02/06/2026
भगवान श्री हनुमान जी के 108 नामों का पाठ “श्री हनुमान अष्टोत्तरशतनामावली” कहलाता है। ये नाम उनके विविध रूपों, लीलाओं, गुणों और शक्तियों का बोध कराते हैं। इनका नियमित जाप करने से संकट दूर होते हैं, बल-बुद्धि बढ़ती है और श्रीराम की भक्ति प्राप्त होती है। यहाँ प्रत्येक नाम का अर्थ सहित विस्तृत वर्णन प्रस्तुत है।
श्री हनुमान अष्टोत्तरशतनामावली (अर्थ सहित)
1. ॐ हनुमते नमः
हनुमान – (हनु = जबड़ा) जिनका जबड़ा फूला हुआ है; पवनपुत्र, महाबली।
2. ॐ महाबलाय नमः महान् बल को धारण करने वाले।
3. ॐ वायुपुत्राय नमः पवनदेव के पुत्र।
4. ॐ अञ्जनीसुताय नमः माता अञ्जनी के पुत्र।
5. ॐ रामदूताय नमः श्रीराम के दूत (सीता की खोज में भेजे गए)।
6. ॐ अतुलितबलधाम्ने नमः अतुलनीय, असीम बल के निवासस्थान।
7. ॐ हेमशैलाभदेहाय नमः जिनका शरीर स्वर्ण पर्वत (सुमेरु) के समान कान्तिमान है।
8. ॐ दनुजवनकृशानवे नमः दनुजों (राक्षसों) रूपी वन के लिए अग्नि के समान भस्म करने वाले।
9. ॐ ज्ञानिनामग्रगण्याय नमः सभी ज्ञानियों में सर्वश्रेष्ठ, अग्रगण्य।
10. ॐ सकलगुणनिधानाय नमः समस्त गुणों के भण्डार।
11. ॐ रामभक्ताय नमः श्रीराम के अनन्य भक्त।
12. ॐ कपीश्वराय नमः कपियों (वानरों) के स्वामी।
13. ॐ अक्षहन्त्रे नमः रावण पुत्र अक्षयकुमार का वध करने वाले।
14. ॐ लङ्कापुरप्रदाहकाय नमः लंकापुरी को अपनी पूँछ की अग्नि से जलाने वाले।
15. ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण को पुनः प्राण देने वाले।
16. ॐ महाकपये नमः महान् कपि (विशालकाय वानर)।
17. ॐ सुग्रीवसखाय नमः सुग्रीव के मित्र और हितैषी।
18. ॐ वानरेश्वराय नमः वानरों के ईश्वर।
19. ॐ दशग्रीवदर्पहाय नमः दस सिर वाले रावण के अहंकार को चूर्ण करने वाले।
20. ॐ सीताशोकनिवारणाय नमः माता सीता के शोक को दूर करने वाले।
21. ॐ रुद्रावताराय नमः भगवान शिव के अंशावतार।
22. ॐ वज्रकायाय नमः जिनका शरीर वज्र के समान कठोर एवं अभेद्य है।
23. ॐ व्रतधारकाय नमः व्रत और संयम को धारण करने वाले।
24. ॐ ब्रह्मचारिणे नमः आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले।
25. ॐ सङ्कटमोचनाय नमः भक्तों के सभी संकटों को हरने वाले।
26. ॐ पिङ्गाक्षाय नमः भूरे-पिंगल रंग के नेत्रों वाले।
27. ॐ अग्निजिते नमः लंका दहन के समय अग्नि के प्रभाव को भी जीतने वाले।
28. ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः माता पार्वती को आनन्द प्रदान करने वाले (शिव अंश होने से)।
29. ॐ अञ्जनागर्भसम्भूताय नमः अञ्जनी माता के गर्भ से उत्पन्न।
30. ॐ दीनबन्धवे नमः दीन-हीन लोगों के बन्धु, रक्षक।
31. ॐ सञ्जीवनदाय नमः संजीवनी विद्या/शक्ति द्वारा जीवनदान देने वाले।
32. ॐ द्रोणहर्त्रे नमः द्रोणागिरि पर्वत को उखाड़कर लाने वाले।
33. ॐ कालनेमिप्रभञ्जनाय नमः कालनेमि राक्षस का विध्वंस करने वाले।
34. ॐ मैरावणप्राणहर्त्रे नमः मैरावण (अहिरावण का भाई) के प्राण हरने वाले।
35. ॐ चिरञ्जीविने नमः चिरकाल तक जीवित रहने वाले, अमर।
36. ॐ भीमाय नमः भयंकर शक्ति धारण करने वाले, अत्यन्त विशाल स्वरूप।
37. ॐ महातेजसे नमः महान तेज से सम्पन्न।
38. ॐ सुवर्चलापतये नमः सुवर्चला (सूर्यपुत्री) के पति (शास्त्र ज्ञान हेतु किया विवाह, पर ब्रह्मचर्य अखण्ड रखा)।
39. ॐ कुमारब्रह्मचारिणे नमः.सदा कुमार (अविवाहित) ब्रह्मचारी।
40. ॐ विभीषणप्रियाय नमः विभीषण को अत्यन्त प्रिय।
41. ॐ असुरगर्वहरणाय नमः असुरों के अहंकार का हरण करने वाले।
42. ॐ सर्वभूतहितैषिणे नमः सभी प्राणियों के हित की कामना करने वाले।
43. ॐ श्रीरामशरणाय नमः श्रीराम की शरण में स्थित रहने वाले।
44. ॐ जानकीशोकनाशनाय नमः जानकी (सीता) के शोक का नाश करने वाले।
45. ॐ अमितविक्रमाय नमः जिनका पराक्रम असीम एवं मापा नहीं जा सकता।
46. ॐ दुर्धराय नमः जिन्हें कोई भी दबा नहीं सकता, अजेय।
47. ॐ जनरञ्जनाय नमः भक्त जनों के मन को आनन्दित करने वाले।
48. ॐ वानराय नमः वानर रूप में प्रकट होने वाले।
49. ॐ सुग्रीवाराध्याय नमः सुग्रीव द्वारा आराधित, पूजनीय।
50. ॐ वानराकृतये नमः जिनकी बाह्य आकृति वानर सदृश है।
51. ॐ योगिने नमः पूर्ण योगी, योग में स्थित।
52. ॐ योगदाय नमः भक्तों को योग (भक्ति, कर्म, ज्ञान का सन्निवेश) प्रदान करने वाले।
53. ॐ महाबुद्धये नमः अपार बुद्धि से सम्पन्न (जैसे सूर्य से शिक्षा ग्रहण की)।
54. ॐ महाबलपराक्रमाय नमः महान बल और पराक्रम वाले।
55. ॐ रावणाङ्गसंहारकाय नमः रावण की सेना के अंगों (योद्धाओं) का संहार करने वाले।
56. ॐ सुग्रीवमन्त्रिणे नमः सुग्रीव के सलाहकार एवं मन्त्री।
57. ॐ वानरेशाय नमः वानरों के अधीश्वर।
58. ॐ दिव्यकायाय नमः दिव्य एवं प्रकाशमान शरीर वाले।
59. ॐ रुद्रांशाय नमः रुद्र (शिव) के अंश से उत्पन्न।
60. ॐ अतुलितप्रतापाय नमः जिनका प्रताप तुलनारहित है।
61. ॐ लङ्काप्रासादभञ्जकाय नमः लंका के ऊँचे-ऊँचे महलों-प्रासादों को तोड़ने वाले।
62. ॐ अहिरावणमर्दनाय नमः पाताल लोक में अहिरावण का मर्दन कर राम-लक्ष्मण को मुक्त कराने वाले।
63. ॐ सर्वलोकैकनाथाय नमः समस्त लोकों के एकमात्र स्वामी (भक्तों के लिए)।
64. ॐ दैत्यविद्रावणाय नमः दैत्यों को युद्ध से भगाने वाले।
65. ॐ कलियुगप्रभावाय नमः कलियुग में विशेष रूप से प्रभावशाली और शीघ्र प्रसन्न होने वाले।
66. ॐ शत्रुञ्जयाय नमः शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले।
67. ॐ जयदाय नमः विजय प्रदान करने वाले।
68. ॐ कामदाय नमः भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाले।
69. ॐ मुक्तिदाय नमः मोक्ष प्रदान करने वाले।
70. ॐ धीराय नमः अत्यन्त धैर्यवान, गम्भीर।
71. ॐ गुणाकराय नमः सभी सद्गुणों की खान।
72. ॐ विजितेन्द्रियाय नमः इन्द्रियों पर पूर्ण विजय प्राप्त किए हुए।
73. ॐ वानरध्वजाय नमः अर्जुन के रथ की ध्वजा पर वानर रूप में विराजमान।
74. ॐ रावणारये नमः रावण के अत्यन्त बड़े शत्रु।
75. ॐ अक्षयफलदाय नमः जो दिया वह कभी नाश न हो, ऐसा अक्षय फल देने वाले।
76. ॐ सङ्कटहारिणे नमः हर प्रकार के संकट का हरण करने वाले।
77. ॐ मङ्गलमूर्तये नमः स्वयं मंगल स्वरूप, कल्याणकारी।
78. ॐ सर्वदुःखनिवारकाय नमः समस्त दुःखों का निवारण करने वाले।
79. ॐ सत्यवाचे नमः सदा सत्य बोलने वाले, जिनका वचन कभी असत्य नहीं हुआ।
80. ॐ रामेष्टाय नमः श्रीराम को अत्यन्त प्रिय।
81. ॐ जितामित्राय नमः शत्रुओं को जीतने वाले।
82. ॐ दशकण्ठविदारणाय नमः दस ग्रीवाओं वाले रावण का विनाश करने में सहायक।
83. ॐ सुग्रीवप्रियाय नमः सुग्रीव को प्रिय लगने वाले।
84. ॐ प्रतापवते नमः अत्यधिक प्रतापशाली।
85. ॐ शरणागतरक्षकाय नमः शरण में आए भक्त की रक्षा करने वाले।
86. ॐ ब्रह्मज्ञानप्रदाय नमः ब्रह्म का ज्ञान देने वाले।
87. ॐ तत्त्वज्ञाय नमः सभी तत्त्वों को यथार्थ रूप में जानने वाले।
88. ॐ विश्वरूपाय नमः विराट् स्वरूप धारण करने वाले।
89. ॐ कपिराजाय नमः वानरों के राजा।
90. ॐ रामकाजधुरन्धराय नमः श्रीराम के कार्य का भार अपने कन्धों पर धारण करने वाले।
91. ॐ मारुतात्मजाय नमः पवनदेव के आत्मज (पुत्र)।
92. ॐ बलिष्ठाय नमः अति बलशाली।
93. ॐ महाकायाय नमः बहुत बड़े और विशाल शरीर वाले।
94. ॐ सुतीक्ष्णदंष्ट्राय नमः अत्यन्त तीखे दाँतों वाले (राक्षसों के लिए भयानक)।
95. ॐ भूतनाथाय नमः समस्त भूतों-प्राणियों के स्वामी।
96. ॐ नादबिन्दुकलातीताय नमः नाद, बिन्दु और कला से परे, परब्रह्मस्वरूप।
97. ॐ परमयोगिने नमः परम श्रेष्ठ योगी।
98. ॐ बुद्धिरूपाय नमः स्वयं बुद्धि के स्वरूप।
99. ॐ धर्मरक्षकाय नमः धर्म की रक्षा करने वाले।
100. ॐ विपाप्मने नमः सर्वथा पापरहित।
101. ॐ क्षेमकृते नमः भक्तों का कुशल-क्षेम करने वाले।
102. ॐ फाल्गुनसखाय नमः अर्जुन (फाल्गुन) के सखा एवं रथ की रक्षा करने वाले।
103. ॐ अञ्जनानन्दनाय नमः माता अञ्जनी को आनन्द देने वाले पुत्र।
104. ॐ केसरीपुत्राय नमः वानरराज केसरी के पुत्र।
105. ॐ श्रीरामभक्ताय नमः श्रीराम के भक्त (पुनः उसी भक्तिभाव की स्थापना)।
106. ॐ सीताशोकविनाशनाय नमः सीता जी के सम्पूर्ण शोक का विनाश करने वाले।
107. ॐ संजीवनीकृते नमः संजीवनी बूटी लाकर असम्भव कार्य को सम्भव करने वाले।
108. ॐ पवनात्मजाय नमः पवनदेव के आत्मज, प्राणस्वरूप।
इन 108 दिव्य नामों का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से साधक को बल, बुद्धि, विद्या, निर्भयता और श्रीराम की कृपा की प्राप्ति होती है। जय श्री हनुमान।