25/08/2026
खरगोश तेज़ था, कछुआ धीमा था, लेकिन क्या सिर्फ़ इसी लिए कछुआ जीता?
हमने बचपन से 'The Tortoise and the Hare' की इस कहानी से सीखा, “Slow and steady wins the race.” लेकिन ज़रा कहानी को दूसरी नज़र से देखिए। कछुए की consistency जितनी उसकी जीत की वजह थी, उतनी ही खरगोश का overconfidence उसकी हार की वजह थी।
अगर खरगोश focused और disciplined रहता, तो शायद कहानी का अंत कुछ और होता।आज की दुनिया में सिर्फ़ slow and steady होना काफी नहीं है। यहाँ speed के साथ discipline चाहिए, consistency के साथ self-awareness चाहिए और talent के साथ relentless effort भी।
शायद पुरानी कहावतों को नकारने की नहीं, उन्हें नए समय और नए context में समझने की ज़रूरत है। क्योंकि जो lesson कल सही था, ज़रूरी नहीं कि आज भी पूरी कहानी वही हो।
तो अगली बार जब कोई कहे, “Slow and steady wins the race”, ज़रा यह भी पूछिए, “लेकिन क्या खरगोश दौड़ना बंद कर चुका है?”
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