08/05/2019
क्या गूगल (googal) वाकई में आपकी जासूसी करता है ?
भारत में आज लगभग ४५ करोड़ लोग स्मार्टफोन से तो जुड़ चुके है लेकिन उनमे से बहुत से लोग गूगल को ही इंटरनेट मानते है , चलिए थोड़ा सा जान लेते है की क्या है गूगल ? और क्या गूगल (googal) वाकई में आपकी जासूसी करता है ?
गूगल उस अमेरिकन टेक्नोलॉजी का नाम है जिसका जन्म अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया शहर हुआ था जिसके जन्मदाता थे , पीएचडी के २ स्टूडेंट लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन , इन दोनों ने ही १९९६ में गूगल की नींव रखी ।
लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन एक ऐसा सर्च इंजन बनाना चाहते थे जो दुनिया भर की websites को उनके पेज व्यू के हिसाब से दिखाए ,मतलब जो websites जितनी क्लीन और जिसके जितना ज्यादा पेज व्यू होंगे ,गूगल का अल्गोरिथम उनको सबसे पहले दिखायेगा । सुरुवाती दिनों में गूगल का नाम google stanford edu हुआ करता था , फिर १५ सितम्बर १९९७ को googal com डोमेन रजिस्टर्ड किया गया । उन्ही दिनों पूरी दुनिया में याहू का बोलबाला था , सुरुवाती दिनों में इन्होने अपना ऑफिस अपने दोस्त के गैराज में डाला और फिर १९९९ में कुछ ख़ास सफलता न मिलने के कारण इन्होने गूगल को बेचने का मन बना डाला , लेकिन शायद उस दिन वर्ल्ड इकॉनमी को ये मंजूर नहीं था , इसलिए जिन लोगो के साथ लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन डील करने के लिए गए , वहाँ डील रिजेक्ट हो गयी , और उस दिन गूगल बिकते बिकते रह गयी ।
फिर दोनों दोस्त जो की पढ़ाई बाधित होने की वजह से गूगल को बेचना चाहते थे , उन्होंने ये निर्णय लिया की क्यों ना टेक्नोलॉजी को एक्स्प्लोर किया जाए । और आज गूगल में प्रति सेकंड पूरी दुनिया में ६० हजार - १ लाख ३० हजार बार तक सर्च किया जाता है , क्यूंकि गूगल हमारी जरूरत बन चुकी है , जैसे लोगो में चाय का नशा होता है , वैसे ही नशा गूगल और you - tube का है लोगो में ।
( यह ध्यान देने योग्य एक बात यह है की आज जो हम एंड्राइड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अपने स्मार्टफोन के जरिये कर रहे है वो गूगल की ही देन है , और नोकिआ (nokia ) जोकि एक समय दुनिया पर राज कर रहा था अपनी विंडोज टेक्नोलॉजी के साथ उसके बर्बाद होने के पीछे की वजह यही थी उन्होंने अपनी टेक्नोलॉजी को आज के समय की मांग के अनुसार अपग्रेड नहीं किया ,मतलब वो यही सोचते थे की वो विंडोज टेक्नोलॉजी के साथ ही अपने स्मार्टफोन बेचते रहेंगे , और शयद यही गूगल चाहता था , या अंदर की बात कुछ और रही हो इस बारे में मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूँ, लेकिन इसका पूरा फायदा गूगल को मिला , क्यूंकि सारी एशियाई मार्किट पर एंड्राइड टेक्नोलॉजी के स्मार्टफोन ने अपनी पकड़ बनानी चालू कर दी थी ,और शायद नोकिआ के पतन का यही कारण था।)
गूगल यही नहीं रुका , उसने २००६ में १.६५ बिलियन $ में यू- tube को खरीदा तो कई लोगो ने गूगल की बहुत आलोचना की थी, लेकिन आज you -tube भी लोगो की जरूरत बन चुकी है , अब आप बिलकुल भी ताजुब ना करियेगा की आज you - tube को पूरी दुनिया में हर महीने लगभग ६ अरब घंटो तक देखा जाता है , अब आप खुद अंदाजा लगा सकते है you -tube की एडिक्शन का .
जब ये सब कुछ हो रहा था , उसी समय गूगल ने अपना एडसेन्स जिसे गूगल एडसेन्स या गूगल एडवर्डस भी कहते है , विकसित कर लिया था , जिसकी मदद से एक विज्ञापनदाता गूगल एडवर्डस के जरिये अपने विज्ञापन प्रसारित करती है जिसको हम अलग - अलग websites , ऍप्लिकेशन्स , ब्लोग्स , आर्टिकल्स में देख सकते है , आज अगर हम कुछ भी इंटरनेट पर देखते है तो उसके पीछे एक बहुत बड़ा विज्ञापन का जंगल राज चल रहा है , जिसपर पूरा कब्ज़ा गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों का है ,
आपको याद होगा बचपन में जब हम लोग रात में दूरदर्शन में पिक्चर फिल्म देखते थे तो १०-१० मिनट तक केवल विज्ञापन आते रहते थे , चूँकि चैनल एक ही होता था , और हमारे पास उसको बदलने का ऑप्शन भी नहीं था , इसलिए मजबूरी में हम वो सारे विज्ञापन देखते थे , लेकिन आज सब कुछ बदल चूका है , विज्ञापन हम आज भी देखते है , बस उनको देखने का तरीका बदल गया है , आज हम टीवी , न्यूज़ चैनल्स पर जो विज्ञापन देखते है वो तो देखते ही है , अब तो हैरत की बात यह है की टिक -टॉक पर भी कम्पनिया अपने विज्ञापन चलने लगी है , मुझे परेशानी विज्ञापन से नहीं , बल्कि इन बाहरी कंपनियों से है जो हमारे देश से विज्ञापन लेकर हमारे ही देश के टैलेंट के द्वारा हमको दिखाया जाता है ,बदले में उसका ३२ % गूगल लेकर चली जाती है अमेरिका ।
२०१८ के Q 1 रिपोर्ट के अनुसार गूगल की कमाई ३१ बिलियन $ थी मतलब सालना आय तकरीबन १२० बिलियन $ थी , जिसमे के वो भारत से ही ८००० CRORE सालाना लेकर जाती है ,
अब सवाल ये है की क्या वाकई गूगल हमारी निजता पर प्रहार करती है ?
वैसे तो गूगल की अल्गोरिथम कोई क्रैक नहीं कर सकता है , क्यूंकि इनकी टीम हर ६ महीने में अपनी अलगो बदल देते है , लेकिन इस जटिल चीज को मैं आपको एक उद्हारण देकर समझाता हूँ , मान लीजिये आपको एक ऑनलाइन मोबाइल खरीदना है , और आपके पास १० हजार रूपये है , फिर आप गूगल खोलते है , उसमे सर्च करते है 4G मोबाइल १० हजार की रेंज में , या एंड्राइड मोबाइल १० हजार की रेंज में , फिर आपके अलग अलग कम्पनियों के रिजल्ट आ जाते है , फिर आप उनको देखते है , मन हुआ तो तुरंत खरीद लेते है , अगर मन नहीं हुआ तो TAB काट कर बाहरआ जाते है , फिर उसके बाद सुरु होता है गूगल का खेल , क्यूंकि अब गूगल जान गया है की हमे क्या पसंद है , हमने क्या चीज सर्च किया , फिर हम नेट पर कुछ भी सर्च करे गूगल उसी फ़ोन के विज्ञापन या उससे सम्बंधित फ़ोन के विज्ञापन हमे दिखाना चालू करती है , और ये विज्ञापन हमे तब तक दिखाया जाता है जब तक हम उसको खरीद नहीं लेते है । अगर आपको मेरी बात पर विश्वास न हो तो कुछ सर्च करियेगा फिर आधे घंटे बाद जब आप गूगल पर कोई भी वेबसाइट खोलेंगे तो वही विज्ञापन आपको आने स्टार्ट हो जाएंगे । हममे से अधिकाँश लोगो को लगता है की सर्च हिस्ट्री डिलीट करने से सब कुछ डिलीट हो जाता है , तो ये आपकी गलत फहमी है , आप सर्च हिस्ट्री भी डिलीट करके देखिएगा , लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं है ।
चीन और रूस के अनुसार गूगल केवल सर्च इंजन न होकर , बल्कि अपनी अमेरिकी सरकार के लिए जासूसी भी करता है , वो सब जानता है की हम इंटरनेट पर क्या क्या देखते है , क्या क्या हमे पसंद है , क्या हमे नहीं पसंद है , ये सारा डाटा उसके पास , शयद इसीलिए ईरान सरकार ने भी गूगल पर प्रतिबन्ध लगा दिया था , चीन और रूस तो पहले ही लगा चुके है , मैं भारत सरकार से केवल इतना गुजारिश करना चाहता हूँ , जब हमारे देश में खुद इतना टैलेंट है तो हम क्यों निर्भर है गूगल और फेसबुक या YOU - TUBE जैसी कंपनियों पर । हमे ऐसी टेक्नोलॉजी बल्कि इससे अच्छी टेक्नोलॉजी खुद विकसित करना चाहिए , याद रखिये तीसरा विश्व युद्ध हथियारों से नहीं बल्कि विचारों से लड़ा जाएगा ।
अंत में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए माफ़ करियेगा , लेकिन इस लेख के माध्यम मैं ३ बातें समझाना चाहता हूँ ,
१- जब हम हिन्दू मुस्लिम कर रहे थे तब अमेरिका टेक्नॉलजी को विकसित करने में लगा हुआ था
२- हमारी निजता पर प्रहार किया जा रहा है ,
३- हम खुद ही अपनी अर्थव्यस्था को कमजोर कर रहे है