22/10/2025
अच्छा एक बात सोचो दिमाग़ पर जोर डाल कर
सपाई कोंग्रेसी घुटनों पर भी जोर डाल सकते हैं
कोई भी वायुसेना.... अलग अलग तरह के कॉम्बेट एयरक्राफ्ट क्यों रखती है......?
क्या सुखोई 30 MKI मल्टीरोल फाइटर नहीं.... बेकार है?
फिर हमने राफेल काहे लिए?
राफेल हैं तो उससे पुराने मिराज काहे पाले हुए हैं?
मिराज था तो तेजस काहे बनाया?
भाई भारत के लड़ाकू जहाज के बेड़े में SEPECAT जैगुआर को छोड़ सभी मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट ही हैं..... हर तरह की भूमिका निभाने को तैयार....
फिर भी हरेक की अपनी खासियत भी है और भूमिका भी...
सुखोई 30 MKI हवा में उड़ता दैत्य है....
अगर सामने से हमला हो ये अकेला कई पर भारी
पर आप इतने बड़े हैं तो आसान टार्गेट भी....
डॉग फाइट जैसी स्थिति में आपको छोटे, चपल इंटरसेप्टर की दरकार होगी..... मिग 21 पुराना जरूर था पर हवा की कुत्ता लड़ाई का राजा था..
सुखोई पास आने से पहले ही पेल डालेगा.... 300KM दूर रह कोई भी टार्गेट ध्वस्त कर देगा
अकेला इतना बारूद ले उड़ता है के पूरा बेस दुश्मन का धुआँ धुआँ कर दे...
पर मिग 21 की चपलता इसमें नहीं...
मिराज.... राफेल ये हैं जब आपको दुश्मन के घर में जाकर तेज हमला कर लौटना है...
सटीक.... त्वरित.. अचूक..
कारगिल से ऑपरेशन सिंदूर तक हर बार कामयाब
तेजस MK1A ईमानदारी की बात करुँ तो मिराज 2000 का उन्नत भारतीय संस्करण है.... जिसमें कुछ गुण मिग 21 वाले जोड़े भारतीय वायुसेना की डिमांड पर....
अब साहब अस्त्र mk2 लगने के बाद वाकई किसी भी चीनी पाकिस्तानी हवाई हमले में कुत्ता युद्ध में ये भारी पड़ेगा.... साथ ही इसमें ब्राह्मॉस NG होगी फिट तो सुखोई 30MKI की तरह गहराई तक भी मारेगा...
कम मेंटिनेन्स.... कम उड़ान खर्च... एक सुखोई के खर्च में तीन तेजस हवा में पहरेदारी करेंगे...
ऑपरेशन सिंदूर के समय भारत ने जब आतंकी ठिकानो को निशाना बनाया..... ये काम राफेल ने किया.... 100% सफल सटीक हमला...
और जब पाकिस्तान ने पलट कर ऐसा कुछ करने का प्रयत्न किया इसके बाद.... भाई राफेल आराम से अपने अपने हैंगर में थे.... आपके आसमान में मिग 29...सुखोई 30 MKI और तेजस थे....
बिलकुल दौनो तरफ़ से एक दूसरे को टार्गेट किया गया..... हमने बाकायदा रडार डाटा एनालाइज़ करने के बाद अपने एक एक दावे को रखा...
इसमें लम्बा समय लगता है...
सटीक लोकेशन के साथ दावे किये हमने कहाँ किसे ठोंका...
अब भाई तेजस गिरे... छिपाना आसान हो सकता है सुखोई जैसे हवाई दैत्य का मलवा एकाध किलोमीटर में बिखरेगा..... नहीं छिपा सकते आप
क्या आपको आज तक पाकिस्तानी या कांग्रेस के दावे में मलवा छोड़ें लोकेशन की जानकारी दी गयी....?
हाँ जब लड़ाई आमने सामने 150 लड़ाकू जहाज लड़ें.... नुकसान बेहद सामान्य है... संभव है हमारे भी सुखोई या तेजस या मिग को भी पहुँचा हो..
पर वो इतना बिलकुल न था कि वो अपने एयर बेस पर लौट न पाए हों...
हमने अपने जीवित योद्धाओं को वीरता पदक दिये वायुसेना के
तो पाकिस्तान ने मारे गए लोगों को...
क्या ये सच बताने को काफ़ी नहीं...
आखिर क्यों सरकार या सेना वो काम करे अपने नुकसान की डिटेल्स बताये जिसे करने को पाकिस्तान, अमेरिका, या चीन पूरा जोर लगाए हैं
हमारी कुछ कमजोरी हमें दिखी भी होगी हम उसपर काम करेंगे.... दुश्मन को काहे बताएँगे
अमेरिका के सेटेलाइट तो जमीन पर ओसामा की लुगाई पहचान लिए थे फोटो खींच....
भईया भारत के लड़ाकू जहाज सुरंग के भीतर तो गिरे न होंगे.... कर दो दो-चार की फोटो जारी...
अंतिम सत्य यही है भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में बिना बड़े नुकसान टार्गेट ध्वस्त किये...
और दुनियाँ भर की वायुसेना आज भारत के सफल ऑपरेशन से सीख रही हैं उसका अध्यन कर..... और इसी कमाल ताकत और सफलता ने भारत को अमेरिका और रूस के बाद तीसरी सबसे ताक़तवर वायुसेना का तमगा दिलाया है
पाकिस्तान और कांग्रेस के अब्बू चीन से ऊपर!!
✍️ Ajai Singh ✍️