प्रयास एक पहल

प्रयास एक पहल प्रयास एक पहल(बब्लु सिन्हा )"भुखा ना रहे कोई"

14/07/2026

बड़ी विचित्र बात है की एक दास्तवेज का नकल नही निकल पा रहा है 8माह से बेतिया रजिस्ट्री आफिस से

13/07/2026

मोका देने की जरूरत क्या है , बांकीपुर की जनता एक्सपृमेन्ट के ही लायक है । वहा का पूर्व प्रत्याशी को क्यो टिकट नहीं दिया जो स्व्य लडने चले महोदय, नहीं लडने की कसम खा कर मलाई दिखी तो मन बदल गया तो आगे क्या क्या सहे गा बिहार जो पहले ही बदहाल है पी के क्या क्या हो गा एक बार मौका ...? नरकटियागंज मे मौका तो दिया दिखा ब्लॉब, नाला,चाय की टफरी, वगैरह वगैरह-वगैरह पर चर्चा विकस गया (जनता के समस्या के लिए ग्रिड जाए पूर्व विधायक) मोदी और शाह के पास

28/05/2026
28/05/2026

🏵️ हमारे पूर्वज 100 साल जीते थे, हम 60 में थक जाते हैं। क्यों? आइए जानते हैं ....

कभी सोचा है दादाजी-नानाजी बिना जिम, बिना प्रोटीन शेक, बिना दवाई के इतने तंदुरुस्त कैसे रहते थे? ना घुटने का दर्द, ना नींद की गोली, ना डिप्रेशन।
और हम? 35 की उम्र में BP हाई, शुगर बॉर्डर पर, रात-रात भर एंग्जायटी के मारे जागते हैं।

फर्क सिर्फ एक चीज का है - लाइफस्टाइल।

हमने तरक्की के नाम पर अपना सब कुछ खो दिया। AC ने शुद्ध हवा छीन ली, फोन ने नींद छीन ली, जंक फूड ने सेहत छीन ली।

सनातन धर्म कोई पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। ये जीने का विज्ञान है।
हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले वो खोज लिया जो आज NASA और AIIMS की रिसर्च में साबित हो रहा है। उन्होंने हमें "लाइफ मैन्युअल" दिया था, हमने उसे "अंधविश्वास" बोलकर साइड कर दिया।

अब भी टाइम है। बस ये 3 आदतें अपनी जिंदगी में वापस लाओ और 30 दिन में फर्क खुद देखो:

1. ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 5 से 5:30 के बीच उठो

ये वो समय है जब प्रकृति में ऑक्सीजन का लेवल सबसे ज्यादा और प्रदूषण सबसे कम होता है। दिमाग एकदम शांत रहता है। इस 1 घंटे में जो पढ़ोगे, जो प्लान करोगे, वो दिनभर में नहीं होगा।
बड़ी-बड़ी हस्तियां इसी टाइम उठती हैं। ये फ्री का मेडिटेशन है।

2. मिट्टी और कांसे के बर्तन में खाना खाओ

याद करो दादी/नानी के घर की मिट्टी की हांडी वाली दाल। स्वाद और सेहत दोनों। आज हम एलुमिनियम-नॉनस्टिक में जहर पका रहे हैं। प्लास्टिक की बोतल से हार्मोन बिगाड़ रहे हैं। मिट्टी के बर्तन खाने के 100 पोषक तत्व बढ़ाते हैं, गैस-एसिडिटी जड़ से खत्म करते हैं। एक बार शुरू करके देखो।

3. सूर्यास्त के बाद स्क्रीन बंद - रात 10 बजे सो जाओ

हमारा शरीर सूरज के साथ चलने के लिए बना है। पर हम रात 2 बजे तक रील स्क्रॉल करते हैं। फोन की ब्लू लाइट दिमाग को लगता है अभी दिन है। मेलाटोनिन हार्मोन बनना बंद हो जाता है। फिर नींद नहीं आती, चिड़चिड़ापन आता है, मोटापा बढ़ता है। 10 बजे फोन रख दो, 5 बजे उठो - लाइफ बदल जाएगी।

कड़वा सच सुनो - डिग्री आपको नौकरी देगी, पैसा देगी, स्टेटस देगी। पर सनातन आपको जीवन देगा। सुकून देगा। वो सेहत देगा जो करोड़ों में भी नहीं मिलती।

फैसला तुम्हारा है। 100 साल जीना है या 60 में थककर डॉक्टर के चक्कर काटने हैं?

🌹🌹❤️🌹🌹 प्रयास एक पहल "भूखा ना रहे कोई"
बब्लु सिन्हा

जल ही जीवन है ... जल बर्बाद ना करें ।
22/05/2026

जल ही जीवन है ... जल बर्बाद ना करें ।

22/05/2026

एक कॉकरोच सैकड़ो बच्चा जनता है ,और गंदगी ,बदबू का भंडार है ।जहां दिखता है उसे वही खत्म करे ।

बिहार के जाहिल गवार नेता अकूत  पैसे वर्चस्व के लालच में अंधे रहे हैं दशकों से लेकर अब तक !!अच्छे अधिकारी भी इन भ्रष्ट ने...
29/04/2026

बिहार के जाहिल गवार नेता अकूत पैसे वर्चस्व के लालच में अंधे रहे हैं दशकों से लेकर अब तक !!
अच्छे अधिकारी भी इन भ्रष्ट नेताओं के कारनामों के चलते आजतक बलि चढ़ते आए हैं
या अपने जमीर,योग्यता की बलि देकर इन नेताओं के आगे नतमस्तक हुए हैं,,,,,,क्योंकि डर और कानूनी तिकड़म में फसना कोई नहीं चाहता,,
आज पूरे बिहार में कैसे जनता के पैसे का दुरपयोग हो रहा है
इस लुट खसोट का नंगा नाच वही राजनेता कर रहे हैं
जो झक सफेद लिबास में झंडा फहराते हैं
और देश की तरक्की विकास का नारा देते हैं,,,,
पर इनकी शैतानी मुस्कान कम भयावह नहीं।जब
ठिकेदार लॉबी से कमीशन सेटिंग के वक्त
इंफ्रास्ट्रक्चर के घटिया होने के विचार सिरे से नकार देते हैं,,
पुल गिरे तो गिरे सड़क कबाड़ बने तो बने,,अधिकारी इंजीनियर बलि का बकरा बने तो बने बस मैनेज जबरदस्त होनी चाहिए,,,,
और इस खेल में सब शामिल है चाहे दागी ,,
तो बेदाग दामन वाले भी!!
यही वजह है कि सांसद,विधायक,जिला परिषद,मेयर,मुखिया का चुनाव लड़ने वालों की संख्या दिनोदिन बढ़ते जा रही है!!!



!!;; सारे जहा से अच्छा हिंदुस्तान हमारा,!!

Ritesh Pandey Shivkumar Shukla Sheikh Guddu Shambhu Prasad Sushil Gupta Rina Devi Rajesh Srivastav Sushil Kumar Jaiswal
District Administration, West Champaran, Bettiah District Police, West Champaran, Bettiah

28/04/2026

#रसोई_में_भोजन_बनाना_छोड़ने_का_दुष्परिणाम
अमेरिका में क्या हुआ जब घर में खाना बनाना बंद हो गया ?
1980 के दशक के #प्रसिद्ध_अमेरिकी_अर्थशास्त्रियों ने अमेरिकी लोगों को चेतावनी कि यदि वे परिवार में आर्डर देकर बाहर से भोजन मंगवाऐंगे तो देश मे #परिवार_व्यवस्था धीरे धीरे समाप्त हो जाएगी।
साथ ही दूसरी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने बच्चों का पालन पोषण घर के सदस्यो के स्थान पर बाहर से पालन पोषण की व्यवस्था की तो यह भी बच्चो के #मानसिक_विकास_व_परिवार के लिए घातक होगा।
लेकिन बहुत कम लोगों ने उनकी सलाह मानी। घर में खाना बनाना लगभग बंद हो गया है, और बाहर से खाना मंगवाने की आदत (यह अब नॉर्मल है), अमेरिकी परिवारों के विलुप्त होने का कारण बनी है जैसा कि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी।
घर मे खाना बनाना मतलब परिवार के सदस्यों के साथ प्यार से जुड़ना।
#पाक_कला मात्र अकेले खाना बनाना नहीं है। बल्कि #केंद्र_बिंदु है, #पारिवारिक_संस्कृति का।*
घर मे अगर कोई किचन नहीं है , बस एक बेडरूम है, तो यह घर नहीं है, यह एक हॉस्टल है।
अब उन अमेरिकी परिवारों के बारे में जाने जिन्होंने अपनी रसोई बंद कर दी और सोचा कि अकेले बेडरूम ही काफी है ?
1-1971 में, लगभग 72% अमेरिकी परिवारों में एक पति और पत्नी थे, जो अपने बच्चों के साथ रह रहे थे।
2020 तक, यह आंकडा 22% पर आ गया है।
2-पहले साथ रहने वाले परिवार अब नर्सिंग होम (वृद्धाश्रम) में रहने लगे हैं।
3-अमेरिका में, 15% महिलाएं एकल महिला परिवार के रुप में रहती हैं।
4-12% पुरुष भी एकल परिवार के रूप में रहते हैं।
5-अमेरिका में 19% घर या तो अकेले रहने वाले पिता या माता के स्वामित्व में हैं।
6-अमेरिका में आज पैदा होने वाले सभी बच्चों में से 38% अविवाहित महिलाओं से पैदा होते हैं।उनमें से आधी लड़कियां हैं, जो बिना परिवारिक संरक्षण के अबोध उम्र मे ही शारीरिक शोषण का शिकार हो जाती है ।
7-संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 52% पहली शादियां तलाक में परिवर्तित होती हैं।
8- 67% दूसरी शादियां भी समस्याग्रस्त हैं।
अगर किचन नहीं है और सिर्फ बेडरूम है तो वह पूरा घर नहीं है।
संयुक्त राज्य अमेरिका विवाह की संस्था के टूटने का एक उदाहरण है।
*हमारे #आधुनिकतावादी_भी_अमेरिका की तरह दुकानों से या आनलाईन भोजन ख़रीदने की वकालत कर रहे हैं और खुश हो रहे हैं कि भोजन बनाने की समस्या से हम मुक्त हो गए हैं। इस कारण परिवार धीरे-धीरे अमेरिकी परिवारों की तरह नष्ट हो रहे हैं।
जब परिवार नष्ट होते हैं तो मानसिक और शारीरिक दोनों ही स्वास्थ्य बिगड़ते हैं। बाहर का खाना खाने से अनावश्यक खर्च के अलावा #शरीर_मोटा_और_संक्रमण के प्रति #संवेदनशील और बिमारीयों का घर हो जाता है।
शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।
इसलिए हमारे घर के बड़े-बूढ़े लोग, हमें बाहर के खाने से बचने की सलाह देते थे
लेकिन आज हम अपने परिवार के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं...",
स्विगी और ज़ोमैटो के माध्यम से अजनबियों द्वारा पकाए गए( विभिन्न कैमिकल युक्त) भोजन को ऑनलाइन ऑर्डर करना और खाना, उच्च शिक्षित, मध्यवर्गीय लोगों के बीच भी फैशन बनता जा रहा है।
#दीर्घकालिक_आपदा_होगी_ये_आदत...
आज हमारा खाना हम तय नही कर रहे उलटे ऑनलाइन कंपनियां विज्ञापन के माध्यम से मनोवैज्ञानिक रूप से तय करती हैं कि हमें क्या खाना चाहिए...
हमारे पूर्वज निरोगी और दिर्घायु इस लिए थे कि वो घर क्या ...यात्रा पर जाने से पहले भी घर का बना ताजा खाना बनाकर ही ले जाते थे ।
इसलिए घर में ही बनाएं और मिल-जुलकर खाएं । पौष्टिक भोजन के अलावा, इसमें प्रेम और स्नेह निहित है।

With Lalbahadur Das – I just got recognised as one of their top fans! 🎉
24/04/2026

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