09/06/2025
रिश्तों का ढोंग और क्रूरता की हदें !
सोनम रघुवंशी, मुस्कान, और ऐसी ही कुछ अन्य महिलाएँ—ये नाम आज समाज में एक काले धब्बे की तरह उभरे हैं।
ये वो महिलाएँ हैं, जो बाहर से हँसती-बोलती, अपने पति के साथ सुखी जीवन का नाटक करती हैं, लेकिन अंदर ही अंदर उनके मन में इतनी क्रूरता भरी होती है कि वे उसी जीवनसाथी को मौत के घाट उतार देती हैं,
जिसके साथ उन्होंने सात फेरे लिए, सात जन्मों का वादा किया। ये कहानियाँ केवल अपराध की नहीं, बल्कि विश्वासघात, ढोंग और पवित्र विवाह बंधन के अपमान की हैं।
आखिर क्यों करती हैं ये शादी का ढोंग? क्यों तोड़ती हैं रिश्तों की मर्यादा? और क्यों बदनाम करती हैं सनातनी नारी की उस परंपरा को, जो भूखे-प्यासे रहकर करवाचौथ का व्रत रखती है, अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है?
सोनम रघुवंशी की कहानी रोंगटे खड़े कर देती है। मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रचने वाली सोनम ने अपने प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिलकर सुपारी दी। जिस पति ने उस पर भरोसा किया, जिसके साथ वह हँसती-बोलती थी, उसी को उसने बेरहमी से मार डाला।
क्या यह केवल प्रेम का जुनून था, या शादी जैसे पवित्र बंधन को मजाक समझने की मानसिकता? सोनम ने न केवल एक इंसान की जान ली, बल्कि उस विश्वास को भी कुचल दिया, जो विवाह की नींव है।
ऐसे ही मुस्कान नाम की महिला ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर अपने पति सौरभ की हत्या की और शव को सीमेंट से भरे ड्रम में छिपा दिया।
जिस पति के साथ वह सालों तक रही, जिसके साथ उसने घर बसाया, उसी को उसने इतनी क्रूरता से खत्म कर दिया। ये महिलाएँ बाहर से साधारण, मासूम चेहरों वाली दिखती हैं, लेकिन उनके भीतर की क्रूरता समाज को झकझोर देती है।
विवाह कोई मजाक नहीं है। यह दो आत्माओं का मिलन है, विश्वास और प्रेम का बंधन है। सनातन संस्कृति में तो विवाह को सात जन्मों का रिश्ता माना जाता है।
आज भी लाखों सनातनी महिलाएँ करवाचौथ का व्रत रखती हैं, भूखे-प्यासे रहकर अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। वे अपने गहनों, साड़ियों और सोलह श्रृंगार में नहीं, बल्कि अपनी निष्ठा और समर्पण में सुंदर दिखती हैं।
लेकिन सोनम और मुस्कान जैसी महिलाएँ इस पवित्र परंपरा पर कालिख पोत रही हैं।
ये महिलाएँ क्यों शादी का ढोंग करती हैं?
अगर उनका मन किसी और के साथ था, तो