Mayazaal

Mayazaal भुखमरी,बेरोजगारी और अशिक्षा के अंत का नाम है मायाजाल !!!

ONLY FOR MOTIVATION :15 साल कि उम्र में विल्मा TENNESSEE STATE UNIVERSITY गयी , जहां वह एड टेम्पल नाम के कोच से मिली । व...
05/12/2019

ONLY FOR MOTIVATION :

15 साल कि उम्र में विल्मा TENNESSEE STATE UNIVERSITY गयी , जहां वह एड टेम्पल नाम के कोच से मिली । विल्मा ने उनसे कहा कि "मैं दुनिया कि सबसे तेज़ धाविका बनना चाहती हूँ ।" तब टेम्पल ने कहा , : तुम्हारी इसी इच्छाशक्ति की वजह से तुम्हे कोई भी नहीं रोक सकता और साथ में मैं भी तुम्हारी मदद करूंगा ।"

आखिर वह दिन आया जब विल्मा ने ओलम्पिक में हिस्सा लिया । विल्मा का मुकाबला जुत्ता हैन ( JUTTA HEINE ) से था , जिसे कोई भी नहीं हरा पाया था । पहली दौड़ 100 मीटर की थी । इसमें विल्मा ने जुत्ता को हराकर अपना पहला गोल्ड मैडल जीता। दूसरी दौड़ 200 मीटर की थी , इसमें भी विल्मा ने जुत्ता को दूसरी बार हराया और अपना दूसरा गोल्ड मैडल जीता । तीसरी दौड़ ४०० मीटर की रिले रेस थी और विल्मा का मुकाबला एक बार जुत्ता से ही था । रिले में रेस का आखिरी हिस्सा टीम का सबसे तेज़ एथलीट दौड़ता है इसलिए विल्मा और जुत्ता दोनों को अपनी -अपनी टीम के लिए आखिरी में दौड़ना था । विल्मा की टीम के तीन लोग रिले रेस के सुरुवाती तीन हिस्से आसानी से दौड़े और बेटन बदली ,जब विल्मा के दौड़ने कि बारी आयी उसके हाँथ से बेटन से छूट गयी ।लेकिन विल्मा ने देख लिया था कि जुत्ता तेजी से दौड़ चली है । विल्मा ने बेटन उठायी और मशीन कि तरह ऐसी तेज़ी से दौड़ी कि जुत्ता को तीसरी बार भी हराया और अपना तीसरा गोल्ड मैडल जीता ।

यह बात इतिहास के पन्नो में दर्ज हो गयी कि एक लकवाग्रस्त महिला 1960 के ओलम्पिक में दुनिया की सबसे तेज़ धाविका बन गयी ।

04/12/2019

आप खुश होंगे , तो लोग आपके पास आएंगे
आप दुखी होंगे तो वे आँखें चुराएंगे
वे आपकी सारी खुशियां बाँटना चाहते हैं
मगर उन्हें आपका दुःख नहीं चाहिए
अगर आप खुश हैं तो आपके बहुत सारे दोस्त होंगे
आपके दुखी होने पर वो आपसे किनारा कर लेंगे -
आपके मधुरतम पैग को कोई नहीं नकारेगा
मगर जिंदगी के कड़वे घूँट आपको अकेले ही पीने पड़ेंगे ।

-- --- जीवन की सच्चाई !!!

 #एक बार जरूर पढ़ो और अगर बुरा लगे तो  तर्क जरूर करो  # नौकरी मांगनी नहीं ,हासिल करनी पड़ती है और आज़ादी के नाम पर आज़ादी से...
15/09/2019

#एक बार जरूर पढ़ो और अगर बुरा लगे तो तर्क जरूर करो #

नौकरी मांगनी नहीं ,हासिल करनी पड़ती है और आज़ादी के नाम पर आज़ादी से ज्यादा आज़ादी देने वाले देश का नाम भारत है। थोड़ी सी शक्ति क्या दिखाई सरकार ने motor vechical act में लगे गरियाने दिन रात पानी पी पी कर । बात अमेरिका ,जापान ,इजराइल और चीन की करोगे तो खुद सोचो की कितने साल पीछे हो तुम उनसे और ऐसा कितने साल रहने वाला है ?

मैं बताता हूँ , न तो मैं इस जन्म भारत को विकसित देश के रुप में देख पाऊंगा और न ही तुम लोग देख पाओगे । अगर आज से १० साल पहले कहते कि भ्रष्टाचार बहुत है तो समझ आता था क्यूंकि उस समय टेक्नोलॉजी नहीं थी , लेकिन अगर आज भी कहोगे कुछ नहीं बदला है ऐसा है , वैसा है , तो भैया ये सारे एक्सक्यूसेस किसको दे रहे हो। तुम्हारे और भ्रष्टाचार के बीच में सिर्फ तीन चीजें ही होती है - "देते हो " या " लेते हो " या फिर सब कुछ जानते हुए भी चुप हो । बस यही तीनो रिश्तें है , वरना सरकारी तंत्र बस कुछ लाख भर का या कुछ करोड़ भर का ही है और आप अरबों में हो । फिर बोलोगे कि रत्ती भर अंग्रेजो ने २०० साल कैसे भारत को अपना उपनिवेश बनाये रखा । और हाँ तुम में मैं भी शामिल हूँ , मैं कौन सा दूध का धुला हूँ ।

भारत में २ तरह कि समानान्तर अर्थव्यवस्था चलती है ।पहली जिसे हम जानते है यानी सरकारी खजाना + RBI + सेंसेक्स , कल इन तीनो में से कोई भी थोड़ा सा लड़खड़ा जाए तो पूरा भारत आर्थिक तंगी और महंगाई की मार झेलेगा जैसा आज वेनेजुएला में हालात है ।
और दूसरी अर्थव्यवस्था जो सरकार के खिलाफ है यानी कानून के खिलाफ है , जैसे सट्टा , मटका , जुवा , नशीली दवाइयां , पोर्न सेक्टर ,टैक्स चोरी , गांजा , चाइल्ड ट्रैफिकिंग , ह्यूमन पार्ट्स ट्रैफिकिंग , रिश्वत देना , रिश्वत लेना वगरैह -२ । अनुमान के हिसाब से प्रतिदिन अरबो-खरबो में ।

वैसे अगर हिन्दू - मुस्लिम , सवर्ण - दलित करने से मुक्ति मिल जाए तो थोड़ा ये भी सोच लेना की पूरा विश्व परमाणु युद्ध की आग में सुलग रहा है , थोड़ी सी चिंगारी की जरूरत है । और यह सोच कर खुश न होना की छोड़ो तुम्हे क्या , तुम्हरे राज्य में बाढ़ कहाँ आयी थी , या ये तो उस राज्य का मामला है तो जानकारी के लिए बता दू बहुत से धार्मिक ग्रन्थ और वैज्ञानिक यह भी दावा करते है की अगली प्रलय तो जल प्रलय ही होगी ।
तो भैया बहुत सारे मुद्दे है , बस चुनना तुमको है , तुम एक मोहरा मात्र भर हो । किसी के लिए वोटर हो तो , किसी के लिए एक नंबर , किसी के लिए नाम हो तो किसी के लिए IP एड्रेस हो ।
मौतें चारों तरफ तुम्हरे अलग अलग फॉर्म में टहल रही है । बस चुनना तुमको है । ओजोन में छेद होने देना है कि , ग्लेसियर को पिघलते रहते देना है , कि परमाणु हमला करके तीसरा विश्व युद्ध छेड़ने कि या धर्म और जाति ने नाम पर जो बीज बोया है उसकी फसल काटने के रूप में ।
सोचो -सोचो गाली किसको दूँ ,अपना गुस्सा कहाँ उतारू , लिखने वाले पर या सरकार पर या लोगो पर या हिन्दू-मुस्लिम करके या सवर्ण-दलित करके ।

"चाँद की विशेषता और उसका महत्व "एक हिन्दू और एक मुस्लिम के लिए कितनी है ,ये बात सर्वविदित है । हिन्दू धर्म की मान्यता के...
02/09/2019

"चाँद की विशेषता और उसका महत्व "

एक हिन्दू और एक मुस्लिम के लिए कितनी है ,ये बात सर्वविदित है । हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार करवा चौथ में जितनी चाँद की भूमिका रहती है , उतनी ही भूमिका एक मुस्लिम के ईद में रहती है ।

दूसरी सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण विशेषता हमारी पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन है ।

लेकिन मेरा दिमाग तब खराब हुआ जब मैंने इंटरनेट ( विकिपीडिआ )पर अमेरिका की करतूतों के बारे में पढ़ा । 1945 में जापान के ऊपर परमाणु हमला करके अमेरिका भी अपने दोहरे चरित्र का परिचय दे चूका था ।

लेकिन 1958 में अमेरिका की एयर फाॅर्स ने एक और खतरनाक प्लान बनाया था जिसका नाम था (प्रोजेक्ट - A119 ) जिसके तहत अमेरिका चाँद के LUNAR SURFACE पर NUCLEAR एक्सप्लोड करना चाहता था । ये सब केवल वो रूस को नीचे दिखने के लिए करना चाहता था , क्यूंकि रूस आलरेडी १९५७ में artificial satellite Sputnik 1 लांच करके पूरी दुनिया को चौका दिया था ।

इसी ईगो के चक्कर में अमेरिका ने चाँद पर LUCLEAR EXPLODE का प्लान किया । हालंकि ये प्लान पोस्टपोनड कर दिया ।

लेकिन इसके बहुत से दुष्परिणाम निकलते , जिसका सबसे बड़ा खामियाज़ा हमारी जलवायु परिवर्तन और सीधा चोट हमारी आस्था पर होता ।

हिन्दू और मुस्लिम के बीच नफरत की दीवार खड़ा करने वालो जाओ पहले राजनीतिक षड्यंत्र समझने की कोशिश करो ।

जय हिन्द - जय भारत !!!!

#डुम्मु कहिन

संसद में चर्चा और न्यूज़ चैनल में डिबेट : आज तक किसी ने इस मुद्दे पर देश को जागरूक नहीं किया की १ रुपया = १ डॉलर  कैसे ल...
07/08/2019

संसद में चर्चा और न्यूज़ चैनल में डिबेट :

आज तक किसी ने इस मुद्दे पर देश को जागरूक नहीं किया की १ रुपया = १ डॉलर कैसे लाया जाए । कोई अर्थशास्त्री इस बात का जवाब देगा क्या ?
मतलब रूपये को डॉलर से मजबूत कैसे किया जाए ?

SOCIAL MEDIA & OUR SOCIAL RESPONSIBILITIES            ( दो लोग आपस में बात करते हुए ) भाई आज की न्यूज़ देखी तुमने , इस सा...
16/07/2019

SOCIAL MEDIA & OUR SOCIAL RESPONSIBILITIES

( दो लोग आपस में बात करते हुए )

भाई आज की न्यूज़ देखी तुमने , इस साल देश में 24000 से ज्यादा बलात्कार हुए है जिनकी FIR दर्ज हुई है । कइयों में अभी तक तो चार्ज शीट भी दाखिल नहीं हुई है और सुप्रीम कोर्ट बहुत सख्त है ।
भाई मुझे तो लगता है की ये आंकड़ां इससे भी बहुत बड़ा है । देश में रोज कहि न कहि बलात्कार हो रहे है । कितनी ही बच्चियों , महिलाओ का मानसिक , शारीरिक शोषण हो रहा है । बहुत तो बदनामी के डर से इस पीड़ा को जिंदगी भर बर्दास्त करती है । भाई तुम मुझे सुन भी रहे हो या अपने में ही मगन हो ।

दूसरा लड़का : सुन रहा हूँ भाई , लेकिन इसमें मै क्या कर सकता हूँ ।

पहला लड़का : मै बताऊ तुम क्या कर सकते हो ?
तुम सिर्फ सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा उतार सकते हो । दो मिनट में किसी को फर्श से उठाकर अर्श पर बिठा सकते हो और किसी को भी अर्श से उठाकर फर्श पर बिठा सकते हो । किसी भी इंसान का CHARACTER ANALYSIS तुरंत कर सकते हो । किसी की भी लाइफ में तुरंत ऊँगली कर देते हो ।

दूसरा लड़का : भाई कहना क्या चाहते हो आखिर तुम ?

पहला लड़का : वही जो तुम सुनना नहीं चाहते हो , देखना नहीं चाहते हो , समझना नहीं चाहते हो ।

दूसरा लड़का : भाई यार घुमा फिर कर मत बात करो । साफ़-साफ़ बोलो ।

पहला लड़का : अच्छा एक सवाल पूंछू, सही सही दिल से जवाब देना ।

दूसरा लड़का : हां पूंछो ।

पहला लड़का : पिछले तीन - चार दिनों में तुमने सोशल मीडिया पर क्या क्या किया ? क्या देखा ? तुम्हारा रिएक्शन क्या रहा ? देखो मै चाहता तुम सच बोलो और मुझे हर टॉपिक पर DISCUSSION करो ।

दूसरा लड़का : ओके । इंडिया के सेमी फाइनल हारने का दुःख हुआ । गोल्डन गर्ल हिमा दास के तीन स्वर्ण पदक जीतने पर अंदर से बहुत खुशी मिली । न्यूज़ीलैंड के फाइनल हारने पर खुशी मनाई । मीम शेयर किये । बरेली विधायक वाले मुद्दे पर अपनी टिप्पणी दी।

पहला लड़का : हम्म , अच्छा ये बताओ न्यूज़ीलैंड ने क्या गलती की थी जो तुमने उसके हार पर खुशी मनाई थी ?

दूसरा लड़का : क्यूंकि उसने सेमी में इंडिया को हराया था ।खासकर गुप्टिल के साथ जैसा का तैसा वाली कहावत हुई , उसने धोनी को रन आउट किया था , वैसा ही उसके साथ फाइनल में हुआ । तुमने भी तो किसी न किसी टीम को चीयर किया होगा । अपने अपने इंट्रेस्ट की बात है ।

पहला लड़का : हां मैंने न्यूज़ीलैंड को चीयर किया था , इंग्लैंड को नहीं । क्यूंकि फाइनल के दिन जब मैंने अपने मन के तराजू में दोनों टीमों को तौला तो मुझे न्यूज़ीलैंड का पलड़ा ज्यादा भारी दिखा ।

दूसरा लड़का : कैसे ?

पहला लड़का : कागजों पर न्यूज़ीलैंड भले ही कमजोर थी लेकिन सेमी फाइनल में जीतने के बाद भी जिस तरह से केन विलियम्सन से जब सवाल पूंछा गया की आपने १२५ करोड़ भारतीय फैंस के सपने को तोड़ दिया , इस पर आप क्या कहेंगे ।
तब केन ने कहा की भारत बहुत भाग्यशाली देश जो उसके पास ऐसे SUPPORTER है । और वो मुझसे गुस्सा नहीं होंगे ,बल्कि मुझे फाइनल में सबका प्यार मिलेगा ।

दूसरा लड़का : तो मतलब इतना काफी था क्या न्यूज़ीलैंड को सपोर्ट करने के लिए ?

पहला लड़का : हां , मेरे लिए तो इतना ही काफी था और गुप्टिल ने वही किया जो एक खिलाडी अपनी टीम के लिए करता है ।जैसे एक फौजी अपने देश के लिए करता है । हमे इसे खेल भावना की तरह देखना चाहिए । अच्छा बरेली विधायक प्रकरण में क्यों टिप्पणी किया तुमने ?

दूसरा लड़का : भाई उस लड़की ने सही नहीं किया , सरेआम अपने बाप को बेइज्जत किया ? ऐसी लड़की से तो लड़की न होना अच्छा है ।

पहला लड़का : तुम हो कौन ? उसके रिस्तेदार हो , दोस्त हो , पड़ोसी हो , या उनके परिवार को जानते हो ?

दूसरा लड़का : मतलब क्या है भाई तुम्हरा ? SOCIAL MEDIA पर उसका वीडियो वायरल हुआ । सबने अपनी अपनी टिप्पणी दी । मैंने भी दे दी ।

पहला लड़का : हां , मैंने देखा बहुतो ने टिप्पणी की , सबने अपनी अपनी राय रखी जोकी गलत नहीं है । हर इंसान को अपनी बात कहने का हक़ है । लेकिन मैंने ये भी देखा की लोग अंजनी ॐ कश्यप की बेटी की फोटो शेयर कर कर के उसको बददुवाएं दे रहे है की एक दिन ऐसी ही तेरी बेटी भागेगी फलाना ढिमका । मतलब की SOCIAL MEDIA के हिसाब से बहुत लोगो ने उस लड़की का फ्यूचर पहले से ही DECIDE कर दिया है । मलतब की अंजना ॐ कश्यप की गलती की बद्दुवा उनकी बेटी को क्यों , क्या वो आप लोगो की बहन सामान नहीं है । और बहन को दुआएं दी जाती है न की बद्दुवा । दूसरी चीज , किसी ने कहा विधायक की गलती है , कोई बोला की लड़की ने अपनी आत्मा रक्षा के लिए सही कदम उठाया । किसी ने इसको दलित समाज के जोड़ा । मीडिया को मसाला मिला । और विपक्षियों को मुद्दा । सब अपने अपने ANGEL में कहानी को फेसबुक , ट्विटर , न्यूज़ में परोसने लगे । जबकि EXACTLY क्या हुआ क्या नहीं हुआ , किसी को नहीं पता । केवल एक वीडियो और डिबेट के आधार पर सबने बाप - बेटी का CHARACTER सेट कर दिया । मतलब की सच बोलू घूम फिर कर मुद्दा फिर वही आ गया “जाति- राजनीति –TRP” । न्यूज़ चैनल वाले इसलिए खुश है की चलो एक मुद्दा मिल गया । चूँकि मामला एक विधायक से जुड़ा है इसलिए ३-४ दिन तो TRP को कोई आंच नहीं आएगी । तुरंत ही आईटी सेल भी एक्टिव हो जाता है और सब अपने अपने हिसाब एक नैरेटिव सेट करने में लग जाते है । लेकिन मुद्दा अब भी यही है की ऊँगली करने का हक़ किसने दिया ?

दूसरा लड़का : सच कहुँ तो ये हक़ हमे समाज देता है । क्यूंकि लोगो के पर्सनल मामले और घरेलु मामलो में अगर समाज ऊँगली नहीं करेगा तो अब तक तो रुपया डॉलर के मुकाबले बहुत मजबूत होता । लेकिन विधायक जी की पीड़ा मै समझ सकता हूँ । बाकी सब ठीक है लेकिन बेटी को मीडिया के सामने ऐसा नहीं करना चाहिए था ।

पहला लड़का : गुड !
क्या तुम्हे पता है की इस समय पानी कितना तबाही मचा रही है चारों तरफ ?
भारत में महिलाओ की साक्षरता % कितनी है ?
हर साल कितने केस गर्भपात के आते है ?
बेटियों को पढ़ने नहीं दिया जाता ?
कुछ अंदाजा भी है की हर मिनट पूरे भारत में कितनी ही लड़कियाँ , महिलायें कैसे कैसे गंदे -गंदे कमेंट , छेड़छाड़ , मानसिक यातनाएं , शारीरिक यातनाये , शारीरिक शोषण , बलात्कार आदि का शिकार हो रही है ? जितनी जोर शोर से आज विधायक जी और उनके परिवार के बारे में बातें कर रहे हो , कभी WOMENS TRAFFICING और रेड लाइट एरिया में जबरदस्ती लायी गयी महिलाओ के बारे में भी पता कर लेते । इन २४००० रेप जोकि इस साल के अब तक का सरकारी आंकड़ां है , हमारा ध्यान इसलिए नहीं जाता है क्यूंकि छोड़ो यार हमारी नींद क्यों टूटने वाली है , हमारे साथ ऐसा थोड़ी हुआ है जब होगा तब देखा जाएगा ।कभी एसिड फेकने वालो के खिलाफ भी स्ट्राइक करो । या जब ऐसा हमारी सगी बहनो के साथ ही होगा तभी हम जागेंगे ।

दूसरा लड़का : लेकिन भाई , इन चीजों को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है ?

पहला लड़का : देश के राजा का पहला कर्तव्य , देश की सुरक्षा हर हाल में , हर नागरिक की ।।। और अब वक़्त आ गया है जब राजा साहब को पूरे देश में CCTV लगवा देना चाहिए ।

दूसरा लड़का : क्या पूरे देश में CCTV ? तुम्हे कुछ अंदाजा भी है की तुम क्या बोल रहे हो ? जानते भी हो कितना खर्चा आएगा इसमें । सरकार इतना एक्स्ट्रा बजट कहा से लाएगी और दूसरी चीज CCTV पूरे देश में लगाने से क्या फायदे होंगे ?

पहला लड़का : हां अच्छे पता है मैं क्या बोल रहा हूँ । मॉब लीचिंग , दंगे , छेड़छाड़ , बलात्कार और सड़कों पर होने वाली ९०% अपराधों पर नियंत्रण । और दूसरा सबसे बड़ा फायदा , करीब ३ करोड़ बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा । बाकी तुम खुद अंदाजा लगा लो की जब पूरे देश की कुल लगभग ४८ लाख किलोमीटर की सड़कों पर चप्पे - चप्पे पर CCTV होगा तब कोई दंगे करके दिखाए । कोई भी लीचिंग करके दिखाए । या फिर कोई किसी लड़की को छेड़ कर दिखाए । और रही बात BUDGET की तो सरकार मैनेज कर लेगी क्यूंकि सरकार जब १५०रूपये प्रति माह वाला मोबाइल पैक जिसके लिए सरकार सांसदों को १५०० रूपये प्रतिमाह देती है , YAANKI की १० गुना ज्यादा BHUGTAAN तो य फिर तो बहुत छोटी सी बात है । वैसे मोबाइल पर फिजूल ख़र्च ही सालाना अरबों रूपये के ऊपर है ।न विश्वास हो तो RTI जिंदाबाद ।
लेकिन अगर विधायक जी की निजी व घरेलू जिंदगी में INTERFARE करने से छुट्टी मिल गयी हो तो थोड़ा सा ही सही देश हित में ध्यान दे लिया जाए ।

दूसरा लड़का : अच्छा सुनो भाई । काफी लेट हो गया । कल इस मुद्दे पर वापस बात करते है ।

30/05/2019

विकसित भारत के लिए पहले प्राइमरी विद्यालयों का आधुनिकीकरण जरूरी --

जी हां , हमारे देश में करोड़ो बच्चे अपने विद्यार्थी जीवन की सुरुवात प्राइमरी स्कूल से ही करते है । लेकिन उन करोड़ो बच्चों में केवल कुछ बच्चे ही अपनी पढाई आगे जारी रख पाते है , बाकी या तो पढाई को बीच में ही छोड़ देते है , या गरीबी और जिम्मेदारियों के बोझ तले बच्चा स्कूल नहीं जा पाता है । या ऐसे बहुत से कारण है जिनके वजह से बच्चे को पढाई का परित्याग करना पड़ता है । ये बहुत ही दुखद है मेरे लिए , समाज के लिए , सरकार के लिए और आप सब के लिए , एक विकसित भारत की नीव कल को यही बच्चे रखेंगे ,लेकिन सवाल है की वो कल आखिर आएगा कब ? कल की आस में बैठोगे तो १०० साल बाद भी कल नहीं आएगा ।

शिक्षा हमारा संवैधानिक , मूलभूत और जन्म सिद्ध अधिकार है , जिसका उल्लेख राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में है , ६-१४ साल के बच्चों से आप शिक्षा का अधिकार नहीं छीन सकते है ,बल्कि कोई भी नहीं छीन सकता है ।

मानता हूँ एक गरीब इंसान के बस की बात नहीं है अपने बच्चे को मॉडल स्कूल में पढ़ाना , लेकिन कम से कम आप अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में तो भेजो रही बात अच्छी पढाई की , तो इसके लिए अब वक़्त आ गया है प्राइमरी स्कूल्स को आधुनिक बनाने का ।

आधुनिक से मेरा तात्पर्य जब बच्चा प्राइमरी स्कूल्स से अपनी आठवीं तक की पढाई पूरी करके निकले तब तक वो पूरी तरह से इंग्लिश का ज्ञान , कंप्यूटर फंडामेंटल ज्ञान और अपने कोर्सेस सम्बन्धी ज्ञान पूरी तरह से अर्जित कर चूका हो , निजी तौर पर मैं रट्टा मेथड के बिलकुल खिलाफ हूँ ।

और एक कहावत है 1000 शब्द = १ पिक्चर
(अगर आप बच्चे को कोई भी चीज इमेज दिखाकर समझाओ तो जल्दी समझ जाएगा । इसीलिए कहा गया है की १००० शब्दों के बराबर एक पिक्चर होती है , लेकिन अब चीजें उससे भी आगे निकल गए है , अब आप पूरा चैप्टर आप बच्चे को एक वीडियो में समझा सकते है । )
1000 पिक्चर = १ वीडियो
न्यूरो साइंस के अनुसार हमारा मस्तिष्क का आधा हिस्सा विज़ुअल्स और आधा हिस्सा कार्डियल होता है ।

यानी की अगर बच्चे को आप एक लेसन देते हो की कल याद करके आना , हो सकता है की वो याद न कर पाए , या फिर उसको बोरिंग लगे वो किताब को खोले ही न , या फिर वो आज तो पढ़ लेगा लेकिन एग्जाम आते आते वो भूल जाएगा , लेकिन आज पढाई का स्टैण्डर्ड काफी बदल चूका है , अब बच्चों को 2d - 3d वीडियो के माध्यम से पढ़ाया जाता है , जिससे वो जल्दी सीखते है और उनको इंट्रेस्ट भी आता है । क्यूंकि विज़ुअल्स दिमाग में बहुत लम्बे समय तक के लिए सुरक्षित रहते है जिन्हे हम जल्दी भूलते नहीं है । उदहारण के लिए हम लोगो ने भी बचपन में शक्ति मान देखा होगा , लेकिन आज भी उसके दृश्य याद है हमे , बच्चों को रटने के बजाए अगर हम उनको विज़ुअल्स की मदद से पढ़ाये तो बच्चा मन भी लगाएगा और चीजों को अच्छे से समझ भी लेगा ।

अब आता हूँ इंग्लिश पर , तो सबसे पहले मेरा मानना है की हमारी रीजनल भाषा , हमारी राष्ट्र भाषा और इंग्लिश पर पकड़ बहुत मजबूत होनी चाहिए , क्यूंकि इस तेजी से बदलती हुई दुनिया और इस आधुनिकरण के दौर में इंग्लिश पर पकड़ होना बहुत जरूरी है ।

कंप्यूटर इसलिए जरूरी है की आज से १० साल बाद जब आप अपने चारों तरफ देखोगे तो सब कुछ ऑनलाइन ऑनलाइन ही नजर आएगा । और कंप्यूटर या मोबाइल केवल मूवी , या गेम खेलने या चैटिंग करने तक ही नहीं सीमित नहीं है , बल्कि इसकी शक्तियां अपार है , और इंग्लिश और कंप्यूटर ज्ञान अर्जित करने के बाद आप अपने आप को कभी बेरोजगार नहीं कहोगे ।और भारत का युथ या आज जो बच्चे अपनी प्राइमरी शिक्षा अर्जित कर रहे है वही भारत को एक विकसित देश बनाएंगे , लेकिन एक भारतीय नागरिक के तौर पर हमारी भी कुछ समाजिक जिम्मेदारियां है ।

आइये अब साथ मिलकर प्राइमरी स्कूल्स का आधुनिकीकरण करते है । शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जो देश को आधुनिक भारत बनाएगा , एक विकसित भारत बनाएगा , नस्लवाद , धर्मवाद , जातिवाद से परे एक नए भारत का निर्माण होगा । रही बात मेरी तो मै निजी तौर पर अपने घर से समीप प्राइमरी विद्यालय को डिजिटल एजुकेशन से जोड़ने पर प्रोजेक्ट पर काम कर रहा हु । मै यही चाहता हु की आप भी अपने अपने एरिया में पड़ने वाले प्राइमरी स्कूल्स का आधुनिकीकरण करे और सुनिश्चित करे की आपके क्षेत्र में कोई भी बच्चा छूटने न पाए । शिक्षा पर सबका हक़ है । हां पैसा लगेगा , इसके लिए आप ५०-१०० लोगो का समूह बना ले । चंदा इकठ्ठा करे , लेकिन पीछे न हटे ।।
आइये साथ मिलकर बदल देते है प्राइमरी विद्यालयों के स्वरुप , आइये करते है काया कल्प , फिर आज से १० साल बाद हम सब गवाह होंगे आधुनिक भारत के ।

एक कदम विकसित भारत की ओर !!!!!!!!!!!!!!!

जय हिन्द , जय जवान , जय किसान !!!!!!!!!

16/05/2019

RIGHT TO EDUCATION !!
STOP CHILD LABOUR !!

हमारे देश में शिक्षा का व्यवसायीकरण और सिस्टम के उदासीन रवैये के कारण आज भी करोड़ो बच्चे शिक्षा से वंचित है !

जहां एक तरफ सरकार ने ६ वर्ष से १४ वर्ष के बच्चों के लिए राइट टू एजुकेशन और प्राइवेट स्कूल्स में 25 % आरक्षण की व्यवस्था दी हुई है जिसका सीधा मतलब उन लोगो से और उन लोगो के लिए जिन्होंने शिक्षा को एक मजाक बना दिया है । शिक्षा हमारा संवैधानिक और मूलभूत अधिकार है । शिक्षा के बिना एक अच्छे समाज और एक अच्छे राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती है । और गलती भी हम सबकी है । और क्यों न हो हम लोग भी तो जब किसी होटल में चाय , नास्ते के लिए बैठेंगे तो बहुत शान से आवाज देंगे , ओ छोटू चाय लाना , ओ छोटू टेबल बहुत गन्दी है , कपडा मारो इस पर और कभी कभी तो उसी लड़के पर अपना गुस्सा भी उतार देंगे क्यूंकि उस बेचारे ने आपका आर्डर पूरा करने में थोड़ा देर कर दिया !

गलतियां तो उन लोगो की भी है जो बचपन से ही बच्चों को अपने साथ ही अपने धंधे में उतार लेते है , कही होटल पर , तो कही चाय की दूकान पर , कही पंचर की दूकान पर तो कही अखबार बेचते हुए तो कही पान मसाला बेचते हुए । ऐसे ही न जाने कहाँ-२ ये बच्चे पढाई लिखाई से वंचित केवल बाल मजदूरी कर रहे है ।
गलतियां उन लोगो की भी है जो बच्चों के पढ़ने लिखने में मार्गदर्शक बनने की बजाए उन बच्चों को अपने यह काम पर रखते है । अरे साहब आप तो पढ़े लिखे है , अगर आप उनकी पढाई लिखाई पर ख़र्च नहीं कर सकते है तो कम से कम उनका दाखिला किसी सरकारी स्कूल में करवा दीजिये , कुछ कॉपी किताबें लेकर दे दीजिये । शायद इसी में थोड़ा पुण्य कमा लिया जाए ।
और इसी देश में कुछ कमीने ऐसे भी है जो बच्चों को चाइल्ड ट्रैफ़िकिंग के जरिये खरीदते भी है ताकि वो बच्चे उनके यहां घरों में काम कर सके ।
तो कुछ स्कूल वाले सुप्रीम कोर्ट के नियमानुसार गरीब बच्चों के २५ % आरक्षण के प्रावधान का पालन तो कर रहे है और वो एडमिशन भी दे देते है लेकिन जब किताबें , ड्रेस और दुनिया भर के खर्चो के नाम पर वो उन गरीब बच्चों और उनके अभिभावकों को एक बार फिर गरीब बना देते है ।
जिन माँ बाप को केवल ये लगता है की केवल बेटो को पढ़ाओ , बेटियां क्या करेंगी पढ़ लिख कर तो आप लोगो से केवल इतना कहना चाहूंगा की राइट तो एजुकेशन का मतलब ये भी है की आप अपनी मन मर्जी बच्चों पर नहीं डाल सकते है की वो नहीं पढ़ेंगे या केवल काम करेंगे । शिक्षा सबका जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे बच्चों से कोई नहीं छीन सकता है । आपको तो उन लड़कियों से सबक लेने की जरूरत है जिन्होंने अभी हाल में ही ५०० में से ४९९ अंक अर्जित किये है ।
तो कुछ स्कूल वाले नियमो की धड़ा धड़ धज्जियाँ उड़ा रहे है , उनको नहीं मतलब है किसी भी नियम से और किसी भी राइट तो एजुकेशन से । उनको तो केवल पैसे से मतलब है । अरे शर्म करो , कॉपी और किताबों के नाम पर बच्चों के पीठ पर २० किलो का बस्ता टांग देते हो ! बहुत से लोगो को तो सरकारी स्कूल के अलावा यही नहीं पता है की प्राइवेट स्कूल में भी उनके लिए २५ % सीट आरक्षित की गयी है , आप भी अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा सकते है और अगर बीच में आपके बच्चे का कोई अड्मिशन लेने से मना करता है तो इसकी शिकायत सीधे बेसिक शिक्षा अधिकारी या जिलाधिकारी से करे , कोई भी स्कूल आपके साथ मनमानी नहीं कर सकता है ।
शिक्षा बाटने से कभी कम नहीं होती है बल्कि और बढ़ती है । शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे गैर सरकारी संस्थाओं से अनुरोध करना चाहूंगा की थोड़ा सा ध्यान इधर भी दीजिये । ये आंकड़ें बेहद कष्टदायी है । विकसित देश की कल्पना तभी की जा सकती है जब वह का सारा युथ एजुकेटेड होगा ।
और आप सभी से अनुरोध की कभी किसी ऐसे बच्चे पर नजर पड़े तो उसकी पढाई जरूर सुनिश्चित कीजियेगा । पुण्य कमाने के लिए केवल दान करना ही जरूरी नहीं बल्कि अगर एक गरीब बच्चे शिक्षा से मिलवाना भी है ।
सोचा पड़ने की बजाय लोग वीडियो देखना ज्यादा पसंद करते है इसलिए इसी टॉपिक से मिलता जुलता वीडियो जोड़ रहा हूँ , इस वीडियो को खूब शेयर कीजिये ताकि कहि न कहि किसी न किसी बच्चे को आने वाले सत्र में इसका फायदा मिले ।
- AN INDIAN THINKER

10/05/2019

क्या पश्चिमी टेक्नोलॉजी के दो रूप है ?

फेसबुक की बात करे तो इसके संस्थापक के बारे में सभी जानते होंगे ,जी हां मैं बात कर रहा हू मार्क इलियट ज़ुकरबर्ग की , और मुझे ये कहने में कोई झिझक नहीं होगी की आज अगर हम सोशल नेटवर्किंग के जरिये पूरी दुनिया से जुड़े हुए है तो इसका सारा श्रेय मार्क को ही जाता है , फेसबुक भले ही २००४ में लांच हुआ हो लेकिन बचपन में ही उन्होंने , जब वो महज १२ साल के थे , तब उन्होंने ZUCKNET MESSAGING PROGRAMME बनाया जिसका इस्तेमाल उनके पिता अपने डेंटल क्लिनिक और घर में एक कंप्यूटर से दुसरे कंप्यूटर के जरिए बात करने के लिए , और क्लिनिक में मरीजों के अपॉइंटमेंट के लिए करते थे ।मार्क जब दसवीं क्लास में थे तब उन्होंने Synapse Media प्लेयर बनाया जिसमे यूजर की पसंद के अनुसार mp3 फाइल की लिस्ट बन जाती थी । अपनी स्कूलिंग समाप्त करने के बाद मार्क ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया ।

यहाँ पर उन्होंने Facemash नाम की एक वेबसाइट बनाई ( इस वेबसाइट के जरिये २ स्टूडेंट्स की तुलना की जाती थी की दोनों में ज्यादा कौन हॉट है ) । Facemash में इस्तेमाल किया गया डाटा उन्होंने अपने ही कॉलेज के डाटा बेस को हैक करके जुटाया था , सुरुवात में Facemash कॉलेज में बहुत लोकप्रिय हुआ , लेकिन जब बाद में कुछ लड़कियों ने इस पर आपत्ति दर्ज करवाई क्यूंकि उनका ही डाटा Facemash के जरिये पूरे कॉलेज में वायरल हो गया था , और बात कॉलेज प्रशासन तक जा पहुंची ,

उनके दोस्तो को लगा की अब मार्क का कॉलेज से निष्काषन तय है ,लेकिन उन्होंने पूरे प्रशाशन से माफ़ी मांगी और कॉलेज प्रशाशन से उनको माफ़ कर दिया , लेकिन वो मार्क से प्रभावित भी हुए की कैसे एक १९ साल के लड़के ने उनके कॉलेज के सबसे स्ट्रांग डाटा बेस को हैक कर लिया था और उस दिन के बाद ये तो साफ़ हो गया की ये लड़का रुकने वालो में से नहीं है , फिर मार्क रुके नहीं उन्होंने पूरे हॉर्वर्ड कॉलेज को जोड़ने के लिए एक सोशल साइट बनाई जिसका नाम हार्वर्ड कनेक्शन रखा , जिससे कॉलेज के सभी लोग सोशली जुड़ सके , लेकिन शायद वो इतने से ही खुश नहीं थे , वो अपनी इस सोशल टेक्नोलॉजी को पूरी दुनिया में एक्स्प्लोर करना चाहते थे , जिससे की पूरी दुनिया के लोग आपस में जुड़ सके । फिर ४ FEB २००४ को उन्होंने THE FACEBOOK DOT COM नाम से वेबसाइट को रजिस्टर्ड किया , जिसके लिए उनको कॉलेज ड्राप आउट लेना पड़ा ।

फेसबुक पर ५० मिलियन का ट्रैफिक ( भीड़ ) आते ही यहां भी याहू महाराज आये और फेसबुक को १ अरब डॉलर में खरीदने का ऑफर दिया लेकिन मार्क फेसबुक बेचना ही नहीं चाहते थे ।

फिर वो कैलिफ़ोर्निया आये जहां पर उन्होंने एक लीज पर घर लिया और अपना ऑफिस खोला फिर २४ मई २००७ को उन्होंने फेसबुक प्लेटफॉर्म की घोषणा की जिसके बाद करीब दुनिया भर के लगभग ८.५० लाख डेवलपर फेसबुक से जुड़ गए और वही से फेसबुक ने अमेरिका की इकॉनमी से निकलकर वर्ल्ड की इकॉनमी में कदम रखा । मार्क पीछे मुड़कर देखना ही नहीं चाहते थे , और फेसबुक कनेक्ट टेक्नोलॉजी को विकसित करके और WHATS APP का अधिग्रहण करके मार्क ने तेजी से बदलती हुई टेक्नोलॉजी में अपने पैर जमा लिए थे ।

फेसबुक कनेक्ट के जरिये आप दुनिया भर की वेबसाइट पर फेसबुक के माध्यम से ही लॉगिन कर सकते है , इसके लिए आपको किसी प्रकार के रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होती है ।

मेरे हिसाब से यह कदम इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अनोखा कदम था । आपको शायद याद होगा फेसबुक से पहले ऑरकुट (ORKUT ) सोशल टेक्नोलॉजी , जोकि गूगल का ही प्रोडक्ट था , वही भारत में लोकप्रिय थी , लेकिन फेसबुक के आने के बाद लोगो ने ऑरकुट को भुला दिया और एक समय ऐसा भी आया जब गूगल को ऑरकुट को हमेशा के लिए बंद करना पड़ा ।
यहां ऐसा कुछ भी नया नहीं है जो मैं आपको बता रहा हूँ , ये सारी जानकारी आपको इंटरनेट पर मिल जायेगी लेकिन जैसे ही मेरी नजर विंकेलवोस जुड़वाँ भाइयों (Tyler and Cameron Winklevoss TWINS BROTHER ) पर जाती है तो पता नहीं क्यों मन में कुछ और भी संभावनाएं जनम लेने लगती है ,

जी हां , आप दोनों वही जुड़वाँ भाई है जो मार्क के साथ ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में थे । आप के अनुसार , आपने मार्क को हार्वर्ड कनेक्शन ( जिसे बाद में कनेक्ट यू कहाजाने लगा ) पर काम करने के लिए रखा था और वही से सोशल नेटवर्क को पूरे विश्व में एक्स्प्लोर करने के लिए सुझाव दिया , फिर आप मार्क पर उनका(फेसबुक ) आईडिया चुराने के लिए नुक्सान की भरपाई करने के लिए कहते है जिसका मुवाअजा आप १०० मिलियन $ मांगते है , आप अदालत की शरण में जाते है , लेकिन ये क्या आपका मार्क के साथ अदालत के बाहर ६५$ डॉलर में समझौता कर लेते है , उसके बाद भी आप नहीं रुकते है , आप ६५ मिलियन से ११ मिलियन बिटकॉइन में निवेश करते है । जब बिटकॉइन की कीमत ११०$ प्रति बिटकॉइन हुआ करती थी । और जिस दिन बिटकॉइन २० हजार $ को टच करता है आप अपने आप को दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति घोषित कर देते है , आप इन सम्भावनाओ को हमेशा खारिज करते रहे है की आपने अभी एक तक भी बिटकॉइन नहीं बेचा है , आपने हमेशा बिटकॉइन को एक इलक्ट्रोनिक गोल्ड के रूप में देखा ।

1-अब मैं हमेशा ये सोचता हूँ की जब आप अदालत में मुकदमा हार गए थे तो ऐसा क्या हुआ था जब मार्क ने आपसे ६५ मिलियन $ में अदालत के बाहर समझौता कर लिया था ?

2-सतोषी नाकामोति जो बिटकॉइन के इन्वेंटर थे , जिनको आज तक दुनिया में किसी ने नहीं देखा है , जिस बिटकॉइन को दुनिया के कई देश अभी भी नहीं समझ पाए है , जिस बिटकॉइन पर किसी तीसरी संस्था का कोई नियंत्रण नहीं है , एक ऐसी क्रिप्टो जिसकी कीमत २००९ में मात्रा ६ पैसे की थी । तो क्या मैं मान लू की क्रिप्टो का आईडिया आपका ही था?, या सतोषी नाकामोति हॉर्वर्ड की देन थे ?

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका के हालत कुछ ज्यादा अच्छे नहीं थे , महामंदी का शिकार होने के बाद जिस तरह से अमेरिका ने अपने आप को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बनकर दिखाया है , उससे एक चीज तो साफ़ है की वो हमेशा टेक्नोलॉजी को बढ़ाने और रिसर्च के पीछे ही भागे है । किसी भी हाल में वो दुनिया से अपनी पकड़ खोने नहीं देना चाहते है । मैंने एक लेख में पड़ा था की अमेरिका कच्चे तेल के निर्यात पर इतना जोर दे रहा है की उसने अभी से ही अगले २०० साल का तेल स्टोर कर लिया है । आप पहले अपने देश में टेक्नोलॉजी को विकसित करते है फिर वही टेक्नोलॉजी दूसरो देशों तक पहुंच जाती है , जिससे आप प्रतिवर्ष अरबो रूपये लेकर चले जाते है , मेरे मस्तिष्क में एक बात तो क्लियर हो गयी की क्यों आपका विदेशी मुद्रा भंडार इतना अधिक है , क्यों आपकी अर्थव्यवस्था इतनी शक्तिशाली है , और दुखद ,क्यों हमारा रुपया इतना कमजोर है ।
मैंने पढ़ा की फेसबुक भी अपनी क्रिप्टो मार्किट में लेकर आ रहा है फेसबुक क्रिप्टो के नाम से , मैंने पढ़ा की whats app भी अपना पेमेंट गेटवे लेकर आ रहा है । हर जगह अमेरिका , हर कही अमेरिका , क्या हो गया है हमको ?

आप लोग खुद ही सोचिये की मैं गलत कह रहा हूँ या सही । मंथन आपको करना है , वरना आज ७२ -७० पर डॉलर ट्रेड कर रहा है , बड़ी बात नहीं कर रहा हूँ जिस तरह से अमेरिका अपने आप को एक्स्प्लोर कर रहा है उस हिसाब से एक दिन $ विश्व की सबसे मजबूत करेंसी बन जाएंगी ।।

ईस्ट इंडिया कंपनी का दूसरा स्वरुप है पश्चिमी देशो की टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करना .

अर्थशाश्त्र शायद मैंने न पढ़ी हो लेकिन इतना जानता हूँ की डेली ये सैकड़ो कम्पनिया केवल और सिर्फ केवल सर्विस के नाम पर अरबो रूपये हमारे देश से ले जा रही है जिनमे बहुत सी तो ऐसी भी कम्पनिया जिनको हमे $ में चुकाना पड़ता है ।
मुझसे अगर सहमत हो तो आगे शेयर कर दीजियेगा ताकि लोगो को टेक्नोलॉजी की असली ताकत का पता चल सके ।

मेरी लड़ाई बाहरी टेक्नोलॉजी को अपने देश में आने से रोकना है ।
मेरी लड़ाई भारत से भुखमरी , बेरोजगारी और गरीबी को टेक्नोलॉजी की मदद से जड़ से मिटाना है ।
मेरी लड़ाई पश्चिमी टेक्नोलॉजी को भारत में हावी होने देने से रोकना है ।

वरना मैं भी विकाशशील देश में पैदा हुआ था , आप भी विकाशशील देश में पैदा हुए है , और शायद मरना भी विकाशशील देश में ही हो ।

क्या गूगल (googal) वाकई में आपकी जासूसी करता है ?भारत में  आज लगभग ४५ करोड़ लोग स्मार्टफोन से तो जुड़ चुके है लेकिन  उनमे ...
08/05/2019

क्या गूगल (googal) वाकई में आपकी जासूसी करता है ?

भारत में आज लगभग ४५ करोड़ लोग स्मार्टफोन से तो जुड़ चुके है लेकिन उनमे से बहुत से लोग गूगल को ही इंटरनेट मानते है , चलिए थोड़ा सा जान लेते है की क्या है गूगल ? और क्या गूगल (googal) वाकई में आपकी जासूसी करता है ?

गूगल उस अमेरिकन टेक्नोलॉजी का नाम है जिसका जन्म अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया शहर हुआ था जिसके जन्मदाता थे , पीएचडी के २ स्टूडेंट लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन , इन दोनों ने ही १९९६ में गूगल की नींव रखी ।
लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन एक ऐसा सर्च इंजन बनाना चाहते थे जो दुनिया भर की websites को उनके पेज व्यू के हिसाब से दिखाए ,मतलब जो websites जितनी क्लीन और जिसके जितना ज्यादा पेज व्यू होंगे ,गूगल का अल्गोरिथम उनको सबसे पहले दिखायेगा । सुरुवाती दिनों में गूगल का नाम google stanford edu हुआ करता था , फिर १५ सितम्बर १९९७ को googal com डोमेन रजिस्टर्ड किया गया । उन्ही दिनों पूरी दुनिया में याहू का बोलबाला था , सुरुवाती दिनों में इन्होने अपना ऑफिस अपने दोस्त के गैराज में डाला और फिर १९९९ में कुछ ख़ास सफलता न मिलने के कारण इन्होने गूगल को बेचने का मन बना डाला , लेकिन शायद उस दिन वर्ल्ड इकॉनमी को ये मंजूर नहीं था , इसलिए जिन लोगो के साथ लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन डील करने के लिए गए , वहाँ डील रिजेक्ट हो गयी , और उस दिन गूगल बिकते बिकते रह गयी ।
फिर दोनों दोस्त जो की पढ़ाई बाधित होने की वजह से गूगल को बेचना चाहते थे , उन्होंने ये निर्णय लिया की क्यों ना टेक्नोलॉजी को एक्स्प्लोर किया जाए । और आज गूगल में प्रति सेकंड पूरी दुनिया में ६० हजार - १ लाख ३० हजार बार तक सर्च किया जाता है , क्यूंकि गूगल हमारी जरूरत बन चुकी है , जैसे लोगो में चाय का नशा होता है , वैसे ही नशा गूगल और you - tube का है लोगो में ।
( यह ध्यान देने योग्य एक बात यह है की आज जो हम एंड्राइड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अपने स्मार्टफोन के जरिये कर रहे है वो गूगल की ही देन है , और नोकिआ (nokia ) जोकि एक समय दुनिया पर राज कर रहा था अपनी विंडोज टेक्नोलॉजी के साथ उसके बर्बाद होने के पीछे की वजह यही थी उन्होंने अपनी टेक्नोलॉजी को आज के समय की मांग के अनुसार अपग्रेड नहीं किया ,मतलब वो यही सोचते थे की वो विंडोज टेक्नोलॉजी के साथ ही अपने स्मार्टफोन बेचते रहेंगे , और शयद यही गूगल चाहता था , या अंदर की बात कुछ और रही हो इस बारे में मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूँ, लेकिन इसका पूरा फायदा गूगल को मिला , क्यूंकि सारी एशियाई मार्किट पर एंड्राइड टेक्नोलॉजी के स्मार्टफोन ने अपनी पकड़ बनानी चालू कर दी थी ,और शायद नोकिआ के पतन का यही कारण था।)

गूगल यही नहीं रुका , उसने २००६ में १.६५ बिलियन $ में यू- tube को खरीदा तो कई लोगो ने गूगल की बहुत आलोचना की थी, लेकिन आज you -tube भी लोगो की जरूरत बन चुकी है , अब आप बिलकुल भी ताजुब ना करियेगा की आज you - tube को पूरी दुनिया में हर महीने लगभग ६ अरब घंटो तक देखा जाता है , अब आप खुद अंदाजा लगा सकते है you -tube की एडिक्शन का .
जब ये सब कुछ हो रहा था , उसी समय गूगल ने अपना एडसेन्स जिसे गूगल एडसेन्स या गूगल एडवर्डस भी कहते है , विकसित कर लिया था , जिसकी मदद से एक विज्ञापनदाता गूगल एडवर्डस के जरिये अपने विज्ञापन प्रसारित करती है जिसको हम अलग - अलग websites , ऍप्लिकेशन्स , ब्लोग्स , आर्टिकल्स में देख सकते है , आज अगर हम कुछ भी इंटरनेट पर देखते है तो उसके पीछे एक बहुत बड़ा विज्ञापन का जंगल राज चल रहा है , जिसपर पूरा कब्ज़ा गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों का है ,
आपको याद होगा बचपन में जब हम लोग रात में दूरदर्शन में पिक्चर फिल्म देखते थे तो १०-१० मिनट तक केवल विज्ञापन आते रहते थे , चूँकि चैनल एक ही होता था , और हमारे पास उसको बदलने का ऑप्शन भी नहीं था , इसलिए मजबूरी में हम वो सारे विज्ञापन देखते थे , लेकिन आज सब कुछ बदल चूका है , विज्ञापन हम आज भी देखते है , बस उनको देखने का तरीका बदल गया है , आज हम टीवी , न्यूज़ चैनल्स पर जो विज्ञापन देखते है वो तो देखते ही है , अब तो हैरत की बात यह है की टिक -टॉक पर भी कम्पनिया अपने विज्ञापन चलने लगी है , मुझे परेशानी विज्ञापन से नहीं , बल्कि इन बाहरी कंपनियों से है जो हमारे देश से विज्ञापन लेकर हमारे ही देश के टैलेंट के द्वारा हमको दिखाया जाता है ,बदले में उसका ३२ % गूगल लेकर चली जाती है अमेरिका ।
२०१८ के Q 1 रिपोर्ट के अनुसार गूगल की कमाई ३१ बिलियन $ थी मतलब सालना आय तकरीबन १२० बिलियन $ थी , जिसमे के वो भारत से ही ८००० CRORE सालाना लेकर जाती है ,

अब सवाल ये है की क्या वाकई गूगल हमारी निजता पर प्रहार करती है ?

वैसे तो गूगल की अल्गोरिथम कोई क्रैक नहीं कर सकता है , क्यूंकि इनकी टीम हर ६ महीने में अपनी अलगो बदल देते है , लेकिन इस जटिल चीज को मैं आपको एक उद्हारण देकर समझाता हूँ , मान लीजिये आपको एक ऑनलाइन मोबाइल खरीदना है , और आपके पास १० हजार रूपये है , फिर आप गूगल खोलते है , उसमे सर्च करते है 4G मोबाइल १० हजार की रेंज में , या एंड्राइड मोबाइल १० हजार की रेंज में , फिर आपके अलग अलग कम्पनियों के रिजल्ट आ जाते है , फिर आप उनको देखते है , मन हुआ तो तुरंत खरीद लेते है , अगर मन नहीं हुआ तो TAB काट कर बाहरआ जाते है , फिर उसके बाद सुरु होता है गूगल का खेल , क्यूंकि अब गूगल जान गया है की हमे क्या पसंद है , हमने क्या चीज सर्च किया , फिर हम नेट पर कुछ भी सर्च करे गूगल उसी फ़ोन के विज्ञापन या उससे सम्बंधित फ़ोन के विज्ञापन हमे दिखाना चालू करती है , और ये विज्ञापन हमे तब तक दिखाया जाता है जब तक हम उसको खरीद नहीं लेते है । अगर आपको मेरी बात पर विश्वास न हो तो कुछ सर्च करियेगा फिर आधे घंटे बाद जब आप गूगल पर कोई भी वेबसाइट खोलेंगे तो वही विज्ञापन आपको आने स्टार्ट हो जाएंगे । हममे से अधिकाँश लोगो को लगता है की सर्च हिस्ट्री डिलीट करने से सब कुछ डिलीट हो जाता है , तो ये आपकी गलत फहमी है , आप सर्च हिस्ट्री भी डिलीट करके देखिएगा , लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं है ।

चीन और रूस के अनुसार गूगल केवल सर्च इंजन न होकर , बल्कि अपनी अमेरिकी सरकार के लिए जासूसी भी करता है , वो सब जानता है की हम इंटरनेट पर क्या क्या देखते है , क्या क्या हमे पसंद है , क्या हमे नहीं पसंद है , ये सारा डाटा उसके पास , शयद इसीलिए ईरान सरकार ने भी गूगल पर प्रतिबन्ध लगा दिया था , चीन और रूस तो पहले ही लगा चुके है , मैं भारत सरकार से केवल इतना गुजारिश करना चाहता हूँ , जब हमारे देश में खुद इतना टैलेंट है तो हम क्यों निर्भर है गूगल और फेसबुक या YOU - TUBE जैसी कंपनियों पर । हमे ऐसी टेक्नोलॉजी बल्कि इससे अच्छी टेक्नोलॉजी खुद विकसित करना चाहिए , याद रखिये तीसरा विश्व युद्ध हथियारों से नहीं बल्कि विचारों से लड़ा जाएगा ।

अंत में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए माफ़ करियेगा , लेकिन इस लेख के माध्यम मैं ३ बातें समझाना चाहता हूँ ,
१- जब हम हिन्दू मुस्लिम कर रहे थे तब अमेरिका टेक्नॉलजी को विकसित करने में लगा हुआ था
२- हमारी निजता पर प्रहार किया जा रहा है ,
३- हम खुद ही अपनी अर्थव्यस्था को कमजोर कर रहे है

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