वर्ग का कल्याण सम्भव हो। ऐसे महामानव को कोटि-कोटि प्रणाम!

25/02/2019

दिल्ली से सीकर जाने वाली ट्रेन का नाम अब सैनिक एक्सप्रेस होगा ।

28/09/2018

मेरे देश ने बांग्लादेश को 3 विकेट से क्रिकेट मे हराया ।
एशिया कप पर किया कब्जा।

24/04/2018

हर हर महादेव ‌‌‌‌,.

नेशनल  युवा कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड , नई दिल्ली में आयोजित उत्तर भारत से आये हुए प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग में ..... ...
17/04/2018

नेशनल युवा कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड , नई दिल्ली में आयोजित उत्तर भारत से आये हुए प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग में ..... आने वाले समय में देश के कोने -कोने से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन करके उन्हें 2020 जापान में होने वाले ओलिंपिक तक एथेलेटिक्स के ट्रैक इवेंट के लिए खिलाडी तैयार करना ।।।।। उत्तर भारत में 32 नोडल जिला केंद्रों पर प्रतियोगिता आयोजित की गई...
मीटिंग 02 सितम्बर 2017 , स्थान : इंटरनेशनल युथ हॉस्टल , चाणक्यपुरी , नई दिल्ली

13/04/2014

कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्री राहुल गाँधी ने कहा की कांग्रेस एक विचारधारा है| तात्पर्य समझ में नही आया?
आज तो कांग्रेस की विचारधारा महज सत्ता प्राप्ति और सुखोपभोग ही है| मोटे तौर पर राजनीती में आने का मकसद पद, पैसा, प्रतिष्ठा प्राप्ति ही रह गया है| क्या इसे ही विचारधारा कहा जाय?
कांग्रेस की शुरूआती विचारधारा लोकमान्य तिलक के गणेशोत्सव की थी और जेल से लौटने के बाद “पुनश्च हरिओम” की घोषणा ही विचारधारा थी| तत्पश्चात महात्मा गाँधी जी के हिन्द स्वराज को गाँधी जी ने तो विचारधारा माना परन्तु कांग्रेस पार्टी वो विचारधारा नहीं बन सकी|
सन 1934 में गांधीजी ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दि| आजादी ही विचारधारा रह गई| उसमे आजादी के बाद के समाज गढ़न की परस्पर विरोधी विचारधाराए भी समविष्ट थी| आजादी के बाद गांधीजी ने कांग्रेस को विसर्जित करने को कहा था मगर बात सिरे नहीं चढ़ी|
1950 के दशक से नेहरूजी ने समाजवाद के विचारधारा को अपनाया जो गांधीजी से सर्वथा भिन्न थी| सन 1969 श्रीमती इंद्रा गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस का तो विभाजन ही हो गया| आजादी के आन्दोलन के मूल्यों से कटकर कांग्रेस सत्ता कांग्रेस बन गई| तब से अब तक कांग्रेस के लिए सत्ता प्राप्ति के लिए वोट बैंक की राजनीती और हर तरह के गठजोड़ सत्ता प्राप्ति और सत्ता सुख ही विचारधारा बन गई|
इसलिए धुर सरकारवाद से धुर बाजारवाद की यात्रा सन 1970 से 1990 के बीच कांग्रेस ने कर ली| इसे अवसरवाद और अनैतिकता के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता|
अवसरवाद का ये पेंडुलम कांग्रेस सरकार की नीतियों के प्रति सामान्य जन की नाराजगी को भापते हुए श्री राहुल गाँधी ने फिर सरकारवाद की तरफ रुख किया है| 50 वर्षो की सारी कवायाद्त में विचारधारा है तो बस सत्ता प्राप्ति, सत्ता सुख और संवेदनहीन, गैरजिम्मेदार, अवसरवाद, अवसरवादी राजनीती| दुर्भाग्य से अन्य राजनैतिक दलों में भी कांग्रेस के ही रास्ते का अनुकरण किया|
( इसमें अपवादों की चर्चा फिर कभी )

16/11/2013

"हर दिन अपनी जिन्दगी को एक नया ख्वाब दो, चाहे पूरा ना हो पर आवाज तो दो, एक दिन पूरे हो जायेंगे सारे ख्वाब तुम्हारे, सिर्फ एक शुरुआत तो दो.
"

26/10/2013

आज सुबह एक छोटा बालक साईकिल पर ढेर सारी झाड़ू लेकर बेचने निकला था।
मैंने देखा कि वह 10 रुपए की दो झाड़ू बेच रहा था
और बच्चा समझकर लोग उससे उन दस रुपयों में भी
मोलभाव करके, दस रुपए की तीन झाड़ू लेने पर आमादा थे,
मैंने भी उससे दो झाड़ू खरीद लिया, लेकिन जाते- जाते उसे एक सलाह दिया कि वह
10 रुपए की दो झाड़ू कहने की बजाय 12 रुपए की दो झाड़ू कहकर बेचे..
और सिर्फ़ एक घंटे बाद जब मैं वापस वहाँ से गुज़रा तो उस बालक ने मुझे बुलाकर धन्यवाद दिया..
क्योंकि अब उसकी झाड़ू "10 रुपए में दो" बड़े आराम से बिक रही थी…।
मित्रों, यह बात काल्पनिक नहीं है…। बल्कि मैं तो आपसे भी आग्रह करता हूँ
कि दीपावली का समय है, सभी लोग खरीदारियों में जुटे हैं,
ऐसे समय सड़क किनारे धंधा करने वाले इन छोटे- छोटे लोगों से मोलभाव न करें…।
मिट्टी के दीपक, लक्ष्मी जी फोटो , खील- बताशे, झाड़ू, रंगोली (सफ़ेद या रंगीन), रंगीन
पन्नियाँ इत्यादि बेचने वालों से क्या मोलभाव करना??
जब हम टाटा-बिरला-अंबानी-और विदेशी कपनियों के किसी भी उत्पाद में
मोलभाव नहीं करते (कर ही नहीं सकते), तो दीपावली के समय
चार पैसे कमाने की उम्मीद में बैठे इन रेहड़ी-खोमचे-ठेले वालों से "कठोर
मोलभाव" करना एक प्रकार का अन्याय ही है.!!

17/08/2013

जब आग आपके पिछवाड़े तक पहुँच जाए, तभी संघ और हिन्दू शब्द को याद कीजिएगा, तब तक चादर ताने सोते रहिए...

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