30/05/2026
हिंदू मृतक सूर्या और मुस्लिम हत्यारे असद के बीच किसी बात पर कुछ महीने पहले विवाद हुआ था। उसके बाद असद ने सूर्या को बक़रीद का निमंत्रण दिया और सूर्या उसके घर गया।। जिसके बाद कई चाकू मारे गए और सूर्या इस दुनिया से विदा हो गया।
इसमें मुझे कुछ नया नहीं दिख रहा सिवाय इसके कि....
1. मुसलमानों की मनोवृत्ति को आज के समय में इतना उजागर कर देने के बाद भी सूर्या जैसे हिंदू के दोस्त असद जैसे लोग होते हैं याने मुस्लिम।।
2. विवाद हो जाने के बाद भी सूर्या जो है वो असद के घर जाने जैसी मूर्खता करता है.
3. वहाँ पहुँच कर उसके घर में कहासुनी कर लेता है... जबकि वो पहले से क़ुर्बानी के लिए तैयार बैठा होता है...
मदरसे और अपनी तालीम के अनुसार मुस्लिम कभी भी, और कितना भी पुराना ऐसा अपमान नहीं भूल सकता जो उसने किसी हिंदू के हाथों पाया हो।।। ये बात हिंदू को समझनी चाहिए।।।
मुस्लिम दोस्त अपने कार्यस्थल तक ही रखने चाहिए जहाँ तक आपकी मजबूरी है. ना कभी उसको घर बुलाओ और ना कभी उसके घर जाओ.
मुझे मेरे कुछ मुस्लिम लोग जो प्रोफेशनली कार्य की वजह से परिचित है और हमेशा मिलते हैं वो दीवाली आदि के शुभकामना MSG भेजते हैं.. मैं उसका भी रिप्लाई नहीं करता और जब उसके ईद बकरीद कुछ भी आते हैं तो मैं शुभकामना नहीं देता... . यहाँ तक कि कल उधर से बकरीद के अवसर पर एक का फ़ोन आ गया तो ज्यादातर हिंदू क्या करेंगे। ?
पहले उसको "बकरीद मुबारक " बोलेंगे......है ना?
पर 5 मिनट की बातचीत ख़त्म होने तक मैंने ये नहीं बोला.. जो काम की बात थी वो किया और फ़ोन रख दिया..
भाई क्यों करें ?
मुझे पता है कि मैं तबतक तुम्हारे लिए काफ़िर रहूँगा जब तक तुमलोग इस धरती पर हो... याने मैं दुश्मन रहूँगा तो ये "दोस्त" वाली बात तो आती ही नहीं ना ?
तुम भी काफिरों के साथ रहने के लिए और बिजनेस के लिए दोस्ती का नाटक कर रहे हो तो मैं भी वही करूँगा...
बाक़ी सूर्या की मौत का बदला हमारे योगी जी तो नाप तौल कर ले ही लेंगे... ऐसा पूर्ण विश्वास है.