24/12/2025
📍 लौंद, नवादा | सार्वजनिक परिवहन की ज़मीनी हकीकत
ये तस्वीरें किसी पुराने ज़माने की नहीं हैं। ये आज के लौंद, नवादा की हैं।
जब देश और दुनिया नई तकनीक, आधुनिक परिवहन और बेहतर सुविधाओं की ओर बढ़ रही है, तब लौंद जैसे गाँवों में चलने वाली बसें हमें 20 साल पीछे ले जाती दिखाई देती हैं।
📸 बस के अंदर की हालत, जर्जर सीटें, छत और सफ़ाई की स्थिति,और मजबूरी में सफ़र करते लोग - ये सब एक ऐसी सच्चाई दिखाते हैं जिस पर अब बात होना ज़रूरी है।
यह किसी ड्राइवर या कंडक्टर पर आरोप नहीं है।
यह पोस्ट व्यवस्था, निगरानी और प्राथमिकताओं पर ध्यान दिलाने के लिए है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी:
- सुरक्षित यात्रा
- साफ़ और ठीक बस
- सम्मानजनक परिवहन सुविधा
के उतने ही हक़दार हैं, जितने शहरों के लोग।
📢 लौंद और आसपास के लोगों से निवेदन है - अगर आपने भी ऐसी बसों में सफ़र किया है, या रोज़ ऐसी हालत देखते हैं, तो अपना अनुभव, राय और सुझाव कमेंट में ज़रूर साझा करें।
आपकी आवाज़ ही लौंद की असली तस्वीर दिखाती है।
#लौंद_नवादा
#ग्रामीण_परिवहन
#जनमत
#बदलाव_ज़रूरी