18/07/2026
लोकतंत्र में आवाज़ को दबाना नहीं, सुनना चाहिए।
आज सुबह की खबर बेहद चिंताजनक है। 21 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा जबरन वहां से हटाकर अस्पताल ले जाया गया। यह लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
असहमति लोकतंत्र की ताकत होती है, कमजोरी नहीं। किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन का समाधान संवाद से होना चाहिए, बल प्रयोग से नहीं।
आइए, हम सभी लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों और शांतिपूर्ण संवाद का समर्थन करें।