FIROZ PAJI

FIROZ PAJI I am a social worker, I like to do social service

23/03/2026
03/07/2025

गुटखा चबाना आपकी पसंद है, लेकिन इसे सार्वजनिक जगहों पर थूकना पूरी तरह से बेशर्मी है।
सार्वजनिक स्थानों को अपना निजी कूड़ेदान न बनाएं।
🙏🙏

किसने कहा हमारे मकराना में विकास नहीं होता वो तो आपको देखना है आपने अपना कीमती वोट किस लिए किया यदि आप काम के नाम पर वोट...
14/06/2025

किसने कहा हमारे मकराना में विकास नहीं होता
वो तो आपको देखना है आपने अपना कीमती वोट किस लिए किया
यदि आप काम के नाम पर वोट किया है तो नेता जी गलत है
ओर यदि अपने कौम के नाम पर वोट किया है तो नेता जी सही है
दोनों विकास आपके सामने हैं

08/05/2023

क्या ये फौजी भाई इन्हीं देशवासियों के लिये हर जगह चाहे सीमा हो, चाहे कोई बाढ़, चाहे तूफान हो, चाहे भूकम्प हो या कोई व्यक्ति कुँए में गिर गया हो... हर जगह येही फौजी भाई हम सबकी रक्षा करते हैं। लेकिन इस समय ये स्वयं किसी परेशानी में हैं तो देशवासियों की असंवेदनशीलता और निर्लज्जता देखिये... सभी तमाशा देखते हुए निकल रहे हैं, कोई भी सहायता के लिये नहीं रुका

रोजा से हैं कई शारीरिक फायदे, जिस्म की अंदरूनी बीमारियों से मिलता है निजातमाह-ए-रमजान में तीस दिन को रोजे इंसान के जिस्म...
25/03/2023

रोजा से हैं कई शारीरिक फायदे, जिस्म की अंदरूनी बीमारियों से मिलता है निजात

माह-ए-रमजान में तीस दिन को रोजे इंसान के जिस्मानी व रूहानी ताकत को मजबूत बनाता है। रोजे हमें भूखे रहने का एहसास भी दिलाता है। साथ ही साथ इंसानियत की तालीम भी देता है। रोजा जिस्म की अंदरूनी बीमारियों का खात्मा करने का बेहतरीन जरिया है। आज की भाग दौड़ की जिंदगी में इंसान को अपने अपने मजहबी तरीके से रोजा या उपवास बेहद जरूरी है। रोजे का एक साइंटिफिक नजरिया है। पहले दो रोजे से ब्लड शुगर लेवल गिरता है यानी ख़ून से चीनी के ख़तरनाक असरात का दर्जा कम हो जाता है।

दिल की धड़कन सुस्त हो जाती है और ख़ून का दबाव कम हो जाता है। नसों जमाशुदा ग्लुकोज़ को आज़ाद कर देती हैं। जिसकी वजह से शरीर की कमज़ोरी का एहसास उजागर होने लगता है। ज़हरीले माद्दों की सफाई के पहले मरहले के नतीज़े में-सरदर्द, सर का चकराना, मुंह की बदबू खत्म हाेती है।

तीसरे से सातवें रोज़े तक जिस्म की चर्बी टूट फूट का शिकार होती है और पहले मरहले में ग्लूकोज में बदल जाती है। कुछ लोगों की त्वचा मुलायम और चिकनी हो जाती है। जिस्म भूख का आदी होना शुरू हो जाता है और इस तरह साल भर मसरूफ रहने वाला हाजमा सिस्टम ठीक रहता है। खून के सफ़ेद जरसूम और इम्युनिटी में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है। हो सकता है रोज़ेदार के फेफड़ों में मामूली तकलीफ़ हो इसलिए कि ज़हरीले माद्दों (पदार्थो) की सफाई का काम शुरू हो चुका है। आंतों और कोलोन की मरम्मत का काम शुरू हो जाता है।

आठवें से पंद्रहवें रोज़े तक रोज़ेदार पहले से ज्यादा चुस्त महसूस करते हैं। दिमागी तौर पर भी चुस्त और हल्का महसूस करते हैं। हो सकता है कोई पुरानी चोट या जख्म महसूस होना शुरू हो जाए। इसलिए कि आपका जिस्म अपने बचाव के लिए पहले से ज़्यादा एक्टिव और मज़बूत हो चुका होता है। जिस्म अपने मुर्दा सेल्स को खाना शुरू कर देता है, जिनको आमतौर से केमोथेरेपी से मारने की कोशिश की जाती है। इसी वजह से सेल्स में पुरानी बीमारियों और दर्द का एहसास बढ़ जाता है। नाडिय़ों और टांगों में तनाव इसी अमल का क़ुदरती नतीजा होता है। जो इम्युनिटी के जारी अमल की निशानी है

सोलहवें से तीसवें रोज़े तक इंसानी जिस्म पूरी तरह भूख और प्यास को बर्दाश्त का आदी हो चुका होता है। आप अपने आप को चुस्त, चाक व चौबंद महसूस करने लगते हैं। इन दिनों आप की ज़बान बिल्कुल साफ़ और सुथरी हो जाती है। सांस में भी ताजगी आ जाती है। जिस्म के सारे ज़हरीले माद्दों (पदार्थों) का ख़ात्मा हो चुका होता है। हाजमे के सिस्टम की मरम्मत हो चुकी होती है। जिस्म से फालतू चर्बी और खराब माद्दे निकल चुके होते हैं। बदन अपनी पूरी ताक़त के साथ अपने फऱाइज़ अदा करना शुरू कर देता है।

बीस रोजों के बाद दिमाग़ और याददाश्त तेज़ हो जाते हैं। तवज्जो और सोच को मरकूज़ करने की सलाहियत बढ़ जाती है। बेशक बदन और रूह तीसरे अशरे की बरकत को भरपूर अंदाज़ से अदा करने के काबिल हो जाते हैं। ये तो दुनिया का फ़ायदा रहा जिसे बेशक हमारे खालिक ने हमारी ही भलाई के लिए हम पर फजर किया। मगर देखिए उसका अंदाज़े कारीमाना कि उसके एहकाम मानने से दुनिया के साथ साथ हमारी आखिऱत भी संवारने का बेहतरीन बंदोबस्त कर दिया। माह-ए-रमजान में पांचों वक्त नियमित नमाजें अदा करने से जिस्मानी व दिमागी (शारीरिक व मानसिक) शक्ति में वृद्धि होती है। नफ्स (इंद्रियों) पर काबू पाने की सलाहियत में मजबूती आ जाती है। रोज़ा बुराइयों को कोसों दूर भगाने में मदद करती है। रोज़े की हर मजहब में अपनी खास अहमियत होती है। इससे जिस्म में पलने वाले परजीवी की खात्मा होती है। उपवास से बर्दाश्त व सहनश क्ति की क्षमता बढ़ती है। परहेजगारी में इजाफा होता है।

27/07/2022

राजस्थान मे खुश आमदीद आपका
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जिस देश के एक गरीब आदमी पांच रूपऐ की हस्पताल की पर्ची के नहीं भर सकता वहां का नवाब दिन में पांच जोङी कपङे बदलता है😢😢😢😢😢😢...
09/05/2022

जिस देश के एक गरीब आदमी पांच रूपऐ की हस्पताल की पर्ची के नहीं भर सकता वहां का नवाब दिन में पांच जोङी कपङे बदलता है
😢😢😢😢😢😢😢

बिहार का वो चर्चित नेता जिन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र सिवान में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में एक लकीर खींच कर बेस...
01/05/2022

बिहार का वो चर्चित नेता जिन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र सिवान में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में एक लकीर खींच कर बेस्ट सांसद का अवार्ड अपने नाम दर्ज करने काम किया था ! जो अपने संसदीय क्षेत्र ही बल्कि पूरे बिहार के गरीबों शोषितों पीड़ितों मजलूमों की आवाज हुआ करता था जो‌ बगैर किंतु परंतु किए स्पष्ट शब्दों में अपनी बातों को मजबूती के साथ रखने का काम करता था उनका यही अंदाज बिहार के अच्छे अच्छों की नींद हराम कर देता था ! वो उभरता हुआ सितारा इन्हीं सब कारणों से राजनीतिक सडयंत्र का शिकार हो गया और आज ही के दिन दुनिया को अलविदा कह दिया था!

26/04/2022
अल्लाह यासीन साहब को जन्नतुल्ल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमायें
06/04/2022

अल्लाह यासीन साहब को जन्नतुल्ल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमायें

यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्रों में मोहम्मद फैसल का टिकट हो गया मगर उसके दोस्त कमल सिंह का टिकट नहीं हो सका.. दोस्ती से ...
27/02/2022

यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्रों में मोहम्मद फैसल का टिकट हो गया मगर उसके दोस्त कमल सिंह का टिकट नहीं हो सका.. दोस्ती से ज्यादा जिंदगी को अहमियत देने का रिवाज होता तो शायद फैसल भारत वापिस आ चुका होता।

सलाम है दोस्ती के इस जज़्बे को जिसने दोस्त के साथ मौत के मुँह और बारूदों के साये में रुकना कुबूल किया, मगर दोस्त को मुसीबत में छोड़कर घर लौटना गवारा नहीं किया 🌹🌹🌹🌹🌹

Address

Makrana
341505

Telephone

+918890156447

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when FIROZ PAJI posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category