31/05/2026
धागों से चलती कठपुतलियां केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध लोकसंस्कृति, लोकनाट्य और परंपराओं की जीवंत पहचान हैं। भोजपुरी अंचल की यह अनमोल कला लोककथाओं, भावनाओं और सामाजिक संदेशों को सरल एवं आकर्षक ढंग से जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करती रही है।
आज आवश्यकता है कि हम अपनी इस पारंपरिक लोककला को संरक्षित करें और नई पीढ़ी तक इसकी सांस्कृतिक विरासत को पहुंचाएं।