04/05/2020
अल्लाह तआला ने कुरआन में फरमाया कि अल्लाह उन लोगों का दोस्त है, जो ईमान वाले हैं, ईमान वाले अर्थात् जो लोगों को बुराइयों से निकाल कर नूर व रोशनी और अच्छाइयों की तरफ लाते हैं और जो लोग इसके विपरीत हैं और ईमान के नूर से घसीट कर अंधेरियों यानि बुराइयों की तरफ ढकेलते हैं, शैतान के दोस्त हैं। इन विचारों को व्यक्त करतें हुए काजी ए शहर हजरत मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा कासमी अध्यक्ष जमीअत उलमा उत्तर प्रदेश ने फरमाया कि अगर ग्यारह महीने शैतान की दोस्ती का रहा तो रमज़ान का यह मुबारक महीना अल्लाह से तौबा करके अल्लाह और रसूल स0अ0व0 और कुरआन से दोस्ती का महीना आया है। इस महीने में बड़े बड़े शैतान कै़द कर दिए गये हैं और पूरा माहौल ईमानी बना दिया गया है। इस माहे मुबारक के दस क़ीमती दिन गुज़र गये, दूसरा अशरह मगफिरत का अशरह शुरू हो चुका है इस में हम जायज़ा लेते रहें कि हमने कितनी नेकियां कमाईं , कमाई भी या नहीं या उल्टे गंवाईं तो नहीं ? साथ ही पूरे रोजें रखें, रात को 20 रकअत तरावीह पढ़ने के साथ ही अच्छे काम करें और अपने उन भाइयों को भी जो दिन भर घर में रहते हुये भी रोज़ा नहीं रख रहे , तरावीह नहीं पढ़ रहे , उनको प्यार से समझाऐं और मुहब्बत से उनको नूर की तरफ यानि रोज़े, नमाज, तरावीह और माहे रमजान के अदब की तरफ लेकर आएं ताकि आप भी अल्लाह के दोस्त बन जायं और वह भी अल्लाह के दोस्त बन जाएं। काजी ए शहर मौलाना उसामा कासमी ने कहा कि यह महीना पूरा पूरा मिला ही है अल्लाह का खास दोस्त बनने और अपनी कमियों से माफी मांगने का, इस पर ध्यान देकर अल्लाह, नबी और कुरआन वाले बन जाएं। जहन्नम वाले शैतान वाले ना बनें यह बहुत घाटे की चीज है। मौलाना ने फरमाया कि यह महीमना सब्र का महीना है और इस वक्त़ लाकडाउन की वजह से हमारे सब्र का इम्तेहान है इस लिये पूरे सब्र और शुक्र के साथ लाकडाउन के नियमों का मानते हुये अपना वक़्त गुज़ारें।