04/06/2020
भारत का इलीट वर्ग दूसरे देशों के अल्पसंख्यक के रंगभेद,नस्लभेद पर या जानवरों की मौत पर तो दुख का डोंग दिखा सकता हैं
लेकिन खुद के देश के गरीब,वंचित, दलित,आदिवासी,मुस्लिम की मोब्लिंचिग, जातीय,हिंसा,आदिवासियों की जमीन हड़प कर उनके बेघर करने पर भारत का इलीट वर्ग एक शब्द भी नहीं बोल सकता है
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटा के मुताबिक़ साल 2014 से 2016 के बीच देशभर में दलितों के ख़िलाफ़ हिंसा या उत्पीड़न के कुल 1,19,872 मामले दर्ज किए गए. इनमें से सिर्फ़ 24.3 प्रतिशत मामलों में ही अभियुक्तों को सज़ा दी जा सकी.
अगर बात भारतीय महिलाओं के साथ अपराधों की तो उसमे भी इलीट वर्ग खास वर्ण की जातियों के हिंसा, मौत पर भी बहुत नग्न संख्या में आवाज उठाते हैं,
एनसीआरबी रिपोर्ट 2017 की रिपोर्ट के अनुसार : देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बड़ रहें हैं,
महिलाओं के खिलाफ अपराध के दर्ज मामलों में हत्या, बलात्कार, दहेज हत्या, परिवारिक उत्पीड़न, आत्महत्या के लिए उकसाना, एसिड हमले, महिलाओं के खिलाफ क्रूरता और अपहरण आदि शामिल हैं,
भारत में बढ़ते बलात्कार के मामलों के खिलाफ विरोध करती महिलाएं |
नई दिल्ली : राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक देश भर में वर्ष 2017 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,59,849 मामले दर्ज किए गए. महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार हर साल वृद्धि हुई है. एनसीआरबी के आंकड़े सोमवार को जारी किए गए.
2015 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,29,243 मामले दर्ज किए गए थे और 2016 में 3,38,954 मामले दर्ज किए गए थे.
महिलाओं के खिलाफ अपराध के दर्ज मामलों में हत्या, बलात्कार, दहेज हत्या, आत्महत्या के लिए उकसाना, एसिड हमले, महिलाओं के खिलाफ क्रूरता और अपहरण आदि शामिल हैं.
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, अधिकतम मामले उत्तर प्रदेश (56,011) में दर्ज किए गए. उसके बाद महाराष्ट्र में 31,979 मामले दर्ज किए गए.
आंकड़े के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 30,992, मध्य प्रदेश में 29,778, राजस्थान में 25,993 और असम में 23,082 मामले दर्ज किए गए.
भारत लैंगिक भेदभाव में कमी आ रही हैं, लोग अब समझ रहे हैं,
अगर भारत की अधिकतम जनसंख्या के अनुसार भारत में छोटी छोटी हिंसा,लड़ाई,झगड़ा आदि में 20 मामलों में से एक की एफआईआर दर्ज की जाती हैं, जबकि 19 का समझोता वहीं कर दिया जाता हैं,
जिस कारण ये छोटे,छोटे पारिवारिक झगड़े,उत्पीड़न एक दिन बड़े रूप ले लेते हैं,
भारत की 98% महिला शादी के बाद अपना जीवन लॉकडाउन के जीवन की तरह जीवन यापन करती हैं, उनकी 90% आजादी छीन ली जाती हैं,
और भारत देश की विडम्बना तो देखिए भारत देश में स्त्री को देवी समान दर्जा भी दिया गया है, भारत देश महिलाओं को देवी (god) के रूप में पूजा भी जाता हैं, भारत की महिलाओं की शैक्षिक स्तर की बात करे तो लगभग 60% के ऊपर लगभग बताया जाता हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ये 40% के करीब ही हैं, कांग्रेस के शासनकाल में ग्रामीण महिलाओं को आठवीं कक्षा तक का सर्टिफिकेट महज एक दो दिन की क्लास कराकर दे दिया गया था, ऐसा शिक्षित स्तर जिससे भारत की महिलाओं की शैक्षिक स्तर विश्व स्तर पर दिखाने के लिए बढ़ाया गया था,
भारत महिलाओं के शैक्षिक स्तर विश्व में लगभग 100 देशों के बाद स्थिति हैं,
भारत में मुस्लिम हिंसा की बात करें, भारत के 90% लोगो में धर्म के प्रति कट्टरता फैलाई जा रही हैं, भारत के लोगो ने धर्म को ही अपना जीवन मान लिया गया हैं, जिस कारण मॉब्लिंचिंग की घटना लगातार बढ़ रही हैं,
मोब्लिचिंग जैसी घटनाओं के लिए जल्द से जल्द रोकने के लिए कोई विधेयक संसद में पेश होकर पारित होना चाहिए, जिससे आरोपियों को मोबलिंचिग दंड दिया जा सके,