24/02/2026
आज जब नफ़रत की आवाज़ें तेज़ हैं, कुछ लोग उम्मीद बनकर खड़े हैं। कोटद्वार में मुस्लिम बुज़ुर्ग की दुकान पर हमले के दौरान मोहम्मद दीपक दीवार बनकर खड़े हुए यह इंसानियत की जीत थी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्षों से जिस जगह नमाज़ अदा होती रही, वहाँ ताला जड़ दिया गया। छात्र बाहर नमाज़ पढ़ने लगे और उनकी सुरक्षा में हिंदू छात्र घेरा बनाकर खड़े रहे। साथ रोज़ा इफ़्तार किया।
एक और घटना राजस्थान में बीजेपी नेता ने मुस्लिम महिलाओ को कंबल देने से मना किया, तो भेदभाव के विरोध में हिंदू बहनों ने कंबल लौटाकर इंसानियत चुनी।
यही वह भारत है जिसका सपना महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने देखा था।
नफ़रत फैलाने वाले जितनी मेहनत वे समाज को तोड़ने में लगाते हैं, उसका आधा भी रोज़गार, रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य और शिक्षा पर लगाएँ, तो देश की तस्वीर बदल जाए।