Sunrise Public School, Naugaon - Mainpuri

Sunrise Public School, Naugaon - Mainpuri Sunrise Public School was established in 2014. It is a rural school situated in the Mainpuri District (U.P.), 8 kilometres east of Kurawali town.

14/08/2024

*गिरता संस्कार*

छठी के छात्र छेदी ने छत्तीस की जगह बत्तीस कहकर जैसे ही बत्तीसी दिखाई, गुरुजी ने छडी उठाई और मारने वाले ही थे की छेदी ने कहा, "खबरदार अगर मुझे मारा तो! मैं गिनती नही जानता मगर उत्पीडन अधिनियम की धाराएँ अच्छी तरह जानता हूँ... गणित मे नही , हिंदी मे समझाना आता है मुझे..."

गुरुजी चौराहों पर खड़ी मूर्तियों की तरह जड़वत हो गए, जो कल तक बोल नही पाता था, वो आज आँखें दिखा रहा है!

शोरगुल सुनकर प्रधानाध्यापक भी उधर आ धमके, कई दिनों से उनका कार्यालय से निकलना ही नही हुआ था, वे हमेशा विवादों से दूर रहना पसंद करते थे इसी कारण से उन्होंने बच्चों को पढ़ाना भी बंद कर दिया था. आते ही उन्होंने छड़ी को तोड़ कर बाहर फेंका और बोले "सरकार का आदेश नही पढ़ा आपने ? प्रताड़ना का केस दर्ज हो सकता है. रिटायरमेंट नजदीक है, निलंबन की मार पड़ गई तो पेंशन के फजीते पड़ जाएँगे. बच्चे न पढ़े न सही पर प्रेम से पढ़ाओ... उनसे निवेदन करो... अगर कही शिकायत कर दी तो ?"

बेचारे गुरुजी पसीने पसीने हो गए मानो हर बूँद से प्रायश्चित टपक रहा हो! इधर छेदी "गुरुजी हाय हाय" नारा लगाने लगा और बाकी बच्चे भी उसके साथ हो लिए.

प्रधानाध्यापक ने छेदी को एक कोने मे ले जाकर कहा, "मुझसे कहो क्या चाहिए?"
छेदी बोला, "जब तक गुरुजी मुझसे माफी नही माँग लेते है, हम विद्यालय का बहिष्कार करेंगे. बताएँ की शिकायत पेटी कहाँ है?"

समस्त स्टाफ आश्चर्यचकित और भय का वातावरण हो चुका था... छात्र जान चुके थे की उत्तीर्ण होना उनका कानूनी अधिकार है।

बड़े सर ने छेदी से कहा की मैं उनकी तरफ से माफी माँगता हूँ, पर छेदी बोला, "आप क्यों मांगोगे? जिसने किया वही माफी माँगे, मेरा अपमान हुआ है, घोर अपमान ।"

आज गुरुजी के सामने बहुत बड़ा संकट था। जिस छेदी के बाप तक को उन्होंने दंड, दृढ़ता और अनुशासन से पढ़ाया था, आज उनकी ये तीनों शक्तिया परास्त हो चुकी थी। वे इतने भयभीत हो चुके थे की एकांत मे छेदी के पैर तक छूने को तैयार थे, लेकिन सार्वजनिक रूप से गुरूता के ग्राफ को गिराना नही चाहते थे। छड़ी के संग उनका मनोबल ही नही, परंपरा और प्रणाली भी टूट चुकी थी। सारी व्यवस्था, नियम, कानून एक्सपायर हो चुके थे। कानून क्या कहता है, अब ये बच्चो से सिखना पड़ेगा!

पाठ्यक्रम में अधिकारों का वर्णन था , कर्तव्यों का पता नही था। अंतिम पड़ाव पर गुरु द्रोण स्वयं चक्रव्यूह मे फँस जाएँगे!

वे प्रण कर चुके थे की कल से बच्चे जैसा कहेंगे, वैसा ही वे करेंगे। तभी बड़े सर उनके पास आकर बोले, "मैं आपको समझ रहा हूँ वह मान गया है और अंदर आ रहा है। उससे माफी माँग लो, समय की यही जरूरत है।"

छेदी अंदर आकर टेबल पर बैठ गया और हवा के तेज झोंके ने शर्मिन्दा होकर द्वार बंद कर दिए।

आगे अब कलम लिखने से पहले ही थम गई...

कई बार मौन की भाषा संवादों पर भारी पड़ जाता है।
*आजकल के गुरू का दर्द... किस तरह पढ़ाये बच्चों को... पढ़ाना मुश्किल हो गया है... और जमाना कहता है... मास्टर पढ़ाते नहीं हैं... फोकट की तनख्वाह लेते हैं...*

23/06/2023

Requirement experienced male and female teachers in sunrise public school, Naugaon.
Contact no. 9058388319, 8368652687

सभी शहर वासियों को REPUBLIC DAY की हार्दिक शुभकामनाएं
26/01/2023

सभी शहर वासियों को REPUBLIC DAY की हार्दिक शुभकामनाएं

23/01/2023
राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले, अद्भुत शौर्य एवं अदम्य साहस के प्रतीक परम प्रतापी योद्धा वी...
19/01/2023

राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले, अद्भुत शौर्य एवं अदम्य साहस के प्रतीक परम प्रतापी योद्धा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की पुण्य तिथि पर कोटि-कोटि नमन।

At sankisa
14/02/2020

At sankisa

01/01/2018
26/06/2017

किसी गाँव में एकधर्मपरायण किसान रहा करता था । उसकी फसल अक्सर खराब हो जाया करती थी । कभी बाढ़ आ जाया करती थी तो कभी सूखे की वजह से उसकी फसल बर्बाद हो जाया करती । कभी गर्मी बेहद होती तो कभी ठण्ड इतनी होती कि वो बेचारा कभी भी अपनी फसल को पूरी तरह प्राप्त नहीं कर पाया ।एक दिन किसान दुखी होकर मंदिर में जा पहुंचा और भगवान की मूर्ती के आगे खड़ा हो कर कहने लगा भगवान बेशक आप परमात्मा है लेकिन फिर भी लगता है आपको खेती बाड़ी की जरा भी जानकारी नहीं है । कृपया करके एक बार बस मेरे अनुसार मौसम को होने दीजिये फिर देखिये मैं कैसे अपने अन्न के भंडार को भरता हूँ । इस पर आकाशवाणी हुई कि ” तथास्तु वत्स जैसे तुम चाहोगे आज के बाद वेसा ही मौसम हो जाया करेगा और ये साल मेने तुमको दिया ।” किसान बड़ा ख़ुशीख़ुशी घर आया ।क्या होता है कि उस बरस भगवान ने कुछ भीअपने अनुसार नहीं किया और किसान जब चाहता धुप खिल जाया करती और जब वो चाहता तो बारिश हो जाती लेकिन किसान ने कभी भी तूफान को और अंधड़ को नहीं आनेदिया । बड़ी अच्छी फसल हुई । पौधे बड़े लहलहा रहे थे । समय के साथ साथ फसल भी बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी ।आखिर फसल काटने का समय आ गया किसान बड़ी ख़ुशी से खेतों की और गया और फसल को काटने के लिए जैसे ही खेत में घुसा बड़ा हेरान हुआ और उसकी ख़ुशी भी काफूर हो गयी क्योंकि उसने देखा कि गेंहू की बालियों में एक भी बीज नहीं था । उसका दिल धक् से रह गया । किसान दुखी होकर परमात्मा से कहने लगा ” हे भगवन ये क्या ?”तब आकाशवाणी हुए कि ” ये तो होना ही था वत्स तुमने जरा भी तूफ़ान आंधी ओलो को नहीं आने दिया जबकि यही वो मुश्किलें है जो किसी बीज को शक्ति देता है और वो तमाम मुश्किलों के बीच भी अपना संघर्षजारी रखते हुए बढ़ता है और अपने जैसे हजारों बीजो को पैदा करता है जबकि तुमने ये मुश्किले ही नहीं आने दी तो कैसे बढ़ता ये बताओ तुम ?” भगवान ने कहा बिना किसी चुनोतियों के बढ़ते हुए ये पौधे अंदर से खोखले रह गये । यही होना था ।यह सुनकर किसान को अपनी गलती का अहसास हुआ । जिन्दगी में जब तक बाधाएं नहीं आती तब तक मनुष्य को खुद की काबिलियत का भी अंदाजा नहीं होता कि वो कितना बेहतर कर सकता है जबकि अगर बाधायों से पार जाने के लिए वो अपनी जी जान लगा दे तो मंजिल कंही अधिक दूर नहीं होती ।

19/02/2016

मासूमियत से भरे बच्चों की
मासूमियत का जवाब नहीं
क्या कहूँ उनके बारे में
मेरे पास शब्द नहीं
पल में रोते पल में हँसते
उनको ये तक ज्ञात नहीं
क्या अच्छा है और क्या बुरा है
मेरे पास शब्द नहीं
बचपन होता कितना प्यारा
जिसमें कोई भेद-भाव नहीं
क्यों पल में खेलें और झगड़ें
मेरे पास शब्द नहीं
तोतली बोली और किलकारी उनकी
उनके समान कोई मासूम नहीं
क्या कहूँ मैं प्रभु की लीला है
मेरे पास शब्द नहीं
मासूमियत से भरे बच्चों की
मासूमियत का जवाब नहीं
क्या कहूँ उनके बारे में
मेरे पास शब्द नहीं

11/10/2015

हरीश एक गाँव का पला बढ़ा इंसान था। मन में
आगे बढ़ने की उमंग थी, कुछ अच्छा करने का
उत्साह था तो घर वालों से जिद करके पढाई
(High Education in College) के लिए शहर चला
गया। हरीश यूँ तो शुरुआत से ही अव्वल दर्जे का
छात्र रहा था, कॉलेज से भी अच्छे नंबरों से
पास हुआ। एक अच्छी कंपनी में नौकरी(Job)
भी मिल गयी थी। करीब 4-5 साल बाद हरीश
गाँव लौटा तो देखा आज भी लोगों में वही
प्यार और स्नेह की भावना थी।
गाँव के लोग हरीश इंजिनियर बाबू(Engineer)
कहकर बुलाते थे, ये सुनकर हरीश कहीं ना कहीं
मन में सम्मान महसूस करता था। कुछ दिन गाँव में
रहा तो हरीश को किसी ने बताया कि गाँव में
कोई साधु बाबा आये हैं वो जब भी नाचते हैं
बारिश होने लगती है। सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ,
हँसी भी आई, हरीश विज्ञानं का छात्र था
और वो जानता था कि ऐसा कोई जादू संभव
ही नहीं है। उसे लगा कि ये बाबा भोले गाँव
वालों को बेवकूफ बना रहा है। यही सोचकर वह
बाबा से मिलने गया।
हरीश ने जाकर बाबा को चेलेंज कर दिया कि
आपके पास कोई जादू नहीं है, अगर आपके नाचने
से बारिश हो सकती है तो मेरे नाचने से भी जरूर
होगी। कुछ गाँव वाले भी देखने के लिए इकट्ठे
हो गए। हरीश ने नाचना शुरू किया, नाचते हुए
बार बार आसमान की ओर देखता लेकिन
बारिश नहीं हुई, हरीश थोड़ी देर में ही थककर
चूर हो गया। अब बाबा की बारी थी। बाबा
ने नाचना शुरू किया, और नाचते ही रहे घंटों बहुत
देर तक, अभी तक बारिश नहीं हुई थी। बाबा
भी लगातार नाचे जा रहा था, काफी देर बाद
आसमान में बादल छाने लगे, बाबा नाचते हुए
थका नहीं बल्कि घंटो नाचता रहा। कुछ देर
बाद बादल जमकर बरसे, घनघोर बारिश हुई।
हरीश शर्म से सर झुकाकर बाबा से इस जादू के
बारे में पूछने लगा। बाबा ने कहा- बेटा ये कोई
जादू नहीं है, नाहीं ये कोई कला है, ये तो बस
एक दृंढ निश्चय है। मैं जब भी नाचता हूँ तो दो
बात का ध्यान रखता हूँ। पहला मैं मन में खुद को
विश्वास दिलाता हूँ कि अगर मैं नाचूँगा तो
बारिश जरूर होगी और दूसरा अगर बारिश नहीं
हुई तो मैं जब तक नाचूँगा, तब तक बारिश ना
हो जाये। बस यही इस बारिश और नाच का
राज है।
हरीश को अपनी सारी डिग्रियाँ आज इस
ज्ञान के आगे कमजोर नजर आ रहीं थी।
विज्ञानं(Science) की किताबें तो बहुत पढ़ी
पर जीवन के इस अनमोल ज्ञान का अनुभव पहले
कभी नहीं किया था।
मित्रों आप भी जब कोई नए काम की शुरुआत
करें तो मन में खुद पे विश्वास रखें कि आप सफल
जरूर होंगे और सफल नहीं हुए तो तब तक प्रयास
करते रहेंगे जब तक सफल हो ना जाएँ। बस यही हर
सफलता का मन्त्र है। कोई काम असंभव नहीं है
आपकी सोच और प्रयास से ही असंभव को संभव
किया जा सकता है।

Address

Mainpuri
205265

Telephone

9058388319

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