03/06/2026
बंगाल में महाभारत मची है आज....
विधानसभा में LOP (विपक्ष का नेता) बनाने के लिए 52 विधायको का समर्थन चाहिए।
अभिषेक बनर्जी ने अपने आदमी को बनाने की कोशिश की। 60 विधायको का दस्तखत किया हुआ लेटर विधानसभा अध्यक्ष को दे दिया था। मगर उन्हीं के दो विधायको ने शिकायत की कि लेटर में विधायको के दस्तखत नकली हैं।
तो अध्यक्ष ने cid की जांच बिठा दी... और अभिषेक बनर्जी फस गया।
अब आज बागी गुट के ऋतब्रत बनर्जी ने LOP के लिए दावा कर दिया है... 50 से अधिक विधायकों के समर्थन की बात कही है।
बागी गुट खुद को असली tmc बता रहा है।
अब ये देखना दिलचस्प होगा कि अगर बागी गुट अपना LOP बनवा लेता है तो ये बात यहीं खत्म नहीं होगी।
फिर tmc पर कब्जा भी इसी गुट का होगा।
पार्टी का झंडा, फंड और सारे ऑफिस ममता के हाथों से फिसल जाएंगे।
और ममता फिर से एक सफेद साड़ी ओर हवाई चप्पल में सड़क के किसी कोने में बैठी मिलेगी।
महाराष्ट्र में शिवसेना जैसी पारिवारिक पार्टी की टूट से राजनीति ने जो नया रास्ता देखा था कि पार्टी को एक परिवार की बपौती से कैसे निकालते हैं ,,
वो तरीका अब हर राज्य में हर उस पार्टी के खिलाफ अपनाया जा सकता है जो किसी भी एक परिवार की गिरफ्त में है।
उन पार्टियों की संख्या काफी ज्यादा है, इसलिए नाम बताने की जरूरत नहीं है, जिनके यहां किसी परिवार विशेष की निजी रियासत मानी जाती है राजनीतिक पार्टी... दुर्भाग्यवस भारत में जितने राज्य हैं उससे ज्यादा ऐसी पारिवारिक पर्टियां भी चल रही हैं राजनीति में...