23/10/2025
मनोहर लाल खट्टर का यह बयान कि “संविधान अंबेडकर ने अकेले नहीं लिखा था” न केवल ऐतिहासिक तथ्यों का अपमान है, बल्कि यह बयान डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महान संविधान निर्माता की असाधारण भूमिका को कमतर दिखाने की एक सोची-समझी राजनीतिक कोशिश प्रतीत होती है। भाजपा नेताओं द्वारा बार-बार इस तरह की टिप्पणी करना यह दर्शाता है कि वे दलित समाज के गौरव, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की मंशा रखते हैं। डॉ. अंबेडकर ने जिस संविधान में हर वर्ग, हर धर्म, हर जाति हर महिला को समान अधिकार और सम्मान दिया, उस पर प्रश्न उठाना देश की लोकतांत्रिक आत्मा को ठेस पहुँचाने के समान है। केंद्रीय मंत्री खट्टर का यह बयान न केवल दलित और पिछड़े समाज के लिए अपमानजनक है, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द को भी गहरा आघात पहुँचाता है। आज जब देश में सामाजिक न्याय और समानता की भावना को सशक्त करने की जरूरत है, तब ऐसे भड़काऊ और विभाजनकारी बयान भाजपा की असली मानसिकता उजागर करते हैं — जो समाज को बांटने और डॉ. अंबेडकर की विचारधारा को कमजोर करने की दिशा में बढ़ रही है। तब ऐसे भड़काऊ और विभाजनकारी बयान संविधान को ध्वस्त करने की दिशा में एक और प्रयास हैं — जिसे देश की जागरूक जनता कभी सहन नहीं करेगी और डॉ. अंबेडकर के विचारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज़ उठाएगी।