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शिग्रफ तूफानी वटी (अक्षीरी मूंग वटी)साधु–संत परंपरा का दीक्षा में दिया जाने वाला योग | प्राणाग्नि जागृत करने वाला रसायन।...
02/01/2026

शिग्रफ तूफानी वटी (अक्षीरी मूंग वटी)
साधु–संत परंपरा का दीक्षा में दिया जाने वाला योग | प्राणाग्नि जागृत करने वाला रसायन।जब पुरुष का मन टूटता है,तो उसका तेज भी बिखर जाता है। लिंग में ढीलापन केवल मांस का दोष नहीं होता। यह मन, प्राण और ओज तीनों के टूटे हुए संतुलन की चीख होती है।
आज असंख्य पुरुष इस पीड़ा से गुजर रहे हैं।
तनाव आता है, पर टिकता नहीं संभोग के बीच में ही ढीलापन आ जाता है। मन में भय, शर्म और असहायता घर कर जाती है। चेहरे की लालिमा, आँखों की चमक बुझ जाती है।चिड़चिड़ापन, थकान और निढालपन जीवन का हिस्सा बन जाता है और सबसे गहरी चोट
जीवनसाथी के सामने आत्मविश्वास का टूट जाना।
यही वह अवस्था है जहाँ शरीर से ज़्यादा पुरुष का मन और ओज घायल होता है और भीतर से वह व्यक्ति खोखला हो जाता है। इसी टूटन के लिए राजवैद्यों और सन्यासियों ने एक योग बनाया था जो मन को थामे,
प्राण को उठाए और शरीर में फिर से तेज का संचार करे।
उसी दिव्य योग का नाम है। शिग्रफ तूफानी वटी
जिसे रसायन परंपरा में दीक्षा योग और ओज–दीपक वटी” कहा गया है। इसे साधारण समझने की भूल न करें
यह वह योग है जिसे प्राचीन रसायनाचार्यों ने गुप्त साधना से सिद्ध किया था।
इस योग को बनाने की विधि,,,
सबसे पहले शिग्रफ को 120 नींबू रस की भावना में निरंतर खरल किया जाता है।जिससे उसमें प्राणाग्नि का संचार होता है। इसके बाद क्रमश अदरक रस, लहसुन रस, सफेद प्याज़ रस,अश्वगंधा क्वाथ, कौच बीज, अकरकरा,जायफल, जावित्री, लौंग, दालचीनी, उत्तगन बीज आदि के 21 से अधिक संस्कार दिए जाते हैं। अंत में
स्वर्ण वर्क, चाँदी वर्क और मोती पिष्टी मिलाकर
पान-पत्र रस की सात भावना देकर गोलियाँ बनाई जाती हैं। फिर इन वटियों को काँच की शीशी में बंद कर
40 दिनों तक ठंडी मिट्टी में भूमिसंस्कार दिया जाता है।
यही भूमिसंस्कार इस योग को स्थिरता, गहराई और असाधारण ऊर्जा प्रदान करता है।
सेवन विधि
दिन में मात्र 1 वटी गुनगुने दूध के साथ। प्रभाव केवल शरीर पर नहीं, पूरे व्यक्तित्व पर होता है।
यह योग केवल मर्दानगी नहीं बढ़ाता यह पुरुष को भीतर से फिर से खड़ा करता है। ओज की वृद्धि, वीर्य और तेज की जागृति, आत्मविश्वास का लौटना, मन का बल, चेहरे की लालिमा और आँखों की चमक, जीवन के प्रति फिर से उत्साह जो इसे लेते हैं, वे यही कहते हैं यह दवा नहीं…
यह तो पुनर्जन्म जैसा अनुभव है।”

 #शिवलिंगी # # गर्भधारण की एक प्रमुख औषधि है। इसके अलावा यह बुखार चर्म रोग ल्यूकोरिया,धातु रोग तथा पुरुष यौन शक्ति बढ़ान...
08/07/2025

#शिवलिंगी #
# गर्भधारण की एक प्रमुख औषधि है। इसके अलावा यह बुखार चर्म रोग ल्यूकोरिया,धातु रोग तथा पुरुष यौन शक्ति बढ़ाने में उपयोगी है। यह शरीर के धातुओं को पुष्ट करती है। यह सभी कुष्ठ रोग को ठीक करने वाली होती है। शिवलिंगी हल्की वीरेचक यानी मल निकालने वाली और शरीर को ताकत देने वाली होती है।
शिवलिंगी के बीज लिवर,सांस की बीमारी, पाचन तंत्र आदि के लिए भी लाभदायक होते हैं। यह शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।
शिवलिंगी बीज के औषधीय गुण: -
▪️गर्भधारण विकार में शिवलिंगी का बीज उपयोगी होता है:
प्रजनन का सीधा संबंध अंडाणुओं और शुक्राणुओं की संख्या और स्वस्थ से है । शिवलिंगी के बीज ओवेरियन रिजर्व जैसी समस्याओं को दूर करते हैं और मासिक धर्म को नियमित करते हैं। इसके बीज चूर्ण का प्रयोग गर्भधारण हेतु किया जाता है।
▪️कई महात्मा लोग स्त्री या पुरुष को संतान प्राप्ति हेतु मासिक धर्म के चार दिन बाद एक माह तक सुबह शाम शिवलिंगी बीज एक एक ग्राम की मात्रा में खाली पेट दूध के साथ सेवन कराते हैं।
▪️जिनको पुत्र प्राप्ति की कामना होती है उन्हें बछड़े वाले गाय के दूध के साथ सेवन करना उपयुक्त होता है,और जिन्हें पुत्री प्राप्ति की कामना होती है उन्हें बछड़ी वाली गाय के दूध के साथ सेवन करना उत्तम रहता है।
▪️जिन महिलाओं को गर्भ नहीं ठहरता हो अर्थात बार-बार गर्भ गिर जाता हो उन लोगों को मासिक धर्म के बाद पहले दिन से एक शिवलिंगी बीज का शुरुआत करते हुए प्रत्येक दिन एक बी बढ़ते जाएं और इस तरह 21 दिन करने से बांझ औरत मां बन जाती है और अगर बार-बार गर्भपात होता हो तो वह भी ठीक होकर गर्भ ठहर जाता है।
▪️शिवलिंगी बीज आधा ग्राम और पुत्र जीवक एक ग्राम की मात्रा में लेकर के पाउडर बनाकर इसी के बराबर धागे वाली मिश्री मिक्स करके सुबह और शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से संतान की प्राप्ति होती है और बांझपन दूर हो जाता है।
▪️बुखार में फायदेमंद:-
डिलीवरी के बाद जिन महिलाओं को बुखार आ जाता हो उसमें यह बहुत ही कारगर होता है शिवलिंगी के पंचांग के चूर्ण का 2 से 4 ग्राम की मात्रा में काढ़ा बनाकर सुबह शाम सेवन करने से बुखार उतर जाता है।
शिवलिंगी के बीजों का काढ़ा बनाकर सुबह शाम सेवन करने से गर्भाशय में आई हुई सुजन तथा गर्भाशय का दर्द भी खत्म हो जाता है।
▪️ल्यूकोरिया में फायदेमंद: -
शिवलिंगी बीज 50 ग्राम
रसवंती 50 ग्राम
मोचरस 50 ग्राम
नागकेसर 50 ग्राम
धागे वाली मिश्री 100 ग्राम
सबको लेकर के कूट पीसकर पाउडर बना कर रख ले। सुबह शाम 5/5 ग्राम के करीब खाना खाने के पश्चात सेवन करने से ल्यूकोरिया अर्थात सफेद पानी का आना बंद हो जाता है।

▪️कुष्ठ रोग में फायदेमंद: -
शिवलिंगी बीज के रस में लाल चंदन घिसकर प्रभावित स्थान पर लेप करने से कुष्ठ रोग नष्ट होने लगता है।

▪️ शिवलिंगी बीज शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाता है: ......
जिन पुरुषों को वीर्य में शुक्राणु की कमी हो जाती है वह लोग संतान सुख से वंचित रह जाते हैं। उन लोगों के लिए शिवलिंगी का बीज बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए लेना होगा
शिवलिंगी बीज 300 ग्राम
शतावरी 200 ग्राम
सफेद मूसली 200 ग्राम
शुद्ध कौंच बीज 200 ग्राम
अश्वगंधा 200 ग्राम
बिनोली गिरी 200 ग्राम
सभी को कूट पीसकर पाउडर बनाकर रख लें 5/5 ग्राम सुबह शाम दूध में मिश्री मिलाकर सेवन करने से शुक्राणुओं के संख्या में वृद्धि होने लगती है और यौन रोग से संबंधित सारी समस्याएं दूर हो जाती है।
नोट:- .......
अगर आप किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो इसका उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदाचार्य से परामर्श लें।

शीघ्रपतन.. आसान इलाज..  #शीघ्रपतन  #टाइमिंग_का_इलाजआज का टापिक शीघ्रपतन और उसका आसान इलाज है। जो हमदर्द और रैक्स कंपनी क...
05/04/2025

शीघ्रपतन.. आसान इलाज..

#शीघ्रपतन #टाइमिंग_का_इलाज

आज का टापिक शीघ्रपतन और उसका आसान इलाज है। जो हमदर्द और रैक्स कंपनी की बनी हुई दवायें है जो किसी भी आयुर्वेदिक स्टोर पर आसानी से उपलब्ध हो जाती है। कोई भी समझदार आदमी जो आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा का ज्ञान रखता हो वह दवाओं के नाम पढ़कर ही समझ सकता है कि आज किस राज से पर्दा उठा दिया।
पहले थोड़ी बात शीघ्रपतन और कारणों पर करेंगे और फिर दवा का परिचय और इस्तेमाल का तरीका। इस वीडियो के लास्ट में यह भी बता देगें कि कौन लोग इसे इस्तेमाल करें कौन नहीं।
यह फार्मूला मैं उन रोगियों के लिए लिख रहा हूँ शीघ्रपतन जैसी मंहूस बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसे लोग जो इंटर कोर्स से पहले ही डिस्चार्ज हो जाते हैं दो चार झटके या दस बीस सेकंड में डिस्चार्ज हो जाते हैं। शादी शुदा जीवन में अगर ऐसा हो रहा है तो एक साथ कई बिगाड़ पति-पत्नी के बीच पैदा हो सकते हैं आपसी लड़ाई झगड़े एक दूसरे के प्रति चिड़चिड़ापन और ना इत्तेफाकी दिन ब दिन बढ़ती चली जाती है और उसका कारण होता है शीघ्रपतन के चलते संभोग के समय असंतुष्ट रह जाना। एक पुरुष के तौर पर यह समय इंसान के लिए बड़ा डरावना और बड़ा भयानक होता है।

साथियों शीघ्रपतन के कई कारण हैं
जिनमे दिल दिमाग लीवर गुर्दे पेट की कमजोरी के चलते शीघ्रपतन की समस्या हो सकती है। ज्यादा संभोग। धात स्वप्नदोष या हाथ का बहुत ज्यादा इस्तेमाल भी शीघ्रपतन का कारण बनता है। लीवर की गर्मी और उससे होने वाला पतला वीर्य भी शीघ्रपतन का कारण बनता है। हाथ की रगड़ या किसी भी कारण लिंग के अंदरूनी भाग में सूजन वरम आने के कारण भी शीघ्रपतन की समस्या हो सकती है।
आज का जो फार्मूला है वह पांच प्रकार की दवाओं पर आधारित है। जो किसी भी आयुर्वेदिक व युनानी स्टोर पर बड़ी आसानी से उपलब्ध होने वाली दवाएं हैं। कहीं जंगलों पहाड़ो पर धक्के खाने और भटकने की जरूरत नहीं है।
1.शबाब ए आजम -- 2. लबूब कबीर -- 3. माजून आरद खुरमा -- 4. माजून सालब -- 5. कुशता कलई -- सभी दवाएं एक एक डिब्बी लेकर किसी बर्तन में आपस में मिक्स करलें। दवा तैयार है।
अब इस दवा को शीशे के जार में सुरक्षित रख लें।
इस्तेमाल कैसे करना है। रात को सोते समय 10 ग्राम दवा 300 ग्राम दूध के साथ लें। एक बात का ध्यान रहे कि रात के खाने और दवा में कम से कम दो घंटे फासला होना चाहिए।

परहेज.. खट्टी चीजों का परहेज़ करना है। 15 दिन के लिए संभोग से भी रुके रहें तो बहुत अच्छा है।

कौन लोग इस्तेमाल न करें... जिनका पाचनतंत्र कमजोर है या बिगड़ा हुआ है और इस कारण लीवर में गर्मी ज्यादा बढ़ रही है। वीर्य पतला है या सेक्स के विचार से या किसी से फोन पर बात करने से लिंग में तनाव आने पर बहुत ज्यादा चिपचिपा पदार्थ आता है ऐसे रोगी पहले अपनी इन समस्याओं का इलाज करें फिर कोई भी रुकावट टाइमिंग वाली दवा इस्तेमाल करें तो 100% प्रतिशत फायदा मिलेगा। इस वीर्य गाढ़ा करने के लिए और लीवर की गर्मी से संबंधित कुछ आर्टिकल हमारे फ़ेसबुक ग्रूप और टेलीग्राम ग्रूप पर पड़े हुए हैं।
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गुप्त रोगों से संबंधित. धात. स्वप्नदोष. शीघ्रपतन.वीर्य की गर्मी के कारण वीर्य पतला. वीर्य में शुक्राणु की कमी. व पस सेल. पेशाब की जलन. लिकोरया. लीवर की गर्मी. बच्चेदानी की रसौली आदि. उपचार संबंधित निशुल्क परामर्श.

Dr. Santram Dass

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