25/08/2025
25/8/25 प्रवचन श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ (मेवाड़) मुंबई उपसंघ सांताक्रुज
पवराधिराज प्रयूषण के छठे दिन विश्वास जी म. सा. ने सम्बोधित करते हुए सफर जिन्दगी का महावीर के संग " कहा- कि ज़िन्दगी का सफर यादि महावीर के साथ तय किया तो आप भव से पार हो सकते है। अधर्म से जुड़े रहे परिवार के साथ सफर तय करते रहोगे तो संसार में भटकते रहोगे।किसी कवि ने कहा है - काटो से दिल लगाओं, तो ताउम्र साथ दे , फूलों का क्या जो सांस, कि गर्मी न सह सके॥ कोटो से दिल लगाया ,सुख-दुख आसानी से कट जाते हैं पूरी उम्र साथ देते हैं फूलों का क्या, एक सॉसों की गर्मी से मुरझा जाता है। जीवन आशा में है निराशा में नहीं। भगवान से सच्चा प्रेम अपनी आत्मा के अंदर की खोज करना सिखाता है। हमारा आवरण ऐसा बना रखें कि जिससे सभी हमारे मित्र बने, न की शत्रु | भगवान ने हमें अमर संदेश दिया है, "जियो और जीने दो "हमें कहा बोलना क्या बोलना, कैसा सुनना इसका विवेक होना चाहिए। निंदा चुगली करना नहीं, सूनना नहीं इस प्रकार कहा। ज्ञानीजन कहते है। जीवन को सार्थक करने के लिए स्वयं का चिंतंन करना जारी रखे। चिंतन के बिना आपका जीवन संवर नहीं सकता है। भगवान महाविर ने राह बताई है, मगर उस पर चले बीना सफर आसान नहीं हो सकती है। साध्वी आरजु जी म.सा. ने अतंगढ़ सूत्र की व्याख्या करते हुए अर्जुन माली ने किस प्रकार सयंम लेकर क्षमा को धारण कर भ. जैसे पहले 6 महिने में ही सयंम लेकर सिध्द बुद्ध और मुक्त हो गए। मोक्ष की ट्रेन का सफर छुक 2 रेल चली है जीवन को हंसना, रोना, जागना, सोना, खोना, पाना सुख-दुख छुक छुक रेल चली छोटी- छोटी बातों से, मोटी -मोती खबरों तक ये गाड़ी ले जायेगी हमको, माँ की गोद से कबरों तक। सब चिल्लाते रह जाओगे, रूक , रुक । छुक , छुक रेल चली