हे ! भारतवासियो आप श्री राम और श्री कृष्ण के वंशज हो , धर्म की पताका को सदैव गौरवान्वित करने वाले मर्यादापुरुषोत्तम और योगिराज के वंशज हो |
मित्रो आप जानते ही है की मुस्लिम फ़कीर साईं के अधिकतर भक्त ऐसे है जो किसी को देख कर, सुनकर, अपने मित्रो से जान कर, ये किसी जागरण में जा कर ही साईं के भक्त बने है, यदि किसी से पूछेंगे की साईं कौन है? क्या अच्छा किया था उसने?? तो आपको सभी के मुहं से अलग अलग बात
सुनने को मिलेगी,
केवल कुछ वर्ष पहले जिस मुस्लिम फ़कीर साईं को गिनती भर के लोग जानते थे, आज वो मुस्लिम साईं आखिर अचानक से कैसे पहले साईं नाथ बना फिर साईं राम बना और आज हर सनातनी देवी देवता से ऊपर साईं को बिठाया जा रहा है,
साफ़ है की सनातन धर्म में इस मुस्लिम को घुसा कर सनातन धर्म को नष्ट भ्रष्ट करने का एक षड्यंत्र चल रहा है,
सबसे हैरानी की बात ये है की साईं भक्त इस पर कुछ बोलना सुनना तो क्या, समझना भी नहीं चाहते|
एक मुस्लिम फ़कीर जिसका स्वतन्त्रता अंढोलन मे कोई योगदान नहीं , धर्म की रक्षा मे कोई योगदान नहीं , जीवो पर दया नहीं साथ ही तामसिक प्रवृतियों माँस-मादक पदार्थो के सेवन मे लिप्त था कुछ स्वार्थी लोगो ने अपने स्वार्थवश आज परमेश्वर से भी उचे स्थान पर बैठा दिया है |ऐसा व्यक्ति वेदो और शास्त्रो मे वर्णित गुण-कर्म-योग्यता के अनुसार ईश्वर और गुरु की तो बात ही छोड़िए , एक अच्छा मनुष्य नहीं हो सकता है |
हमारा लक्ष्य देश मे धर्म के नाम से फैले हुए अंधविश्वास और पाखण्ड से भारतीय जन-मानस को अवगत करना है , साथ ही समूल पाखण्ड -अंधविश्वास का समाज से अन्त करना भी है |
वैदिक सनातन धर्म का आधार मात्र वेद और शास्त्र है कोई मुस्लिम फ़कीर तथाकथित साई बाबा नहीं | जो कार्य वेद और शास्त्रो के अनुसार होते है वह धर्म है अन्यथा वह कार्य अधर्म की श्रेणी मे आता है | वर्तमान समय मे व्यक्ति धर्म से विमुख हो कर भय-लोभ वश अनेक प्रकार के मुस्लिम फ़कीर-बाबाओ और पिरो की दरगाह पर माथा टेक रहे है और वैदिक सनातन धर्म को दूषित कर रहे है |
वैदिक सनातन धर्म को सदैव के लिए समाप्त करने के लिए नाना-प्रकार के षड्यंत्र रचे जा रहे है | किन्तु जैसे-जैसे भारतीय जन-मानस इन मुस्लिम फ़कीर बाबाओ के षड्यंत्र को समझने लगेगा स्वयं ही इस सत्य को जान जाएग और इनके वैदिक सनातन धर्म को समाप्त करने के सभी प्रयास स्वतः ही विफल हो जाएंगे |
सक्ताः कर्मन्याविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत।
कुर्याद्विद्वांस्तथासक्त्श्रीच्किर्षुर्लोक्संग्रहम्।।
अर्थ--- जिस प्रकार अज्ञानी-जन फल की आसक्ति से कार्य करते हैं, उसी तरह विद्वान जनों को चाहिए कि वे लोगों को उचित पथ पर ले जाने के लिए अनासक्त रहकर कार्य करें।।
उदाहरण-- जो लोग आँख बंद कर के किसी भी बाबा या पीर फ़क़ीर की मजार को भगवान का स्थान देते हैं उन्हें ये सोचना चाहिए की परमात्मा तो एक है। सबके भाग्य वही निर्धारित करते हैं मतलब उस बाबा या फ़क़ीर का भाग्य निर्धारण भी भगवान ही किये होंगे या करेंगे तो फिर हमारे भाग्य या कल्याण ये बाबा या पीर कैसे निर्धारित कर सकते हैं। इसलिए सही रास्ता चुनें और सही कर्म करें फिर देखिये बिना बाबा के दर्शन किये आपके कार्य पूरे होंगे।
जय श्री राम
धर्म की जय हो और अधर्म का नाश हो |
We Are Here To Expose the Jihadi Culprit Shirdi Sai Baba