28/01/2026
दो युवाओं की दर्दनाक मौत, आख़िरी कॉल में मांगी थी मदद हम जंगल में बर्फ के बीच फंसे हैं, पीयूष की तबीयत ठीक नहीं
“हम दोनों जंगल में बर्फ के बीच फंसे हैं… पीयूष की तबीयत बहुत खराब है… मैं उसे यहीं छोड़कर मदद लेने निकल रहा हूं, लेकिन रास्ता समझ नहीं आ रहा।”
यह शब्द विकसित राणा ने 23 जनवरी की शाम करीब 6 बजे पीयूष के साथ मलकोता गांव के एक युवक से फोन पर कहे—और यही उनकी आख़िरी बातचीत साबित हुई।
इसके बाद फोन स्विच ऑफ हो गया। सूचना मिलते ही गांववासी तलाश में जंगल की ओर निकले, लेकिन भारी बर्फबारी और खराब मौसम के चलते उन्हें बीच रास्ते से लौटना पड़ा। जानकारी के मुताबिक 22 जनवरी को जहां दोनों ने टेंट लगाया था, वह तेज़ अंधड़ की चपेट में आकर पूरी तरह तहस-नहस हो गया। मजबूरी में वे टेंट और सामान वहीं छोड़कर जंगल के रास्ते घर लौटने निकले।
मौसम की भयावहता और बर्फीले अंधड़ में फंसकर दोनों युवक रास्ता भटक गए। बाद में तलाश के दौरान पीयूष का शव एक पेड़ के नीचे मिला, जबकि विकसित राणा का शव कुछ दूरी पर एक नाले में पाया गया। आशंका है कि बर्फ से ढकी गहरी खाई का अंदाज़ा न लग पाने के कारण यह हादसा हुआ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दोनों युवक टेंट में ही रहकर बचाव दल के पहुंचने का इंतज़ार करते, तो शायद जान बचने की संभावना बन सकती थी। दोनों के शव इस बात की गवाही देते हैं कि ज़िंदगी के लिए उन्होंने आख़िरी दम तक संघर्ष किया।