17/05/2023
पेड़ों से मुझे लगाव क्यों?
मैं तो कहती हूंँ पेड़ों के बारे में कुछ जानना है तो पेड़ से नहीं, उस पर घोंसला बनाए बैठे पंछियों से पूछो, पेड़ की उस फुनगी पर झूला -झूलते व मीठे रसीले फल चबाते पंछियों से पूछो, पूछो... उस थके- हारे मुसाफिर से जो उसकी छाया में बैठा सुसता रहा है ,कैसे ? वृक्षों ने उसके बोझिल कदमों को रोककर उसे शीतल छांँव प्रदान की,पूछो उसकी शाखाओं पर झूला बांँधती बालाओं से, जो तीज तथा सावन का आनंद उठाती हैं, पूछो उन नटखट लड़कों से जो उसे मारते हैं पत्थर, पर पाते हैं ...मीठे रसीले फल । लकड़ी बीनती लकड़हारिन से पूछो, पहाड़ तोड़ती पहाड़िन से पूछो, पेड़ों से प्रेम है तो पूछो उसके नीचे बैठ पगुराती गाय, भैंस, बकरियों से, गांँव में 40- 40 कोस तक पालकी ढ़ोकर ले जा रहे कहारों से पूछो, इन पेड़ों से प्रेम करने का कारण। पेड़ से पेड़ के बारे में मत पूछो क्योंकि वह अपनी खूबियों का बखान नहीं करते। आदमी को जहांँ इनकी जरूरत हो वहांँ यह हाज़िर हैं। यह अपना सब कुछ बिना धर्म- जाति भेदभाव के अर्पण करते हैं ।पेड़ों का अपना घर नहीं होता पर वे स्वयं घर होते हैं-अनेक पशु, पक्षी, आदमी, कीट, पतंगों के लिए । यह आंँधी- पानी में डटे रहकर भी मानव मात्र को अडिग रहने की शिक्षा देते हैं। यह चिरैया को घोंसला, पशुओं को चारा, मुसाफ़िरों को छाया, भूखों को फल देते हैं। पेड़ धूल- तूफानों के लिए प्राकृतिक बाधा है। वायुशोधक, धरती पुत्रों, हरा- सोना ,परमार्थी ,परोपकारी, ईश्वर के वरदान, जानवरों के आश्रय दाता के प्रति मेरा लगाव क्यों ना हो ? हाउसबोट, साबुन, शहद, लकड़ी ,झाड़ू, गोंद ,खाद, दवाइयांँ, इत्र ,सजावटी चीजे़ं इनसे ही तो मिलती हैं। यह अमृत तुल्य, दिव्य एवं महान हैं। इनके सुखों के कारण ये देव रूप में पूजे जाते हैं। इनकी अहमियत में - इतना कहना काफी है यह हमारे आजीवन साथी हैं । #सविता खोसला