10/10/2026
हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड में भर्तियों की अनदेखी और युवाओं का निराशाजनक दौर: एक विशेष रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में जब भी विधानसभा सत्र या कैबिनेट की बैठकें होती हैं, तो राज्य के बेरोजगार युवाओं और खासकर तकनीकी रूप से प्रशिक्षित (ITI/Diploma) उम्मीदवारों की नजरें इस बात पर टिकी होती हैं कि राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEBL) में खाली पड़े हजारों पदों को भरने के लिए कोई ठोस और बड़ा फैसला लिया जाएगा या नहीं। लेकिन मौजूदा सुक्खू सरकार के इस कार्यकाल में बिजली बोर्ड के मोर्चे पर हमेशा से निराशा ही हाथ लगी है। अन्य विभागों की तुलना में बिजली बोर्ड की लगातार हो रही अनदेखी आज एक बड़ा सवाल बन चुकी है।
सरकार के इस कार्यकाल में बिजली बोर्ड में भर्तियों का सच (दिसंबर 2022 से अब तक)
जब से कांग्रेस सरकार सत्ता में आई है, तब से बिजली बोर्ड में नियमित और स्थाई भर्तियों के नाम पर केवल वादों और कागजी घोषणाओं के अलावा कुछ नहीं मिला है। इन 4 वर्षों का पूरा विवरण इस प्रकार है:
नियमित सीधी भर्तियों का सूखा: टी-मेट, लाइनमैन, और जूनियर इंजीनियर (JE) जैसे अहम तकनीकी पदों के लिए सरकार ने समय-समय पर हजारों पद खाली होने की बात तो कही, लेकिन धरातल पर कोई बड़ा और नियमित भर्ती विज्ञापन जारी नहीं किया गया।
आउटसोर्स और मानदेय के नाम पर छलावा: स्थाई और नियमित रोजगार देने के बजाय सरकार ने 'बिजली मित्र' जैसी योजनाओं के तहत आउटसोर्स या कम मानदेय (₹10,000 प्रतिमाह) पर युवाओं को रखने का रास्ता चुना, जिससे युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं हो पा रहा है।
विधानसभा सत्रों और कैबिनेट बैठकों में बिजली बोर्ड की अनदेखी क्यों गंभीर मुद्दा है?
हालिया विधानसभा सत्रों और कैबिनेट बैठकों में अन्य विभागों में तो कुछ पदों को हरी झंडी दिखाई गई, लेकिन बिजली बोर्ड (HPSEBL) की स्थायी भर्तियों के प्रस्तावों को हर बार नजरअंदाज कर दिया गया। इसके मुख्य कारण और परिणाम निम्नलिखित हैं:
वित्तीय संकट का बहाना: सरकार का पूरा ध्यान बिजली बोर्ड के वित्तीय घाटे और पुरानी पेंशन (OPS) के बोझ का हवाला देकर नई नियमित भर्तियों से पीछे हटने पर है। बोर्ड को आर्थिक संकट से उबारने के बजाय इसका सीधा असर बेरोजगार युवाओं की नौकरियों पर पड़ रहा है।
कर्मचारियों पर भारी कार्यभार और सुरक्षा खतरे: बोर्ड में पिछले कई सालों से नई भर्तियां न होने के कारण 10,000 से अधिक पद खाली पड़े हैं। जो कर्मचारी पहले से सेवा में हैं, उन पर काम का दबाव अत्यधिक है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में आंधी-तूफान और बर्फबारी के बीच लाइन ठीक करने के दौरान स्टाफ की कमी के चलते अक्सर बड़े हादसे और जानमाल का जोखिम बना रहता है।
ITI और डिप्लोमा धारकों की उपेक्षा: राज्य के हजारों युवा जो आईटीआई (इलेक्ट्रीशियन/वायरमैन) या इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर बैठे हैं, वे ओवरएज हो रहे हैं। सरकार विधानसभा में बड़े-बड़े दावे तो करती है, पर बिजली बोर्ड के कैडर को मजबूत करने के लिए कोई रोडमैप पेश नहीं किया जा रहा है।
बिजली बोर्ड राज्य की रीढ़ है, जो पूरे प्रदेश को रोशन करता है, लेकिन विडंबना यह है कि इसी बोर्ड के भविष्य को अंधकार में धकेला जा रहा है और बार-बार विधानसभा में इसकी अनदेखी करके हिमाचली युवाओं के साथ कुठाराघात किया जा रहा है