Nagod Riyasat

Nagod Riyasat We are preserving the glorious history of pratihar rajput and nagod state. please support us. It is located 17 miles (27 km) from the town of Satna.

Nagod or Nagode is a town and a nagar panchayat in Satna district in the Indian state of Madhya Pradesh ruled by Pratihara Rajput. It is the administrative headquarters of Nagod Tehsil. It is believed that it was a small state owned by an oil-pressing people, known as 'Teli', who were exiled by the Pratiharas. Pratiharas originally came from Kannauj and belong to Agnikula Rajput. Nagod was formerl

y the capital of a princely state of British India.[1] The state was founded in 1344, and was known as Unchahara after the former capital of the state (until 1720). The state came under British influence in 1802, and became a princely state in the Bagelkhand Agency of what was later to become the Central India Agency. The state was made tributary to Panna from 1807 to 1809. The area of the state was 501 square miles (1,300 km2), with a population of 67,092 in 1901. The population of the state decreased 20% in the decade 1891-1901. The rulers, whose title was raja, were Rajputs of the Pratihara clan. Nagod was formerly a British military cantonment, and had an English language school and dispensary. The language spoken here is known as Hindi. It was also known as the State of Parihars.

महाराजा यादवेंद्र सिंह जु देव बहादुर नागौद (1874-1922)महाराजा यादवेन्द्र सिंह का जन्म 30 दिसम्बर, 1855 को हुआ था। उन्नीस...
26/08/2023

महाराजा यादवेंद्र सिंह जु देव बहादुर नागौद (1874-1922)
महाराजा यादवेन्द्र सिंह का जन्म 30 दिसम्बर, 1855 को हुआ था। उन्नीस वर्ष की अवस्था में 12 जून, 1874 को आपका राज्याभिषेक हुआ।
महाराज यादवेंद्र सिंह शिव के परम भक्त थे। शिवरात्रि के अवसर पर राज्य की ओर से पूरे फाल्गुन माह बड़ा उत्सव मनाया जाता था। यह उत्सव उचेहरा के श्री मुरलीधर मंदिर में किया जाता था।
महाराजा यादवेन्द्र सिंह 1922 ई० के दिल्ली दरबार में सम्मिलित हुए। इसी वर्ष मथुरा-वृन्दावन की तीर्थयात्रा करते हुए वे बनारस पहुंचे। 4 नवम्बर, 1922 ई० को अस्सी घाट स्थित नागौद राज्य की कोठी में उनका स्वर्गवास हुआ।


20/08/2023



शौर्य और स्वाभिमान के प्रतीक है महाराणा प्रताप- प्रभारी मंत्री कुंवर विजय शाहनागौद में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती ...
23/05/2023

शौर्य और स्वाभिमान के प्रतीक है महाराणा प्रताप- प्रभारी मंत्री कुंवर विजय शाह
नागौद में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती समारोह
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प्रदेश के वन मंत्री एवं सतना जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. कुवर विजय शाह ने कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप देश के शौर्य और स्वाभिमान के प्रतीक है। महान वीर पुरूषों की जीवनी और उनके कृतित्व का परिचय आने वाली पीढ़ियों को कराना जरूरी है ताकि नई पीढ़ी अपने देश की सास्कृतिक विरासत से सीखकर अपना भविष्य उज्जवल रख सके। मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री सतना कुंवर विजय शाह नागौद में आयोजित वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराजा शिवेंद्र सिंह ने की। इस मौके पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, पूर्व अध्यक्ष कामक्षा कुमारी सिंह,कुंवर इंद्रजीत सिंह किला नागोद बिग्रेडियर देवेन्द्र सिंह, सेवा निवृत्त प्रोफेसर धीरेन्द्र सिंह, प्रीतेन्द्र सिंह, मनीष प्रताप सिंह राव साहब सुरदहा, सहित कलेक्टर अनुराग वर्मा, पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता, एसडीएम धीरेन्द्र सिंह भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आयोजन 38 वर्षों से प्रताप समिति नागौद द्वारा किया जा रहा है। प्रभारी मंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप और महाराजा छत्रसाल सिंह देश की अनूठी प्रतिभायें रही है। जिन्होंने हिन्दुस्तान को मान, सम्मान और शौर्य के साथ गर्व से जीना सिखाया।
आयोजकों की मॉग पर प्रभारी मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि नागौद के अगोल मैदान में महाराणा प्रताप की भव्य कांस्य प्रतिमा स्थापित की जाये। प्रभारी मंत्री ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा के लिये एक लाख 38 हजार रूपये स्वयं के वेतन से देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि नागौद में प्रतिमा के साथ नगर पंचायत द्वारा आडीटोरियम भी बनाने के प्रयास किये जाये। प्रभारी मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि प्रतिमा के अनावरण अवसर पर शास्त्रीय संगीत का बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम और नगर भोज भी आयोजित किया जाये।
कार्यक्रम को नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने भी संबोधित किया। उन्होंने अगोल मैदान का नामकरण महाराणा प्रताप के नाम से करने की मॉग भी की। इस अवसर पर नागौद क्षेत्र के श्री सुरेन्द्र सिंह पूर्व व्याख्याता, विक्रम सिंह पूर्व सीसीएफ, डॉ. अतुल सिंह प्रोफेसर मेडीकल कॉलेज को प्रताप सम्मान और कथक नृत्यागंना प्रीति सिंह परिहार एवं राष्ट्रपति से पुरूस्कृत एनएसएस की छात्रा अर्चना कुशवाहा को प्रतिभा सम्मान से सम्मानित किया गया। समारोह में आयोजक गणों ने प्रभारी मंत्री डॉ. कुवर विजय शाह को साफा बांधकर सम्मानित किया।




Nagendra Singh Nagod
Manish Pratap Singh
Gajendra Singh Parihar
Kunwar Vijay Shah
Indrajit Singh Parihar
Kamaksha Kumari

Rajkumar Shri Chattrasal Singh judev with his wife Rani Uma Devi from Rajkot state and their son Kunwar Krishna Dev Sing...
03/04/2023

Rajkumar Shri Chattrasal Singh judev with his wife Rani Uma Devi from Rajkot state and their son Kunwar Krishna Dev Singh judev with his wife and daughter at their palace in Unchehra, Nagod state




23/03/2023
राष्ट्रीय गौरव प्रातः स्मरणीय सनातन धर्म रक्षक क्षत्रिय कुलभूषण मेवाड़अधिपति क्रांतिसूर्य एकलिंग जी दिवान वीर शिरोमणि श्र...
09/05/2022

राष्ट्रीय गौरव प्रातः स्मरणीय सनातन धर्म रक्षक क्षत्रिय कुलभूषण मेवाड़अधिपति क्रांतिसूर्य एकलिंग जी दिवान वीर शिरोमणि श्री श्री महाराणा प्रताप सिंह जी की 482 वी जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं !!

21/01/2022

महाराज कु.श्री कांतिदेव सिंह जूदेव, जी का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिये नागौद किले में कल सुबह 9:30 बजे तक रखा जायेगा। इसके पश्चात नागौद किले से उनकी अंतिम यात्रा राजा बाबा परसमनिया के लिए प्रस्थान होगी। सुबह 10:30 राजा बाबा परसमनिया में अंतिम संस्कार किया जाएगा ।

18 अक्तूबर,सनातन धर्म के रक्षक महान क्षत्रिय सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार की जयंती पर उनको कोटि कोटि नमन.एक ऐसा राजा जिसने अ...
18/10/2021

18 अक्तूबर,
सनातन धर्म के रक्षक महान क्षत्रिय सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार की जयंती पर उनको कोटि कोटि नमन.

एक ऐसा राजा जिसने अरब तुर्क आक्रमणकारियों को भागने पर विवश कर दिया और जिसके युग में भारत सोने की चिड़िया कहलाया.प्रतिहार क्षत्रिय राजपूत वंश के नवमीं शताब्दी में सम्राट मिहिरभोज भारत का सबसे महान शासक थे. उनका साम्राज्य आकार, व्यवस्था , प्रशासन और नागरिको की धार्मिक स्वतंत्रता के लिए चक्रवर्ती गुप्त सम्राटो के समकक्ष सर्वोत्कृष्ट था।
भारतीय संस्कृति के शत्रु म्लेछो यानि मुस्लिम तुर्को -अरबो को पराजित ही नहीं किया अपितु उन्हें इतना भयाक्रांत कर दिया था की वे आगे आने वाली एक शताब्दी तक भारत की और आँख उठाकर देखने का भी साहस नहीं कर सके।

चुम्बकीय व्यक्तित्व संपन्न सम्राट मिहिर भोज की बड़ी बड़ी भुजाये एवं विशाल नेत्र लोगों में सहज ही प्रभाव एवं आकर्षण पैदा करते थे। वह महान धार्मिक , प्रबल पराक्रमी , प्रतापी , राजनीति निपुण , महान कूटनीतिज्ञ , उच्च संगठक सुयोग्य प्रशासक , लोककल्याणरंजक तथा भारतीय संस्कृति का निष्ठावान शासक था।ऐसा राजा जिसका साम्राज्य संसार में सबसे शक्तिशाली था। इनके साम्राज्य में चोर डाकुओ का कोई भय नहीं था। सुदृढ़ व्यवस्था व आर्थिक सम्पन्नता इतनी थी कि विदेशियो ने भारत को सोने की चिड़िया कहा।

यह जानकर अफ़सोस होता है की ऐसे अतुलित शक्ति , शौर्य एवं समानता के धनी मिहिरभोज को भारतीय इतिहास की किताबो में स्थान नहीं मिला।मिहिरभोज के बारे में इतिहास की पुस्तकों के अलावा बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। इनके शासन काल की हमे जानकारी वराह ताम्रशासन पत्र से मालूम पडती है जिसकी तिथि (कार्तिक सुदि 5, वि.सं. 893 बुधवार) 18 अक्टूबर सन 836 ईस्वीं है इसी के अनुसार इनकी जयंती 18 अक्टूबर को हर वर्ष धूमधाम से मनाई जाती है ।

भारत के महान साम्राज्यों में प्रतिहारों का भी एक बड़ा साम्राज्य रहा है। आधुनिक इतिहासकारों ने इनको गुर्जर प्रतिहार लिखना शुरू कर दिया जबकि इन्होंने अपने आप को कभी गुर्जर प्रतिहार नहीं लिखा। इतिहासकार के एम मुन्शी ने अपने पुस्तक ‘ग्लोरीज देट गुर्जरदेश’ में इस विषय का विस्तृत रूप से विवेचन किया है और यह सिद्ध किया है कि प्रतिहार गुर्जर देश के स्वामी होने के कारण इनके विरोधियों ने इनको गुर्जर प्रतिहार परिभाषित कर दिया है। जब इनके शिलालेखों का हम अध्ययन करते है तो प्रतिहारों के शिलालेख तथा कन्नौज के प्रतिहार सम्राटों के शिलालेखों में यह स्पष्ट तौर पर बतलाया गया हैं कि अयोध्या के सम्राट राम के लघु भ्राता लक्ष्मण के वंशज प्रतिहार है। लक्ष्मण वंशी प्रतिहार राजपूतों के वंशज आज के परिहार,पड़िहार, इंदा, देवल,मुंढाढ़, बडगूजर,सिकरवार आदि क्षत्रिय हैं।

#क्षत्रियसम्राटमिहिरभोज

पूर्वजों के सम्मान की लड़ाई मे पहला बिगुल अब बज चुका है। #क्षत्रियसम्राटमिहिरभोज 🙏🙏 #नागौद
10/10/2021

पूर्वजों के सम्मान की लड़ाई मे पहला बिगुल अब बज चुका है।
#क्षत्रियसम्राटमिहिरभोज 🙏🙏
#नागौद

29/09/2021




मिहिर भोज के 'वंशज' ने पीएम नरेंद्र मोदी को क्यों लिखा लेटर?

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