राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी : देशद्रोही या आतंकवादी?

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और
भारतीय जनता पार्टी : देशद्रोही या आतंकवादी? Anti Corruption and Human Rights

*"हक़ और इंसाफ़ की पुकार"*"कौन कहता है कि हक मांगने का सलीका नहीं, ग़रीब की आवाज़ में कोई नज़्म-ओ-नदीमा नहीं। ज़मीन उनकी...
13/03/2025

*"हक़ और इंसाफ़ की पुकार"*

"कौन कहता है कि हक मांगने का सलीका नहीं, ग़रीब की आवाज़ में कोई नज़्म-ओ-नदीमा नहीं। ज़मीन उनकी, आसमान पर भी हक उनका है, जिनके खून-पसीने से ये जहां रौशन हुआ है।

वोट को तोड़कर सौदे की तरह पेश किया जाता है, हक़ का सवाल करने पर चुप करा दिया जाता है। पर याद रखो, हर मजलूम की दुआ रंग लाएगी, जुल्म की ये दीवारें एक दिन जरूर गिराई जाएंगी।

गर हौसले में बुलंदी हो, तो वक्त बदलता है, तूफानों से लड़ने का हुनर ग़रीब ही रखता है। ये सन्नाटे, ये चीखें, अब खामोश नहीं रहेंगी, ग़रीब के हर आंसू को, अब आवाज़ मिलेगी।

जो वोट को धर्म-जात में बांटते हैं हर मोड़ पर, वो भूल गए कि इंसाफ रहता है हर चौखट पर। वो दिन दूर नहीं, जब सूरज सच का उगेगा, हर मेहनतकश का मुकद्दर नूर से सजेगा।"

*"ज़ुल्म की दीवारें गिरा के दम लेंगे, ये इमरान का ख्वाब नहीं, उसका वादा है।"*

*इमरान नज़ीर शेख (संस्थापक और निदेशक, ह्यूमैनिक डेवेलपमेंट फाउंडेशन)*

*गरीबों के हक़ और न्याय की जंग: हॉकर्स का मसला और संविधान का सच**मुकद्दमे की शुरुआत:* ये सिर्फ हॉकर्स की बात नहीं, हर गर...
13/03/2025

*गरीबों के हक़ और न्याय की जंग: हॉकर्स का मसला और संविधान का सच*

*मुकद्दमे की शुरुआत:* ये सिर्फ हॉकर्स की बात नहीं, हर गरीब की आवाज़ है

आज हिंदुस्तान के गरीब और मेहनतकश हॉकर्स की रोज़ी-रोटी पर हमला किया जा रहा है। उनकी ज़िंदगी में मुश्किलें पैदा की जा रही हैं, और उन्हें उनके हक़ से महरूम किया जा रहा है। यह सिर्फ़ मुंबई का मसला नहीं, बल्कि पूरे देश के मेहनतकश तबके का सवाल है।
*"क्या गरीब का वोट सिर्फ सत्ता तक पहुंचने का ज़रिया है? और उसके बाद उसका वजूद, उसकी आवाज़ कोई मायने नहीं रखती?"*

*गरीबों के अधिकारों का हनन:* क्या कहता है संविधान?

संविधान ने हर भारतीय को समान अधिकार दिए हैं, लेकिन जब गरीबों और मेहनतकश वर्ग को कहा जाता है कि *"तुमने मुझे वोट नहीं दिया, तो मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकता,"* तो यह लोकतंत्र और संविधान दोनों का खुला अपमान है।

*संवैधानिक प्रावधान जो गरीबों को सुरक्षा देते हैं:*

*1. अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार):*

हर व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता का अधिकार है। गरीब और अमीर में कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

*2. अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय करने का अधिकार):*

हर व्यक्ति को अपने व्यवसाय, व्यापार या धंधे का अधिकार है। हॉकर्स को उनके रोजगार से वंचित करना इस अधिकार का हनन है।

*3. अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार):*

सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार हर भारतीय का मौलिक अधिकार है। गरीबों को उनके जीवन के अधिकार से वंचित करना, उन्हें भूख से मरने पर मजबूर करना, संविधान के खिलाफ है।

*4. स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट, 2014*

यह कानून विशेष रूप से स्ट्रीट वेंडर्स (फेरीवाले/हॉकर्स) की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है।

*मुख्य प्रावधान:*

हॉकर्स को लाइसेंस प्राप्त करने का अधिकार है। बिना अनुमति उनके स्टॉल को हटाना या उन्हें परेशान करना गैरकानूनी है। स्थानीय प्रशासन (जैसे BMC) पर यह जिम्मेदारी है कि वह वेंडिंग जोन तय करें और उनके लिए स्थायी व्यवस्था करें। रेहड़ी-पटरी वालों के लिए 'टाउन वेंडिंग कमेटी' (TVC) बनाई जाए, जिसमें उनकी समस्याओं का समाधान हो।

*5. सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (1985)*

*सुप्रीम कोर्ट ने कहा:*

रोज़गार करना जीने के अधिकार का हिस्सा है। हॉकर्स और फेरीवालों को उनके जीवन और रोजगार से वंचित करना अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) का उल्लंघन है। बिना उचित व्यवस्था किए और बिना नोटिस उनके स्टॉल हटाना गैरकानूनी है।

*6. अनुच्छेद

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