Swati lahoti

Swati lahoti Deeply passionate about active citizenship & good governance. A firm believer in 'We live in the country we deserve’.

Tune in for honest conversations, ideas & collective action for a better India.
अपनी सबसे दोस्ती, नहीं किसी से बैर | Swati Lahoti, based in Mumbai, is a writer by passion. A postgraduate in English and MBA in Marketing & HR, she has variously worked as a copywriter with advertising agencies and a placement consultant. However, the role most dear to her heart is that of a mother, helping her two so

ns reach the pinnacle of success. This book is about her redemption as a student, as a teacher, as a mother and most importantly as a daughter.

25/08/2026

खरगोश तेज़ था, कछुआ धीमा था, लेकिन क्या सिर्फ़ इसी लिए कछुआ जीता?

हमने बचपन से 'The Tortoise and the Hare' की इस कहानी से सीखा, “Slow and steady wins the race.” लेकिन ज़रा कहानी को दूसरी नज़र से देखिए। कछुए की consistency जितनी उसकी जीत की वजह थी, उतनी ही खरगोश का overconfidence उसकी हार की वजह थी।

अगर खरगोश focused और disciplined रहता, तो शायद कहानी का अंत कुछ और होता।आज की दुनिया में सिर्फ़ slow and steady होना काफी नहीं है। यहाँ speed के साथ discipline चाहिए, consistency के साथ self-awareness चाहिए और talent के साथ relentless effort भी।

शायद पुरानी कहावतों को नकारने की नहीं, उन्हें नए समय और नए context में समझने की ज़रूरत है। क्योंकि जो lesson कल सही था, ज़रूरी नहीं कि आज भी पूरी कहानी वही हो।

तो अगली बार जब कोई कहे, “Slow and steady wins the race”, ज़रा यह भी पूछिए, “लेकिन क्या खरगोश दौड़ना बंद कर चुका है?”

Sahitya Akademi National Council of Educational Research and Training - NCERT

22/08/2026

पति का चले जाना किसी स्त्री के जीवन का चले जाना नहीं है।
फिर भी हमारे समाज ने उसके लिए एक शब्द बना दिया, उसकी पहचान तय कर दी और कई बार उसके जीने के तरीके तक पर पहरा लगा दिया।
मुझे “विधवा” शब्द से आपत्ति भी है नाराज़गी भी. मेरा बस चले तो इस शब्द की जगह मैं “साध्वी” कहूँगी, उस स्त्री के लिए जिसने जीवन की सबसे बड़ी चोट के बाद भी जीवन का हाथ नहीं छोड़ा।

जैसे समाज ने 'विकलांग' के स्थान पर 'दिव्यांग' शब्द को प्रचलित किया, मैं आप सब के सक्रिय सहयोग से 'विधवा' के लिए 'साध्वी' शब्द इस्तेमाल करने का आह्वान करती हूँ और मैं जानती हूँ कि आप सब सुधी जन इस में मेरे साथ हैं।

इस वीडियो की कहानी उन तमाम स्त्रियों के बारे में है जिन्हें पति के जाने के बाद समाज ने जीने के बजाय सिर्फ निभाने की सलाह दी।
और शायद हमें एक बार फिर याद करने की जरूरत है कि मरने से पहले जीना नहीं छोड़ना चाहिए।
#विधवा_नहीं_साध्वी

19/08/2026

शायद ज़िंदगी को समझने का एक तरीका यह भी है कि हम हर अधूरेपन को अपनी हार मानना बंद कर दें।कुछ सपने पूरे नहीं हो पाए, कुछ रास्ते हमारी उम्मीद के मुताबिक नहीं निकले, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह सब व्यर्थ था। हो सकता है, उन्हीं अधूरे रास्तों ने हमें आज का वह इंसान बनाया हो, जो पीछे मुड़कर अपनी कहानी को थोड़ी अधिक समझ, थोड़ी अधिक करुणा और थोड़ी कम कठोरता से देख सकता है।

और फिर एक दिन मन कहता है, जो बीत गया उसे बदलना हमारे हाथ में नहीं, लेकिन जो आज हमारे पास है और जो कल किया जा सकता है, उसे कैसे जीना है, यह आज भी हमारे हाथ में है।

चलो, ख़ुद पे कुछ रहम किया जाए,
अपने ही ज़ख़्मों को मरहम दिया जाए,
सपनों की पतंगों को हवाओं को सौंप कर,
जो होना है, उसे बेख़ौफ़ होने दिया जाए।

शायद यही अपने आप से की जाने वाली सबसे खूबसूरत दोस्ती है, अपने अतीत को माफ़ करना और अपने भविष्य पर फिर से भरोसा करना।

अगर आपके मन में भी कोई ऐसा सपना है, जिसे आपने कभी अधूरा छोड़ दिया था, तो आज उसे फिर से याद कीजिए। हो सकता है, उसे पूरा करने का रास्ता वही न हो जो आपने कभी सोचा था, लेकिन एक दूसरा रास्ता अभी भी कहीं आपका इंतज़ार कर रहा हो।

16/08/2026

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क्या हमारी ज़िंदगी के सारे फैसले सचमुच हमारे अपने थे?

हम अक्सर अपने पुराने decisions को आज की समझ से judge करते हैं और सोचते हैं कि अगर उस समय थोड़ा और समझदार या साहसी होते, तो शायद ज़िंदगी कुछ और होती।

लेकिन उस समय हमारे पास वही जानकारी, वही समझ और वही परिस्थितियाँ थीं, जो हमें मिली थीं। तो फिर अपने पुराने self को उसकी हर गलती के लिए उम्र भर सज़ा देना क्या वाकई इंसाफ़ है?

शायद खुद को माफ़ करने की शुरुआत यहीं से होती है।

13/08/2026

क्या आपकी ज़िंदगी में भी कोई एक "काश..." है?

एक ऐसा फैसला, जिसे आज भी याद करके मन में हल्की-सी टीस उठती है। एक ऐसा रास्ता, जिस पर अगर चल पड़े होते, तो ज़िंदगी की कहानी कुछ और होती।

इस वीडियो में मैंने अपनी ज़िंदगी के कुछ ऐसे ही अधूरे सपनों और फैसलों के बारे में खुलकर बात की है। कॉलेज, करियर, और उन decisions के बारे में, जो हमारी पूरी ज़िंदगी की दिशा बदल देते हैं।

लेकिन क्या सचमुच सब कुछ हमेशा के लिए छूट जाता है? या ज़िंदगी कभी-कभी किसी और रास्ते से हमारी अधूरी इच्छाओं को पूरा कर देती है?

अगर आपके जीवन में भी कोई एक "काश..." है, तो उसे कमेंट में ज़रूर लिखिए। मुमकिन है कि आपकी कहानी आपको हल्का करने के साथ किसी और को भी हल्का कर दे।

यह तीन videos की इस श्रृंखला का पहला वीडियो है। अगले भाग में बात करेंगे कि इन "काश" के साथ जीना कैसे सीखें, और क्या सचमुच ज़िंदगी हमें दूसरा मौका देती है।

11/08/2026

हम अपने बच्चों की school, grades, friends, hobbies और उनकी रोज़मर्रा के routine के बारे में बहुत कुछ जानते हैं। अपने parents की medicines और health check-ups याद रखते हैं। अपने partner के काम का stress भी समझने की कोशिश करते हैं लेकिन क्या हम यह जानते हैं कि वे अंदर से कैसा महसूस कर रहे हैं?
कई बार लोग अपनी परेशानी शब्दों में नहीं बताते। उनका व्यवहार बदलता है, वे चुप रहने लगते हैं, अकेले रहने लगते हैं, या धीरे-धीरे खुद को सबसे दूर करने लगते हैं। और हम उन signals को यह कहकर normalize कर देते हैं कि “वो तो ऐसा ही है” या “शायद stress होगा।”
एक ही घर की छत के नीचे कई अलग-अलग अकेलेपन पल सकते हैं।

इसलिए अगली बार किसी अपने को चुप देखें, सिर्फ यह मत पूछिए, “सब ठीक है?” थोड़ा रुककर पूछिए, "तुम अंदर से कैसा महसूस कर रहे हो?” क्योंकि कभी-कभी एक बातचीत उस दरवाज़े को खोल सकती है, जिसे कोई बहुत समय से अंदर से बंद किए बैठा है।

10/08/2026

हर माँ Scientist भी है... Manager भी है। बस हमने कभी उन्हें इन नामों से पुकारा ही नहीं।

जब भी महिलाओं की उपलब्धियों की बात होती है, हम कहते हैं कि आज महिलाएँ Scientist बन रही हैं, Manager बन रही हैं। लेकिन क्या सचमुच ऐसा है? या फिर हर माँ सदियों से यह सब करती आई है, बिना किसी Degree, Designation या Salary के?

दही जमाने से लेकर पूरे घर का Budget संभालने तक... Limited Resources में सबकी ज़रूरतें पूरी करने से लेकर हर दिन नए Solutions निकालने तक... शायद हम रोज़ एक Scientist, एक Manager और एक Finance Expert को अपने ही घर में देखते हैं, लेकिन पहचान नहीं पाते।

इस वीडियो में मैंने उसी अनदेखी प्रतिभा की बात की है, जिसे हम अक्सर "बस घर का काम" कहकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

पूरा वीडियो देखिए, और कमेंट में ज़रूर बताइए... क्या आपकी माँ या घर की किसी महिला की कोई ऐसी बात है, जिसे आज सोचकर लगता है कि वह अपने समय से बहुत आगे थीं?

07/08/2026

कई बार हमें लगता है कि हमारी ज़िंदगी हमारे बड़े फैसले बदलते हैं। लेकिन सच तो यह है कि हमारी ज़िंदगी उन छोटी-छोटी आदतों से बनती है, जिन्हें हम हर दिन बिना सोचे दोहराते रहते हैं।

मेरे लिए एक साधारण-सा जिम बैग इस बात की याद दिला गया कि पहले हम अपनी आदतें बनाते हैं, फिर वही आदतें हमें बनाती हैं।

अगर अपनी ज़िंदगी बदलनी है, तो सिर्फ़ motivation का इंतज़ार मत कीजिए। अपने environment को इस तरह डिज़ाइन कीजिए कि सही काम करना आसान हो जाए।

पूरी वीडियो देखिए, और कमेंट में ज़रूर बताइए कि आपकी कौन-सी एक छोटी आदत ने आपकी ज़िंदगी पर सबसे बड़ा सकारात्मक असर डाला है।

04/08/2026

जंतर मंतर पर जो हुआ, क्या वह सिर्फ एक protest था... या Gen Z की एक ऐसी आवाज़, जिसे बहुत देर से सुना गया?

इस वीडियो में बात सिर्फ जंतर मंतर, paper leak या किसी एक आंदोलन की नहीं है। बात उस generation gap की है, जो धीरे-धीरे हमारे घरों में पैदा होता है। जब संवाद बंद होता है, तो आवाज़ें ऊँची होने लगती हैं।

अगर हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे हमें समझें, तो शायद शुरुआत हमें उन्हें सुनने से करनी होगी।

पूरा वीडियो देखिए। आपकी राय जानने का इंतज़ार रहेगा।

29/07/2026

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