27/03/2026
सुखमापतितं सेव्यं दुःखमापतितं यथा ।
चक्रवत् परिवर्तन्ते दुःखानि च सुखानि च ।
हितोपदेश मित्रलाभः ,१७७
आये हुए दुःख और सुख को भोगना चाहिये ,क्योंकि सुख और दुख चक्के की तरह परिवर्तित होते रहते हैं ।