27/07/2018
*_🙏महर्षि वेदव्यास जी के अनुसार …🙏_*
*_“पितुरप्यधिका माता_*
*_गर्भधारणपोषणात् ।_*
*_अतो हि त्रिषु लोकेषु_*
*_नास्ति मातृसमो गुरुः”॥_*
*_[गर्भ को धारण करने और पालनपोषण करने के कारण माता का स्थान पिता से भी बढकर है। इसलिए तीनों लोकों में माता के समान कोई गुरु नहीं अर्थात् माता परमगुरु है।]_*
*_"“नास्ति गङ्गासमं तीर्थं_*
*_नास्ति विष्णुसमः प्रभुः।_*
*_नास्ति शम्भुसमः पूज्यो_*
*_नास्ति मातृसमो गुरुः”॥_*
*_[गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं, विष्णु के समान प्रभु नहीं और शिव के समान कोई पूज्य नहीं और माता के समान कोई गुरु नहीं।]_*
*_"जिसके प्रति मन में सम्मान होता है_*
*_जिसकी डांट में भी एक अद्भुत ज्ञान होता है,_*
*_जन्म देता है कई महान शख्सियतों को
वो गुरु तो सबसे महान होता है।"_*
*_"भारत माँ से बढ़कर शायद मेरे लिये और कोई बड़ा गुरु नहीं हो सकता...गुरुपूर्णिमा के दिन माँ भारती के चरणों मे दंडवत नमन ...|"
*_" व्यक्ति के जीवन की दिशा को बनाने और बदलने की सामर्थ्य रखने वाले गुरुओं को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मेरा नमन, देश की भावी पीढ़ी और समाज के निर्माण में आपका योगदान अमूल्य है...|"-देंव वर्मा 'देवेंद्र'@
*_====🙏" गुरु गोविंद सिंह साहब के चरणो में मेंरा सादर प्रणाम===🙏|-देंव@_*
*_~मै इस पोस्ट को इस लिए यहाँ डाल रहा हुँ क्युकि श्री गुरु गोविद्र साहव जी ने हमारे भी समाज से बंदे चुने थे...उन्होने केश,कंघा,कच्छा,कृपाण देकर सिख धर्म की एक मजबुत आधारशीला देकर,हिंदु धर्म की रक्षार्थ हेतु एक दीवार रुपी सिंह तैयार किया था...जिसे आज हम "सिख धर्म के नाम से जानते है...तो क्या हम सब भी एकजुट होकर अपने समाज को एक सुनिश्चित पहचान दिला नहीं सकतें•••"~_* *_~देंव@~_*
*_"गुरुबाणी" में परम पिता 'परमात्मां' के लिये प्रयोग किये गए 16 "नाम"_*
*_🔹हरी - 50 बार_*
*_🔹राम - 1758 बार_*
*_🔹प्रभू - 1314 बार_*
*_🔹गोबिन्द - 204 बार_*
*_🔹मुरारी - 42 बार_*
*_🔹ठाकुर - 238 बार_*
*_🔹गोपाल - 109 बार_*
*_🔹परमेशर - 16 बार_*
*_🔹जगदीश - 37 बार_*
*_🔹कृशन - 8 बार_*
*_🔹नाराईण - 39 बार_*
*_🔹वाहिगुरू - 13 बार_*
*_🔹मोहन - 30 बार_*
*_🔹 भगवान - 41 बार_*
*_🔹 निरंकार - 36 बार_*
*_🔹वाहगुरू - 3 बार_*
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*_1 सिक्ख = 1.25 लाख मुगल -- जानने के लिये पुरी पोस्ट पढ़ें..._*
*_धरती की सबसे महँगी जगह सरहिंद (पंजाब), जिला फतेहगढ़ साहब में है,_*
*_यहां पर श्री गुरुगोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों का अंतिम संस्कारकिया गया था..._*
*_सेठ दीवान टोंडर मल ने यह जगह 78000 सोने की मोहरे (सिक्के) जमीन पर फैला कर मुस्लिम बादशाह से ज़मीन खरीदी थी।_*
*_सोने की कीमत के मुताबिक इस 4 स्कवेयर मीटर जमीन की कीमत 2500000000 (दो अरब पचास
करोड़) बनती है।_*
*_दुनिया की सबसे मंहंगी जगह खरीदने का रिकॉर्ड आज सिख धर्म के इतिहास में दर्ज करवाया गया है... आजतक दुनिया के इतिहास में इतनी महँगी जगह
कही नही खरीदी गयी..._*
*_"दुनिया के इतिहास में ऐसा युद्ध ना कभी किसी ने पढ़ा होगा ना ही सोचा होगा, जिसमे 10 लाख की फ़ौज का सामना महज 42 लोगों के साथ हुआ था
और जीत किसकी होती है..???_*
*_उन 42 सूरमो की !!!_*
*_"यह युद्ध 'चमकौर युद्ध' (Battle of Chamkaur) के नाम से भी जाना जाता है जो कि मुग़ल योद्धा वज़ीर खान
की अगवाई में 10 लाख की फ़ौज का सामना सिर्फ 42
सिखों के सामने 6 दिसम्बर 1704 को हुआ जो की गुरु
गोबिंद सिंह जी की अगवाई में तैयार हुए थे !"_*
*_नतीजा यह निकलता है की उन 42 शूरवीर की जीत होती है..._*
*_जो की मुग़ल हुकूमत की नीव जो की बाबर ने रखी थी , उसे जड़ से उखाड़ दिया और भारत को आज़ाद भारत का दर्ज़ा दिया।_*
*_औरंगज़ेब ने भी उस वक़्त गुरु गोबिंद सिंह जी के आगे
घुटने टेके और मुग़ल राज का अंत हुआ हिन्दुस्तान से ।तभी औरंगजेब ने एक प्रश्न किया गुरुगोबिंद सिंह जी के सामने। कि यह कैसी फ़ौज तैयार की आपने जिसने 10 लाख की फ़ौज को उखाड़ फेंका।_*
*_गुरु गोबिंद सिंह जी ने जवाब दिया,,,_*
*_"चिड़ियों से मैं बाज लडाऊं , गीदड़ों को मैं शेर बनाऊ।"_*
*_"सवा लाख से एक लडाऊं तभी गोबिंद सिंह नाम कहाउँ !!"_*
*_~🔶अखिल भारतीय चंद्रवंशी समाज🔶 (व्हाट्सएप ग्रुप)~_*
*_"गुरु गोबिंद सिंह जी ने जो कहा वो किया, जिन्हे आज हर कोई शीश झुकता है , यह है हमारे भारत की अनमोल विरासत जिसे हमने कभी पढ़ा ही नहीं !_*
*_"अगर आपको यकीन नहीं होता तो एक बार जरूर गूगल में लिखे 'बैटल ऑफ़ चमकौर' और सच का आपको पता लगेगा..."_*
*_"सिख धर्म में गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) का विशेष महत्व है क्योंकि सिख धर्म में दस गुरुओं का अपना विशेष महत्व है शास्त्रों में गुरु का अर्थ है गु यानी के अंधकार और रु का अर्थ होता है प्रकाश मतलब के गुरु एक इंसान को अज्ञान रुपी अंधकार से ज्ञान रुपी प्रकाश की तरफ़ ले जाता है ।"_*
*_"त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।_*
*_त्वमेव विद्या च द्रविणम त्वमेव, त्वमेव सर्वमम देव देवः।।"_*
*_गुरु को समर्पित इस पवित्र पर्व से हमें अपने गुरु के प्रति प्रेम और श्रद्धा की भावना रखनी चाहिए ।"_*
*_-देंव वर्मा 'देवेंद्र'|_*
*_(अरुणाचल प्रदेश)_*