11/04/2021
*सामाजिक क्रांति के जनक: महात्मा जोतिराव फुले*
महात्मा जोतिराव गोविंदराव फुले (11 अप्रैल 1827 - 28 नवम्बर 1890) एक महान समाजसुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें *महात्मा फुले* एवं *जोतिबा फुले* के नाम से भी जाना जाता है। महिलाओं व दलितों के उत्थान के लिय इन्होंने अनेक कार्य किए। समाज के सभी वर्गो को शिक्षा प्रदान करने के ये प्रबल समथर्क थे। वे भारतीय समाज में प्रचलित जाति पर आधारित विभाजन और भेदभाव के विरुद्ध थे।
इनका मूल उद्देश्य स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार प्रदान करना, बाल विवाह का विरोध, विधवा विवाह का समर्थन करना रहा है। फुले समाज की कुप्रथा, अंधश्रद्धा की जाल से समाज को मुक्त करना चाहते थे। अपना सम्पूर्ण जीवन उन्होंने स्त्रियों को शिक्षा प्रदान कराने में, स्त्रियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में व्यतीत किया। १९ वी सदी में स्त्रियों को शिक्षा नहीं दी जाती थी। फुले महिलाओं को स्त्री-पुरुष भेदभाव से बचाना चाहते थे। उन्होंने कन्याओं के लिए भारत देश की पहली पाठशाला पुणे में बनाई। स्त्रियों की तत्कालीन दयनीय स्थिति से फुले बहुत व्याकुल और दुखी होते थे इसीलिए उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि वे समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाकर ही रहेंगे। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी सावित्रीबाई फुले को स्वयं शिक्षा प्रदान की। सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला अध्यापिका थीं।
गरीबो और निर्बल वर्ग को न्याय दिलाने के लिए ज्योतिबा ने *सितम्बर १८७३ में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन किया।*
उनकी समाजसेवा देखकर *1888 ई. में मुंबई की एक विशाल सभा में उन्हें 'महात्मा' की उपाधि दी गई।*
ज्योतिबा ने *ब्राह्मण पुरोहित* के बिना ही विवाह-संस्कार आरम्भ कराया और इसे मुंबई हाईकोर्ट से भी मान्यता मिली। वे बाल-विवाह के विरोधी और विधवा-विवाह के समर्थक थे।
धर्म, समाज और परम्पराओं के सत्य को सामने लाने हेतु उन्होंने अनेक पुस्तकें भी लिखी:- *गुलामगीरी, तृतीय रत्न, छत्रपति शिवाजी, राजा भोसला का पखड़ा, किसान का कोड़ा, अछूतों की कैफियत.*
महात्मा ज्योतिबा व उनके संगठन के संघर्ष के कारण सरकार ने *एग्रीकल्चर एक्ट* पास किया।
*ब्रिटिश सरकार द्वारा उपाधि:* १८८३ में स्त्रियों को शिक्षा प्रदान कराने के महान कार्य के लिए उन्हें तत्कालीन ब्रिटिश भारत सरकार द्वारा *स्त्री शिक्षण के आद्यजनक* कहकर उन्हें गौरवान्वित किया गया।
आज उनके 195वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर कृतज्ञ राष्ट्र का कोटिशः नमन्।
🙏 *जय भीम नमो बुद्धाय*🙏