16/04/2024
मेरे नागौर वालों तुम लोगों ने इन दिनों एक शब्द पकड़ रखा है "मायरा" क्या तुम्हें मायरे का सही अर्थ भी मालूम है ?
चलो में बताता हूं मायरा क्या होता है और किस जगह का मायरा प्रसिद्ध है । 600 से 700 वर्ष पूर्व जायल खिंयाला के दो भाई गोपाल राम व धर्माराम चौधरी ने ऐतिहासिक मायरा भरा था। दोनों ने लिछमा गुजरी के बेटी की शादी में, धर्म के भाइयों के तौर पर फर्ज निभाते हुए, लगान की पूरी राशि का मायरा भरा था और वो लगान का पैसा उनका नहीं था । फिर भी उन्होंने यह नहीं सोचा की यदि हमने यह पैसा यहां मायरे के तौर पर दे दिया तो हमारे साथ क्या होगा । लेकिन उन्होंने एक भाई का फर्ज निभाते हुए खुशियों का मायरा भरा जिसकी वजह से जब भी हमारे नागौर का नाम लिया जाता है । तो सबसे पहले ये उदाहरण दिया जाता है, कि नागौर ने ऐसे भी महापुरुषों को भी जन्म दिया है । जिन्होंने अपनी जान की परवा किए बिना अपनी सगी बहन न होते हुए भी उसके लिए जान खतरे में डाल दी।
पर आज के नागौर की बात अलग हैं, अब मायरे जैसे शब्द को टोंट के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं । और एक नेता तो मंच पर भी बीरो थारो आयो रे सोंग पर डांस करते नजर आ जाते हैं ।
यह उनका अंहकार हैं, घमंड हैं और साथ ही अपनी ही कौम के युवाओं को गलत दिशा दे रहे हैं । अरे सोचो अगर कोई हमारी बहन के लिए ऐसे टोंट में बोले की मायरा भर देंगे कैसा लगता हैं ?
ज्योति के भी सगे भाई नहीं है और अब खिंयाला के दो भाई गोपाल राम व धर्माराम भी इस दुनिया में नहीं हैं। इसलिए सब को दुबारा गोपाल राम व धर्माराम बनकर के ज्योति बहन के निराशा का नहीं खुशियों का मायरा भरना हैं । पूरे नागौर को गोपाल राम व धर्माराम बनकर इन बहन का साथ देना है अबकी बार मार मत देना लाज रख लेना ।