16/10/2020
मिठनपुरा से रोहुआ रोड जाने वाली सड़क एक लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। लोगों को आने-जाने में प्रत्येक दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। रामकृष्ण मिशन आश्रम से आगे इमली चौक तक सड़क टूटी है। जिन लोगों का घर बेला फेज़-1 में है, उन्हें बारिश के मौसम में इंडस्ट्रियल एरिया होकर आने-जाने में घुटने भर जलजमाव का सामना करना पड़ता है।
जो लोग ग्रामीण क्षेत्र से शहर आते हैं और फिर वापस शहर से अपने घर की ओर जाते हैं। उन्हें मिठनपुरा से ग्रामीण क्षेत्र की तरफ जाने वाली सड़क में विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र की ओर जाने वाली सड़कों पर वेपर लाइट का अभाव है। सड़कें टूटी हैं। बारिश के मौसम में जलजमाव का सामना करना पड़ता है।
इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित कई सारी फैक्ट्रियां, कल-कारखाने अपना वेस्ट मटेरियल नाले में छोड़ देती है और बारिश के मौसम में जब जलजमाव का स्तर ऊपर उठता है, तो यह वेस्ट मटेरियल नाले से निकल कर सड़कों तक फैल जाते हैं। कुछ गरीब परिवार जिन्होंने औधोगिक क्षेत्र में फैक्ट्रियों के इर्द-गिर्द अपना घर बनाया है, यह पानी उनके घर में भी घुस जाती है। बहरहाल, इससे आम जनजीवन प्रभावित होता है। लोगों का सेहत पर इसका असर पड़ता है। इंफेक्शन की समस्याएं बढ़ जाती है। लोग तेज़ी से बीमार होने लगते हैं। इस जलजमाव के संपर्क में आने पर त्वचा संबंधी रोग होने के चांसेस बहुत ज्यादा होते हैं।
कुछ ऐसी फैक्ट्रियां हैं जो 24 घंटे चालू हाल में रहती है और भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करती है। जिससे ऑक्सीजन का लेवल प्रभावित होता है और वातावरण मैं काफी मात्रा में प्रदूषण की बढ़ोत्तरी होती है। जिसके कारण स्थानीय नागरिकों के लंग्स पर इसका प्रभाव पड़ता है। लोगों में स्वांस संबंधी जटिल रोग होने का खतरा बढ़ता है।