30/04/2016
स्वराज अभियान महाराष्ट्र इकाई की एक सराहनीय पहल. सूखे से पीड़ित लातूर के सोनवती गाँव में कार्यकर्ताओं ने अथक मेहनत के बाद दो बाँध बनाए.
अकालग्रस्त लातूर के सोनवती गांव में स्वराज अभियान द्वारा आयोजित, राज्य कमिटी के सदस्य साथी संदीपान बडगिरे के मार्गदर्शन में 6 दिवसीय श्रमसंस्कार शिवीर संपन्न... अंतिम दिन राज्य उपाध्यक्ष सुभाष लोमटे और राज्य सह-सचिव उन्मेष बागवे इनकी उपस्थिती में समापन...
स्वराज अभियान, महाराष्ट्र द्वारा महाराष्ट्रके अकाल कि तस्वीर में बदलाव लानेकी यह एक अभिनव पहल...
अकाल मानव-निर्मित है और उसका हल जमीन के पानि के स्तर पर निर्भर है | यह हल अगर हम मानते है तो हम यह करके भी दिखाना चाहिये, यह ठान लिया राज्य कमिटी के सदस्य और लातूर के यशस्वी सेंद्रिय-खेती वाले किसान संदीपान बडगिरेने |लातूर अकाल कि वजहसे प्रभावित है और समस्या पानीकी गंभीर... तो क्यो न हम इसी सवाल पर रचनात्मक जबाब दे ? शिवीर शुरू हुवा, 23 अप्रेल से... 6 विद्यार्थी जो पूनासे आये, औरंगाबाद, लातूर और पालघर से और 6 साथी आये और कुछः गाववाले भीड गये, 6 सालका का रवी और 82 सालके बाबुराव, समस्या के हल के लिये, दो छोटे बांध बांधने ...
पहले दिन, खोदाई शुरू, दुसरे दिन से लातूर से भी सुबह सुबह 10-12 साथी खबर पढकर आ गये और डॉ.पन्हाळे और विशाल भरुडे के नेत्तृत्त्व में लगातार आते रहे, सुबह के दो घंटे काम करते थे | एकमात्र स्त्री साथी रूचीता, IT इंजीनिअर सुजय, योगेश, फर्ग्यासन कोलेज के संतोष, सागर, ज्ञानेश्वर, वैभव, पुना का और एक विद्यार्थी राम, औरंगाबाद के युवा साथी गुलाब और विठ्ठल, गांव के गणेश बडगिरे, सत्यवान हले, युवराज और अनंत नितुरे, अण्णाराव भंगे, इन्होने कडी धुपमे खूब मेहनत की | पांचवे दिन तो शाम के वक्त बारीश भी जमकर हुई | उत्साह का बांध कि सीमा नही रही, तिसरे और चौथे दिन तो लगभग 8 घंटे मेहनत करना अनिवार्य था |
इसके साथ साथ बीच में वक्त मिले तो अभ्यास सत्र होता, पुना के मिलिंद चव्हाण, खुद संदीपान बडगिरे, सुभाष लोमटे और औरंगाबाद के डॉ. प्रदीप पुरंदरे तथा अन्य वक्ता मार्गदर्शन हेतू आये और उन्होने भी बांधका काम किया | चौथे दिन "वाशिंग्टन पोस्ट" कि पत्रकार रमा-लक्ष्मी ने बातचीत की | दिल्ली के यमुना मिशन के कुछ साथी भी आये थे | घाटनजी, यवतमाळ कि "दिलासा संस्था" के मधुकर धस, लातूर के "म.गांधी मानवतावादी संस्था" के अध्यक्ष Adv. गोपाल गुनाले, ठाणे के "Concerned Citizen Forum" के हेमंत कुमार शर्मा, औरंगाबाद के साथी सुनीती धारवाडकर इन्होने शिबीर को आर्थिक सहयोग भी दिया |
हमे विश्वास है की शिवीरने दो बांध का निर्माण किया, 15 x 3 फुट और 7 फिट उंचा, उससे इस गांव में भूजल स्तर बढेगा और अगलेही साल पिनेयोग्य पानीकी समस्या हल होगी | और इस मुहीम द्वारा स्वराज अभियान ने एक बढीया संदेश दिया कि निर्माण से हि अकाल पर हल धुंडा जा सकता है और महाराष्ट्र के विद्यार्थी इसमे आगे है, स्वराज अभियान के साथी हम गर्व के साथ जिम्मेदारी का अहसास व्यक्त करते है कि यह मुहीम और गांवो में ले जानी है और जन-भागीदारी के साथ नव-निर्माण कराना है |
स्वराज अभियान के दिल्ली में हुये 10 अगस्त कि जय किसान रैली के उपलक्ष राज्य के हजारो किसान शामिल हुये | उसके बाद योगेंद्र यादव की संवेदना यात्रा में महाराष्ट्रके अकाल-ग्रस्त इलाखो में जनचेतना जगाने में राज्य के साथीयोने अहम भूमिका निभायी और 3 दिसंबर 2015 राज्य विधानसभा पर धरना देकार किसानोंका साथ दिया, नाशिक के एक गांव, पिंपळगाव-मोर में शेतमजुरोंकी सहायता करने हेतू शहरोसे मदत जुटाई और इन किसानोने स्वराज अभियान कि अगुवाई में 11 मार्च के दिन तहसील कचहरीपर मोर्चा किया | २१ अप्रेल को औरंगाबाद में अकाल-विरोधी परिषद संपन्न हुई | यह सिलसिला जारी रहा और 23 से 28 अप्रेल में यह और शिवीर, सीधे गांव में | काम करते थे बांधपर और सोते, आराम करते आम के पेड के नीचे, खुली हवा में | कहते है, कार्यकर्ता के लिये फावडा, जेल और मतपेटी यह व्यवस्था परिवर्तन के साधन है और श्रम-प्रतिष्ठा का मूल्य हमारे लिये अहम है, इसलिये यह शिवीर एक सफल कदम था |
उन्मेष बागवे, सह-सचिव, स्वराज-अभियान, महाराष्ट्र