07/12/2019
कृपया पूरा पढ़े। देश की सबसे बड़ी समस्या और उसका हल
भारत में गरीबी और बेरोजगारी 2 भयावह समस्याएं है, गरीबी का मुख्य कारण बेरोजगारी भी है। इन दो समस्याओ के हल के लिए मेरे कुछ सुझाव है, हालांकि मैं कोई राजनेता या अर्थशास्त्री नहीं हूँ। फिर भी यदि आप को मेरी बात सही लगे तो शेयर जरूर करे।
भारत की जनसंख्या लगभग 132 करोड़ है यहां करीब 33 करोड़ परिवार रहते है। लगभग 30% लोग गरीब है यानि भारत में लगभग 10 करोड़ परिवार गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करते है। उद्योग और रोजगार एक दूसरे से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुवे है। गरीबी और बेरोजगारी के कारण पूंजी का विकास भी नहीं होता। गरीबी और बेरोजगारी की वजह से देश में औद्योगिक विकास भी नहीं होता। और उद्योगों की कमी बेरोजगारी की बड़ी वजह है। यदि रोजगार होगा तो वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ेगी, और मांग बढ़ेगी तो इनका उत्पादन अधिक करना पड़ेगा, जिसके लिए अधिक मजदूरों की आवश्यकता होगी, विपणन और वितरण में भी और लोगो की आवशयकता होगी, इस प्रकार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके विपरीत एक कुचक्र में अर्थव्यवस्था फंस जाती है, क्योकि अगर रोजगार नहीं होगा तो उत्पादों के लिए मांग कम होगी, जब मांग कम होगी तो उत्पादन भी कम होगा, जिसके लिए कम मजदूरों की आवश्यकता होगी, विपणन और वितरण के लिए लोगो की कम जरुरत होगी, और बेरोजगारी और बढ़ेगी।
भारत सरकार गरीबी और बेरोजगारी को दूर करने के लिए विभिन्न योजनाए चलाती है, उसके बावजूद गरीबी दूर नहीं हुई। अगर भारत सरकार इन परिवारों को 3 लाख रुपये प्रति परिवार दे, तो सरकारी ख़ज़ाने से लगभग 30 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे और ये भारत सरकार के कुल बजट का 100% है। हम ये नहीं कहते की सरकार को गरीबी हटाने के लिए ऐसा करना चाहिए, क्योकि अगर ऐसा हुआ भी तो भी गरीबी दूर नहीं होगी, क्योकि अत्यधिक मुद्रा प्रसार के कारण भारतीय मुद्रा काफी कमज़ोर हो जाएगी।
लेकिन मेरा सरकार को एक सुझाव जरूर है, यदि सरकार इन परिवारों में से हर वर्ष 2 करोड़ लोगो को स्थायी रोजगार दे दे, जिसका वेतन कम से कम 10 हजार हो, या स्वरोजगार के अवसर प्रदान करे, तो स्थिति काफी सुधर सकती है, महज 6-7 वर्षो में ही गरीबी की भयावह समस्या दूर होती नजर आएगी, साथ ही मांग बढ़ने से अर्थव्यवस्था में भी काफी सुधार आएगा, और प्राइवेट सेक्टर में जॉब के अवसर और बढ़ेंगे। इस से देश की दो समस्याएं काफी हद तक समाप्त हो सकती है। इसके लिए सरकार को बजट में प्रतिवर्ष अतिरिक्त 240000 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी जो की कुल बजट का लगभग आठ प्रतिशत है। हालांकि राशि बड़ी जरूर लग सकती है, लेकिन इसके फलस्वरूप अर्थव्यवस्था में तेज़ी आएगी, आर्थिक और औद्योगिक विकास की दर बढ़ेगी, जिसके कारण अप्रत्यक्ष करो में वृद्धि होगी, साथ ही सरकार को इन परिवारों को दी जाने वाली सुविधा यथा पेंसन को बंद कर देना चाहिए, केवल उन्ही परिवारों को पेंसन इत्यादि दे जिन्हे रोजगार नहीं मिल रहा। और सरकार को गरीबी उन्मूलन के लिए चलाये जा रहे अन्य प्रोग्राम को धीरे धीरे बंद कर देना चाहिए।
देश में रोजगार बढ़ेगा, तो गरीबी अपने आप दूर होगी, और रोजगार वृद्धि से उद्योगों में, दुकानों में रौनक लौट आएगी। और भारत विश्व में सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
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