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ॐ तत्सदिति श्रीमदभगवदगीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रेश्रीकृष्णार्जुनसंवादे अर्जुनविषादयोगो नाम प्रथमोऽध्यायः |...
08/11/2025

ॐ तत्सदिति श्रीमदभगवदगीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे
श्रीकृष्णार्जुनसंवादे अर्जुनविषादयोगो नाम प्रथमोऽध्यायः | |1 | |
इस प्रकार उपनिषद, ब्रह्मविद्या तथा योगशास्त्ररूप श्रीमदभगवदगीता के
श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद में 'अर्जुनविषादयोग' नामक प्रथम अध्याय संपूर्ण हुआ |

संजय उवाचएवमुक्तवार्जुनः संख्ये रथोपस्थ उपाविशत्।विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः।।47।।संजय बोलेः रणभूमि में शोक से उद्...
08/11/2025

संजय उवाच
एवमुक्तवार्जुनः संख्ये रथोपस्थ उपाविशत्।
विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः।।47।।

संजय बोलेः रणभूमि में शोक से उद्विग्न मन वाले अर्जुन इस प्रकार कहकर, बाणसहित धनुष को त्यागकर रथ के पिछले भाग में बैठ गये |(47 |

यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः।धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत्।।46।।यदि मुझ शस्त्ररहित और सामना न करन...
08/11/2025

यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः।
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत्।।46।।

यदि मुझ शस्त्ररहित और सामना न करने वाले को शस्त्र हाथ में लिए हुए धृतराष्ट्र के पुत्र रण में मार डालें तो वह मारना भी मेरे लिए अधिक कल्याणकारक होगा | (46)

अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम्।यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः।।45।।हा ! शोक ! हम लोग बुद्धिमान होकर भी महान...
08/11/2025

अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम्।
यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः।।45।।

हा ! शोक ! हम लोग बुद्धिमान होकर भी महान पाप करने को तैयार हो गये हैं, जो राज्य और सुख के लोभ से स्वजनों को मारने के लिए उद्यत हो गये हैं | (45)

उत्सन्कुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन।नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम।।44।।हे जनार्दन ! जिनका कुलधर्म नष्ट हो गया है, ऐस...
08/11/2025

उत्सन्कुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन।
नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम।।44।।

हे जनार्दन ! जिनका कुलधर्म नष्ट हो गया है, ऐसे मनुष्यों का अनिश्चित काल तक नरक में वास होता है, ऐसा हम सुनते आये हैं |

दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसंकरकारकैः।उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः।।43।।इन वर्णसंकरकारक दोषों से कुलघातियो...
08/11/2025

दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसंकरकारकैः।
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः।।43।।

इन वर्णसंकरकारक दोषों से कुलघातियों के सनातन कुल धर्म और जाति धर्म नष्ट हो जाते हैं | (43)

संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च।पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः।।42।।वर्णसंकर कुलघातियों को और कुल को नरक मे...
08/11/2025

संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च।
पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः।।42।।

वर्णसंकर कुलघातियों को और कुल को नरक में ले जाने के लिए ही होता है | लुप्त हुई पिण्ड और जल की क्रियावाले अर्थात् श्राद्ध और तर्पण से वंचित इनके पितर लोग भी अधोगति को प्राप्त होते हैं |(42)

अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः।स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसंकरः।।41।।हे कृष्ण ! पाप के अधिक बढ़ ...
08/11/2025

अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः।
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसंकरः।।41।।

हे कृष्ण ! पाप के अधिक बढ़ जाने से कुल की स्त्रियाँ अत्यन्त दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय ! स्त्रियों के दूषित हो जाने पर वर्णसंकर उत्पन्न होता है |(41)

कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः।धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत।।40।।कुल के नाश से सनातन कुलधर्म नष्ट हो...
08/11/2025

कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः।
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत।।40।।

कुल के नाश से सनातन कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं, धर्म के नाश हो जाने पर सम्पूर्ण कुल में पाप भी बहुत फैल जाता है |(40)

यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः।कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम्।।38।।कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम्...
08/11/2025

यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः।
कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम्।।38।।
कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम्।
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन।।39।।

यद्यपि लोभ से भ्रष्टचित्त हुए ये लोग कुल के नाश से उत्पन्न दोष को और मित्रों से विरोध करने में पाप को नहीं देखते, तो भी हे जनार्दन ! कुल के नाश से उत्पन्न दोष को जाननेवाले हम लोगों को इस पाप से हटने के लिए क्यों नहीं विचार करना चाहिए?

तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान् स्वबान्धवान्।स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव।।37।।अतएव हे माधव ! अपने ही ...
08/11/2025

तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान् स्वबान्धवान्।
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव।।37।।

अतएव हे माधव ! अपने ही बान्धव धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारने के लिए हम योग्य नहीं हैं, क्योंकि अपने ही कुटुम्ब को मारकर हम कैसे सुखी होंगे? (37)

निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन।पापमेवाश्रयेदस्मान् हत्वैतानाततायिनः।।36।।हे जनार्दन ! धृतराष्ट्र के प...
08/11/2025

निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन।
पापमेवाश्रयेदस्मान् हत्वैतानाततायिनः।।36।।

हे जनार्दन ! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता होगी? इन आततायियों को मारकर तो हमें पाप ही लगेगा | (36)

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