09/02/2017
मित्रों आज अपने जन्मदिन के शुभ अवसर पर आप सभी के सामने एक कविता प्रस्तुत करने जा रहा हूं ।
कविता का शीर्षक :- मित्रों आज मैं अपना जन्मदिन मना रहा हूं
मित्रों आज मैं 20 साल का होने जा रहा हूं
अपनी यादों को समेट कर अपना जन्मदिन मना रहा हूं
यह दुनिया बड़ी अजीब है अमीर भी जहां दिल से गरीब है
इस धोखेबाजी के बाजार में शरीफ आदमी कहां नसीब है
मेरे अपनों को अपने दिल का दर्द बता रहा हूं
मित्रों आज मैं अपना जन्मदिन मना रहा हूं
बचपन से लेकर आज तक मैंने हर मोड़ नया देखा है
यह नेता बहुत है जालिम होते करीब से मैंने देखा है
मेरे प्यारे मित्रों तुमको भविष्य के लिए राह दिखा रहा हूं
मत फँसना राजनीति के चक्कर में यह बताना चाह रहा हूं
मित्रों आज मैं अपना जन्मदिन मना रहा हूं
खेला कूदा भक्ति करी और समाज हित कार्य कराया है
कमी मानो या खूबी मेरी मुझमें समय समय पर बदलाव बहुत आया है
बचपन से लेकर आज तक इस दिल को समझा रहा हूं
मित्रों आज मैं अपना जन्मदिन मना रहा हूं
वह दुनिया वाले पागल हैं जो आशिक को समझाते हैं
जो आग ना बुझे समुंदर से वो फूंक मार बुझाते हैं
एक ने प्यार दिया बेहद,दूजी के बेवफाई को नही भूला पा रहा हूँ
मेरे मित्रों आज मैं अपना जन्मदिन मना रहा हूं
इन शब्दों को सब ध्यान से पढ़ना
यह केवल शब्द नहीं अनुभव मेरा अपार है
संघ का में स्वयंसेवक भारत माता से प्यार है
हिंदुत्व का खून रगों में मेरी इसलिए भगवा लहरा रहा हूं
मित्रों आज मैं अपना जन्मदिन मना रहा हूं
#पँडित_शिवम_सतवाई