05/06/2026
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*अनुज राम नरेश मिश्र को गए आज एक बरस हो गया। हम पांच भाइयों में चौथे नम्बर के भाई थे वह। आज मन बहुत भारी रहा। प्रिय राम नरेश! हम बड़े स्नेहसिक्त भाव और दु:खी मन से तुम्हें याद करते हैं। बड़ी पीड़ा है कि तुम्हारी पारिवारिक जिम्मेदारियां तुम्हारे पीछे छूटी रहीं। प्रभु परिवार को शक्ति दें और समुचित समझ भी।*
भाई! जून 2025 में तुम्हारे जाने के बाद तन और मन इतना व्यथित था, जिसे हम शब्द नहीं दे पा रहे थे। मन तब हल्का हो पाया, जब मेरे मानस पटल पर बीती सदी के सन 1973 में पूज्य पिताजी पर आए जानलेवा संकट के समय का, तुम्हारे बचपन का, पहला चित्र उभरा और उसे आधार बनाकर लैपटॉप पर मेरी उंगलियां चलीं और तब से लेकर अब तक की सारी स्मृतियां 15 पृष्ठ में लिख गईं। उन यादों और जीवन यात्रा को हमने अपने माता-पिता से उत्पन्न सभी पुत्र-पुत्रियों और उनके अंशजों को भेजा।
*आज भाई की प्रथम पुण्यतिथि पर हम उन्हें सप्रेम याद कर रहे हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उनकी जीवात्मा को शांति और सद्गति प्रदान करें तथा उनके पुत्र और पुत्री व मेरी अनुजवधू का जीवन पथ कंटकविहीन बने। प्रियवर! तुम्हें स्नेहपूर्ण भावांजलि। स्वजनों-मित्रों से हमारी प्रार्थना, भाई के लिए आप भी अपनी शुभकामना आत्मार्पित करें, राम नरेश जी नीचे के चित्र में सबसे बाएं दिख रहे हैं। द्वितीय नम्बर के भाई, मेरे अग्रज, श्री छोटेलाल मिश्र जी 2024 में हम सबको छोड़कर चले गए थे, वह इस चित्र में दाएं से दूसरे क्रम पर दृष्टिगोचर हो रहे हैं। हम 5 भाई और 2 बहिनें हैं, यह बताने की सदा से आदत रही, अब 3 भाई कहते हुए प्रायः जुबान लड़खड़ा जाती है। प्रार्थना! प्रभु सभी को सुखी और स्वस्थ रखें।*