thodi aapni bat kare

thodi aapni bat kare me isme aapni or aapki samsyao or samaj k badlav per aap se charcha kar kuch aawaj utane ki koshish

14/08/2026

आज मेरे देश में संविधान की वह हालत हो गई संविधान संविधान तो सभी कर रहे हैं मगर उसका पालन कोई नहीं करता अब इसका पालन करने के लिए या तो सरकार को स्टिक होना पड़ेगा एक समय में चंद्रशेखर ने उसके द्वारा दबाव बनाकर कुछ काम करने की कोशिश की जा रही थी तो उसने राष्ट्रपति तक को मजबूर कर दिया संविधान के दम पर लोकसभा सत्र जब भी शुरू होता है हम सिर्फ यही सुनते आए हैं विपक्ष ने लोकसभा नहीं चलने दी सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार और विपक्ष दोनों की होती है मगर विपक्ष जब बढ़ जाए को कोशिश करें कि सदन चल ही नहीं जनता का पैसा यूं ही बर्बाद होता रहे तब हमें लगता है कि सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए लोकसभा स्पीकर चाहे तो उन्हें एक सत्र के लिए बर्खास्त कर सकते हैं यह लोकसभा अधिकार में दिया हुआ है पर पता नहीं क्यों है इस कार्रवाई को नहीं किया जा रहा यह कमी सरकार की भी है इन सबको देखते हुए सुप्रीम कोर्ट जो इस देश की सबसे बड़ी अदालत है उसको जनता के हित में देखते हुए स्वयं संज्ञान लेकर इस बात की कार्रवाई की करें कि सदन की कार्रवाई सही तरीके से चल सके जनता का पैसा बर्बाद ना हो इसके लिए उन्हें नोटिफिकेशन जारी करना चाहिए और जो राज कार्य में बड़ा बनते हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए चाहे वह सत्ता दल हो चाहे विपक्ष आप लोग इस बात से सहमत हैं तो इस इसको शेयर करें आम जन तक इसकी आवाज उठाएं

14/08/2026

मे देश का आम नागरिक मेरे देश के सभी न्यायाधीशों से निवेदन है इस देश में चल रही राजनीतिक घटनाक्रम जो की बहुत ही घटिया स्तर पर होती जा रही है सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट कोस्वयं संज्ञान लेते हुए सभी राजनीतिक दलों को उसके पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को एक नोटिस जारी कर इस बात के लिए बाध्य किया जाए बोलने की आजादी का मतलब यह नहीं होता है कि किसी दूसरे की इज्जत खराब की जाए जो भी बोला जाता है इसका पुख्ता सबूत उसके पास ना हो तो इस प्रकार की किसी बात का उल्लेख न करें अगर किसी प्रकार की भी गलत बात साबित होती है तो उसके लिए वह और उसकी पार्टी दोनों जिम्मेदार होंगे और उनके ऊपर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए आम नागरिक होने के नाते मेरा न्यायालय से अनुरोध है कि देश की राजनीति को गलत राह पर जाने से रोकने के लिए उनका यह कदम उठाया जाना बेहद जरूरी है जो संविधान का माखोल बना रहे हैं उन पर कार्रवाई करें इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करो और यह हर आदमी के द्वारा जिनके दिल में थोड़ी भी ठेस पहुंची हो वह सभी अपने न्यायालय से अपील करें कि इस पर कार्रवाई करें और इसे शेयर करें देवेंद्र शर्मा

14/08/2026

लगता है राहुल लगातार हार के कारण सस्ता नशा करने लगा जब मुँह खोलता है गन्ध फैलता।
इसने कभी बाप को बाप नहीं कहा उससे इज्जत उम्मीद केसे करें पीएम को बोलता है जान ज़ि 5/6 महीनों मे लाटी से मारेगी, चौकीदार चोर, रात को सोता नहीं, सरेंडर कर दिया सेना को गालिया देता है पागल हों गया बेचारा थोड़ा विचार करो ओर इसको शेयर करो

10/08/2026

मैं तो चाहता हूँ कि जल्द से जल्द राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनें। अरविंद केजरीवाल गृह मंत्री बनें, अखिलेश यादव रक्षा मंत्री बनें, और बाकी सभी विपक्षी दलों के नेताओं को भी कोई-न-कोई मंत्रालय मिल जाए।क्योंकि मैं फिर से हिंदुस्तान के वो "गोल्डन डेज़" देखना चाहता हूँ।वही दौर... जब भाईचारा चरम पर था। इतना भाईचारा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से लोग बिना पासपोर्ट, बिना वीज़ा के आ जाते थे। बस बॉर्डर से तार क्रॉस किया, और आ गए हिंदुस्तान।
वही दौर... जब हर छह घंटे, आठ घंटे बाद हम खुशी-खुशी बोलते थे—"लाइट आ गई... लाइट आ गई... लाइट आ गई..." वो खुशियाँ चाहिए हमें।
वो गड्ढे मुझे आज भी याद आते हैं, जब उनमें कभी-कभी सड़क निकल आती थी...
वही व्यवस्था... गैस, राशन, मिट्टी का तेल—सब कुछ तब भी "ऑनलाइन" ही मिलता था। ऑनलाइन मतलब... लाइन में ऑन रहो। ज़रा-सा लाइन से हटे नहीं कि नंबर गया! बस... वही "ऑनलाइन सिस्टम", फिर से देखने हैं मुझे।
वही समय... जब शाम ढलते ही लोग, खासकर महिलाओं को किसी बात का डर नहीं था, हर महिला के पास चार-चार, पाँच-पाँच ब्लैक कमांडो हुआ करते थे, और महिला सूर्य ढलने के पहले घर पहुंच जाती थी, रात का झंझट ही नहीं.वही दौर...जब दिवाली कभी भी पड़ जाती थी, बम कहीं फट जाते थे..वही दौर... कोई पेपर कभी लीक नहीं होता था, हर बच्चे के सौ में से सौ नंबर आते थे, और हर मोहल्ले, हर कस्बे और हर शहर से मानो हर बच्चा डीएम या डीएसपी बन जाता था। सरकारी नौकरियाँ तो इतनी थीं कि तीन तीन पोस्ट पे एक अकेला बंदा काम करता था.वही ज़माना... जब हर गली-मोहल्ले में एक AIIMS, एक IIM और एक IIT हुआ करती थी।वही दौर, जब सौ डॉलर का एक रुपया हुआ करता था!महंगाई तो बिल्कुल भी नहीं थी—एक दर्जन में अठारह-अठारह केले आते थे तब। वही दौर चाहिए मुझे वही दिन, जब रात आठ बजे वाली ट्रेन, रात आठ बजे ही आती थी... बस, तारीख़ कौन-सी होगी, ये कोई नहीं जानता था!स्टेशन पर बैठकर उनका इंतज़ार करने का जो रोमांच था, वो आज भी याद आता है। रेलवे स्टेशन तो इतने बड़े बड़े हुआ करते थे कि कई बार तो वहाँ हवाई जहाज उतर जाया करते थे.वही दौर वापस लाना है, जब हिंदू-मुस्लिम जैसी कोई बहस ही नहीं होती थी। मुस्लिम अपने नाम के साथ..."द्विवेदी, तिवारी, शर्मा और शुक्ला लिखते थे, और हिंदू खान, कुरैशी, हुसैन और अहमद। बस, इंसान की पहचान इंसान से होती थी.
मोदी और योगी ने देश बर्बाद कर दिया है।
तो आइए... हम सब मिलकर प्रण लें कि इस बार मोदी जी और योगी जी को वापस नहीं आने देंगे... ताकि हम फिर से वही "गोल्डन डेज़", वही सच्चे दिन, वही अच्छे दिन देख सकें।
JAI HIND...

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