18/10/2021
18 अक्तूबर,
सनातन धर्म के रक्षक महान क्षत्रिय सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार की जयंती पर उनको कोटि कोटि नमन.
एक ऐसा राजा जिसने अरब तुर्क आक्रमणकारियों को भागने पर विवश कर दिया और जिसके युग में भारत सोने की चिड़िया कहलाया.प्रतिहार क्षत्रिय राजपूत वंश के नवमीं शताब्दी में सम्राट मिहिरभोज भारत का सबसे महान शासक थे. उनका साम्राज्य आकार, व्यवस्था , प्रशासन और नागरिको की धार्मिक स्वतंत्रता के लिए चक्रवर्ती गुप्त सम्राटो के समकक्ष सर्वोत्कृष्ट था।
भारतीय संस्कृति के शत्रु म्लेछो यानि मुस्लिम तुर्को -अरबो को पराजित ही नहीं किया अपितु उन्हें इतना भयाक्रांत कर दिया था की वे आगे आने वाली एक शताब्दी तक भारत की और आँख उठाकर देखने का भी साहस नहीं कर सके।
चुम्बकीय व्यक्तित्व संपन्न सम्राट मिहिर भोज की बड़ी बड़ी भुजाये एवं विशाल नेत्र लोगों में सहज ही प्रभाव एवं आकर्षण पैदा करते थे। वह महान धार्मिक , प्रबल पराक्रमी , प्रतापी , राजनीति निपुण , महान कूटनीतिज्ञ , उच्च संगठक सुयोग्य प्रशासक , लोककल्याणरंजक तथा भारतीय संस्कृति का निष्ठावान शासक था।ऐसा राजा जिसका साम्राज्य संसार में सबसे शक्तिशाली था। इनके साम्राज्य में चोर डाकुओ का कोई भय नहीं था। सुदृढ़ व्यवस्था व आर्थिक सम्पन्नता इतनी थी कि विदेशियो ने भारत को सोने की चिड़िया कहा।
यह जानकर अफ़सोस होता है की ऐसे अतुलित शक्ति , शौर्य एवं समानता के धनी मिहिरभोज को भारतीय इतिहास की किताबो में स्थान नहीं मिला।मिहिरभोज के बारे में इतिहास की पुस्तकों के अलावा बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। इनके शासन काल की हमे जानकारी वराह ताम्रशासन पत्र से मालूम पडती है जिसकी तिथि (कार्तिक सुदि 5, वि.सं. 893 बुधवार) 18 अक्टूबर सन 836 ईस्वीं है इसी के अनुसार इनकी जयंती 18 अक्टूबर को हर वर्ष धूमधाम से मनाई जाती है ।
भारत के महान साम्राज्यों में प्रतिहारों का भी एक बड़ा साम्राज्य रहा है। आधुनिक इतिहासकारों ने इनको गुर्जर प्रतिहार लिखना शुरू कर दिया जबकि इन्होंने अपने आप को कभी गुर्जर प्रतिहार नहीं लिखा। इतिहासकार के एम मुन्शी ने अपने पुस्तक ‘ग्लोरीज देट गुर्जरदेश’ में इस विषय का विस्तृत रूप से विवेचन किया है और यह सिद्ध किया है कि प्रतिहार गुर्जर देश के स्वामी होने के कारण इनके विरोधियों ने इनको गुर्जर प्रतिहार परिभाषित कर दिया है। जब इनके शिलालेखों का हम अध्ययन करते है तो प्रतिहारों के शिलालेख तथा कन्नौज के प्रतिहार सम्राटों के शिलालेखों में यह स्पष्ट तौर पर बतलाया गया हैं कि अयोध्या के सम्राट राम के लघु भ्राता लक्ष्मण के वंशज प्रतिहार है। लक्ष्मण वंशी प्रतिहार राजपूतों के वंशज आज के परिहार,पड़िहार, इंदा, देवल,मुंढाढ़, बडगूजर,सिकरवार आदि क्षत्रिय हैं।
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