चन्द्रेश दीक्षित

चन्द्रेश दीक्षित मैं वाणी का राजदूत हूँ,,, सच पर मरने वाला हूँ..!
डाकू को डाकू कहने की,,हिम्मत रखने वाला हूँ....|

02/08/2026

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14/06/2026

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तुम्हरिहि कृपाँ तुम्हहि रघुनंदन। जानहिं भगत भगत उर चंदन॥ #जय श्री राम 🙏💞 #जय बजरंगबली🙏💞
03/03/2026

तुम्हरिहि कृपाँ तुम्हहि रघुनंदन।
जानहिं भगत भगत उर चंदन॥
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शिवलिंग पर जल चढ़ाने का महात्म्य ।।कुछ लोगों को पता नहीं होता कि शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है, शिवलिंग पर जल कौन से ...
11/01/2026

शिवलिंग पर जल चढ़ाने का महात्म्य ।।

कुछ लोगों को पता नहीं होता कि शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है, शिवलिंग पर जल कौन से बर्तन से चढ़ाना चाहिए, जल चढ़ाते समय मुँह किस तरफ होना चाहिए, शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका क्या है और जल चढ़ाते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए। अतः यहां यही जानकारी प्रस्तुत है-

समुद्र मंथन के बारे मे सब जानते हैं। जब देवता और राक्षस समुद्र मंथन कर रहे थे तो समुद्र से भयानक विष निकलने लगा था। उस विष को भगवान शिव ने धारण किया था। लेकिन उस विष के प्रभाव से शिवजी का शरीर बहुत गर्म हो गया और उनके शरीर से ज्वालाएं निकलने लगी।

उनकी गर्मी शांत करने के लिए सभी लोग उन पर जल चढ़ाने लगे। जब तक विष निकलता रहा तब तक शिवजी उस विष को ग्रहण करते रहे, और गर्मी शांत करने के लिए सभी लोग उन पर जल गिराते रहे। इससे शिवजी की गर्मी शांत हुई और वे बड़े प्रसन्न हुए। तब उन्होंने प्रण लिया कि जब भी कोई उन पर जल चढ़ाएगा वो उसके जीवन से हर प्रकार का संकट यानि विष ग्रहणू कर लेंगे। इसीलिए संकट निवारण, शिवजी की प्रसन्नता तथा आशीर्वाद के लिए शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है।

कभी भी शिवजी को जल तेजी से नहीं चढ़ाना चाहिए। शास्त्रों में भी बताया गया है कि शिवजी को जलधारा अत्यंत प्रिय है। इसलिए जल चढ़ाते समय ध्यान रखें कि जल के पात्र से धार बनाते हुए धीरे से जल अर्पित करें। पतली जलधार शिवलिंग पर चढाने से भगवान शिव की विशेष कृपा दृष्टि प्राप्त होती है।

यह बहुत महत्वपूर्ण है की शिवजी को जल अर्पण करते समय हमारा मुँह किस तरफ होना चाहिए। शिवजी को जल चढ़ाते समय हमारा मुँह उत्तर की तरफ होना चाहिए। जलहरी की दिशा (मुँह) हमेशा उत्तर की तरफ होती है। अतः हमे जलधारी के मुँह के दूसरी तरफ रहना चाहिए।

सबसे पहले जलहरी के दाईं तरफ जल चढ़ायें वहाँ गणेशजी का स्थान होता है। फिर बाईं तरफ कार्तिकेयजी का स्थान होता है, वहाँ जल चढ़ाएं। इसके बाद दोनों के बीच शिवजी की पुत्री अशोक सुंदरी का स्थान होता है वहाँ जल चढ़ाएं। जलधरी का गोलाकार हिस्सा माता पार्वती का हस्तकमल होता है, उसे साफ करके वहाँ जल चढ़ाएं, इसके बाद शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।

पात्र मे भरा पूरा जल चढ़ा देना चाहिए। फिर भी बच जाए तो शिवजी के ऊपर यदि कलश हो तो जल उसमे डाल देना चाहिए।

शिवलिंग पर जल खड़े होकर चढ़ाना चाहिए या बैठकर यह इस पर निर्भर होता है कि शिवलिंग किस प्रकार का है। क्या आप जानते है की शिवलिंग कितने प्रकार के होते हैं। मंदिर मे शिवलिंग दो प्रकार के हो सकते हैं- शक्ति शिवलिंग और विष्णु शिवलिंग (हरी सर्वेश्वर शिवलिंग)

जिस शिवलिंग की जलहरी धरती से छूती हुई होती है वो शक्ति शिवलिंग होता है। इसकी जलहरी माता पार्वती का हस्त कमल होती है। ऐसे शिवलिंग पर बैठकर जल चढ़ाना चाहिए। जो शिवलिंग डमरू के आकार का होता है। जिसकी जलहरी धरती से थोड़ी ऊपर होती है। वो शिवलिंग विष्णु शिवलिंग कहलाता है। इसकी जलहरी ब्रह्माजी का हस्तकमल होती है जलहरी के नीचे बना आकार विष्णु जी का हस्तकमल होता है। ऐसे शिवलिंग पर खड़े होकर जल चढ़ाना चाहिए। खड़े रहकर जल चढ़ाते समय दोनों पैर बराबर नहीं रखना चाहिए। दायाँ पैर आगे और बायाँ पैर थोड़ा पीछे रखना चाहिए।

यह शंका लोगों के मन मे होती है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने का लोटा कौन सी धातु का होना चाहिए। जिस पात्र से शिवजी को जल चढ़ायें वह पत्र तांबे का या चांदी का होना चाहिए। तांबे का लोटा है तो इससे दूध नहीं चढ़ाना चाहिए। जल चढ़ाने के लिए स्टील के बर्तन का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि स्टील लोहे से बना होता है।

शिवजी को जल अर्पित करने का मंत्र-

ॐ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च।

नमः शन्कराय च मयस्कराय च।

नमः शिवाय च शिवतराय च।।

यदि इस मंत्र का उच्चारण ना कर पायें तो “ॐ नमः शिवाय” का जप भी कर सकते हैं।

।। शिव वंदना ।।

त्रिलाेचन तुम ही महादेव !

हे नीलकंठ हे अविनाशी।

तुमसे शोभित नगरी काशी।।

तुम रामेश्वर तुम सोमनाथ।

तुम डमरू के घोषित निनाद।।

केदारनाथ तुम ममलेश्वर।

तुम गौरापति तुम नागेश्वर।।

महाकाल तुम ओंकारेश्वर।

तुम विश्वनाथ काशीधीश्वर।।

तुम बैद्यनाथ की छवि धारे।

थे दुष्ट त्रिपुर राक्षस मारे।।

तुम मल्लिकार्जुन सरुप धरे।

भीमाशंकर कल्याण करें।।

तुम घृश्णेश्वर का दिव्य रुप।

त्र्यंबकेश्वर हो जगत भूप।।

सबको वरदानी आदिदेव।

त्रिलाेक भारती ही हैं महादेव।।

राम नाम मनु जातिरत्नं, राम नाम परमं पवित्रम्।राम नाम जपतं कल्मशं, राम नाम हरते पातकम्॥राम का नाम मानव जाति का रत्न है, स...
10/01/2026

राम नाम मनु जातिरत्नं, राम नाम परमं पवित्रम्।
राम नाम जपतं कल्मशं, राम नाम हरते पातकम्॥

राम का नाम मानव जाति का रत्न है, सबसे पवित्र मंत्र है... इसका जाप करने से पाप और दु:ख दूर हो जाते हैं.??
जय सियाराम 🙏

जय श्री सीताराम🙏💞जय श्री हनुमान जी महराज🙏💞जय श्री बाबा नींब करौरी जी महराज🙏💞
04/01/2026

जय श्री सीताराम🙏💞
जय श्री हनुमान जी महराज🙏💞
जय श्री बाबा नींब करौरी जी महराज🙏💞

|| शिखर दर्शनम् पाप नाशम् |
26/11/2025

|| शिखर दर्शनम् पाप नाशम् |

||करहिं आरती आरतिहर के| रघुकुल कमल बिपिन दिनकर के||🙏💞
16/11/2025

||करहिं आरती आरतिहर के|
रघुकुल कमल बिपिन दिनकर के||🙏💞

एमईएस एसडीओ चंद्र शेखर पांडे की पत्नी को बुखार आ रहा था और वो कमजोर होती जा रहीं थीं, ऐसा लग रहा था कि वो बच नहीं पाएंगी...
10/06/2025

एमईएस एसडीओ चंद्र शेखर पांडे की पत्नी को बुखार आ रहा था और वो कमजोर होती जा रहीं थीं, ऐसा लग रहा था कि वो बच नहीं पाएंगी। पांडे अपनी पत्नी को लेकर बहुत चिंतित थे। इधर, बिगड़ती तबीयत को देखकर उन्होंने अपने ससुर अनूपशहर के रहने वाले मोतीराम को तार भेजा।

इस खबर से बुजुर्ग मोतीराम बहुत परेशान हुए और अपने गुरु मौनी बाबा के पास गए और उनसे कहा, कि हे गुरुदेव, आज मैं आपसे विनती करता हूं, कि किसी भी तरह, मेरी बेटी को जीवन प्रदान करें, या मेरा जीवन समाप्त कर दें। मौनी बाबा कुछ देर तक ध्यान मुद्रा में रहे और फिर बोले, “केवल बाबा नीम करोली ही जीवन को बहाल करने में सक्षम हैं। तुम उनसे अपनी इच्छा पूरी करने के लिए प्रार्थना करो। इस पर अनूपशहर में मोतीराम बाबा का ध्यान करने लगे और उनसे प्रार्थना की।

इधर, नीम करोली बाबा झांसी में चंद्र शेखर पांडे के घर पहुंचे और पूछा कि तुम्हारी पत्नी कैसी है? पांडे बाबा को नहीं पहचानते थे तो पूछा कि आप कौन हैं। इस पर बाबा ने उत्तर दिया, “बाबा नीम करोली। ” इस पर पांडे ने कहा, ”वह अंदर मृत पड़ी है, नीम करोली बाबा ने कहा, “क्या तुम उसे मुझे दिखाओगे?” इस पर चंद्र शेखर पांडे नीम करोली बाबा को भीतर ले गए। बाबा ने उसके शव को देखकर कहा, “यह अभी मरी नहीं है। क्या आपके घर में कुछ अंगूर हैं? उन्हें, और एक कटोरा और एक चम्मच ले आओ। बाबा ने अंगूरों को हाथ में दबाकर थोड़ा सा अंगूर का रस निकाला और उस रस को उसके मुंह में डाल दिया।

इसके बाद चंद्र शेखर पांडे की पत्नी की नाड़ी धड़कने लगी और कुछ ही क्षणों में उसने आंखें खोल दीं। बाबा ने कहा, “उसे अंगूर का रस और दूध पिलाओ, वह ठीक हो जाएगी।” इसके बाद नीम करोली बाबा चले गए। पांडे की पत्नी की तबीयत ठीक होने लगी और बिना किसी उपचार के वह फिर से स्वस्थ हो गईं। बाद में पता चला कि जब पांडे की पत्नी छह साल की थी तब बाबा मोतीराम के घर आए थे।

इसी समय पड़ोसी के घर में किसी की मृत्यु हो गई थी और बच्ची ने यह पहली बार देखा तो उसके कोमल हृदय को सदमा लग गया। इस समय नीम करोली बाबा ने छह साल की लड़की की कोमलता देख प्यार से कहा कि “तुम्हें जो मांगना है मांग लो।” उसने कहा कि “बाबा जब मैं मर जाऊं तो मुझे वापस जीवित कर देना।” बाबा अपनी बात पर कायम थे, लेकिन उन्होंने उस समय कुछ नहीं कहा और अब बाबा ने लड़की यानी चंद्र शेखर पांडे की पत्नी को दिया वचन अब निभाया था।

27/04/2025

रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारं,
जलांतर्विहारं धराभारहारम्।

चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपं,
धृतानेकरूपं भजेहं भजेहम्॥🙏💞

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