22/12/2024
भारतीय संस्कृति में स्त्री व पुरूष दोंनों को एक गाड़ी के दो पहियों की तरह माना गया था। दोंनों पहिए साथ-साथ और बराबर चलेंगें तभी जीवन रूपी गाड़ी भली प्रकार अग्रसर हो सकती है। इसी दृष्टि से स्त्री को पुरूष की अर्धांगिनी कहा गया था। शतपथ ब्राह्मण में लिखा है कि पत्नी पुरूष की आत्मा का आधा भाग है।