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राजा जनक का जन्म" मृत शरीर से कैसे हुआ ? जानिए रामायण का शास्त्रसम्मत सत्य रामायण में​ माता सीता के पिता कहे जाने वाले, ...
15/06/2026

राजा जनक का जन्म" मृत शरीर से कैसे हुआ ? जानिए रामायण का शास्त्रसम्मत सत्य

रामायण में​ माता सीता के पिता कहे जाने वाले, परम ज्ञानी राजा जनक को सभी जानते हैं।लेकिन उनके जन्म के बारे में नहीं ।

वे अपनी मां के गर्भ से पैदा ही नहीं हुए थे? उनका जन्म एक 'लाश' (मृत शरीर) के मंथन से हुआ था! अध्यात्म और विज्ञान को हिलाकर रख देने वाली यह घटना इतिहास का वो पन्ना है, जिसे आम तौर पर लोग नहीं जानते।

आखिर एक मृत देह से एक जीवित बालक कैसे प्रकट हो गया? क्या यह कोई प्राचीन क्लोनिंग थी या देवताओं का कोई भयंकर चमत्कार? आइए जानते हैं शास्त्रों में छुपा वो सच ।

​शास्त्रसम्मत प्रमाण (कहाँ लिखा है ये सच?)

​इंटरनेट की अफवाहों पर यकीन न करें, इस अद्भुत कथा का प्रामाणिक उल्लेख सनातन धर्म के इन पावन ग्रंथों में मिलता है:
​ग्रंथ का नाम: श्रीमद्भागवत महापुराण

​स्कंध और अध्याय: नवम स्कंध (9th Canto), अध्याय 13 (9th Chapter)
​श्लोक संख्या: श्लोक 1 से 13 (विशेषकर श्लोक 11 और 12)
​अन्य संदर्भ: वाल्मीकि रामायण (बालकांड) और विष्णु पुराण।

सम्पूर्ण कथा:
​यह कहानी शुरू होती है राजा जनक के पूर्वज राजा निमि से। राजा निमि बहुत ही धार्मिक और प्रतापी राजा थे।

एक बार उन्होंने एक विशाल यज्ञ का आयोजन करने का निर्णय लिया और ऋषि वसिष्ठ को मुख्य पुरोहित बनने का निमंत्रण दिया।

लेकिन ऋषि वसिष्ठ पहले से ही इंद्रदेव के एक यज्ञ में व्यस्त थे, इसलिए उन्होंने राजा निमि से कुछ समय इंतजार करने को कहा।

​राजा निमि समय गंवाना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने ऋषि गौतम और अन्य ऋषियों की देखरेख में यज्ञ शुरू करवा दिया।

जब महर्षि वसिष्ठ वापस लौटे और देखा कि यज्ञ उनकी अनुपस्थिति में ही शुरू हो चुका है, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए।

क्रोध के वश में आकर उन्होंने राजा निमि को श्राप दे दिया कि "तुम्हारा शरीर चेतनाशून्य (मृत) हो जाए।"

राजा निमि ने भी अनजाने में मिले इस श्राप के बदले महर्षि वसिष्ठ को वैसा ही श्राप दे दिया। इस तरह दोनों के भौतिक शरीर समाप्त हो गए।

​जब यज्ञ समाप्त हुआ, तो देवताओं ने प्रसन्न होकर राजा निमि की आत्मा से कहा कि वे चाहें तो पुनः जीवित हो सकते हैं।
लेकिन परम ज्ञानी राजा निमि ने दोबारा किसी गर्भ से जन्म लेने और शरीर के बंधनों में बंधने से साफ इंकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि वे देवताओं की पलकों में (निमेष रूप में) वास करना चाहते हैं। |

​अब ऋषियों के सामने एक भयंकर संकट खड़ा हो गया! राजा निमि की कोई संतान नहीं थी। बिना राजा के प्रजा अनाथ हो जाती और राज्य में अराजकता फैल जाती।

तब ऋषियों ने एक अभूतपूर्व और रहस्यमयी निर्णय लिया। उन्होंने राजा निमि के 'मृत शरीर' (शव) को सुरक्षित रखा और अरणी (मंथन की लकड़ियों) की तरह उस मृत देह का मंथन (Churning) करना शुरू किया। (

​ऋषियों के मंत्रबल, तपोबल और तीव्र मंथन के प्रभाव से उस मृत शरीर से एक परम तेजस्वी बालक प्रकट हुआ!
क्योंकि यह बालक एक मृत शरीर के मंथन (मथने) से पैदा हुआ था, इसलिए इसका नाम 'मिथिल' पड़ा (जिससे मिथिला नगरी बनी)।

राजा के मृत शरीर से पैदा होने के कारण इन्हें 'जनक' (पिता के बिना जन्म लेने वाला या स्वयं उत्पन्न) कहा गया, और देह के विदेह (बिना चेतना के शरीर) होने की स्थिति में जन्म लेने के कारण इन्हें 'विदेह' भी कहा गया।
​💡 निष्कर्ष

​सनातन धर्म का हर पन्ना चमत्कारों और गूढ़ विज्ञान से भरा हुआ है। एम
राजा जनक का एक मृत शरीर से उत्पन्न होना यह साबित करता है कि प्राचीन काल में हमारे ऋषियों के पास ऐसी विद्याएं और मंत्रबल था,

जो मृत कोशिकाओं (Cells) को भी पुनर्जीवित कर एक नए जीवन को आकार दे सकता था। 
यह कथा हमें सिखाती है कि प्रकृति के नियम सामान्य मनुष्यों के लिए हो सकते हे

​अगर आपको सनातन धर्म का यह अनसुना रहस्य पसंद आया हो, तो अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर दें:

सोचिए और खुद फैसला करे
08/06/2026

सोचिए और खुद फैसला करे

“Coffin Birth” या “Postmortem Fetal Extrusion” एक बहुत ही दुर्लभ जैविक प्रक्रिया है, जिसमें गर्भवती महिला की मृत्यु के ब...
12/05/2026

“Coffin Birth” या “Postmortem Fetal Extrusion” एक बहुत ही दुर्लभ जैविक प्रक्रिया है, जिसमें गर्भवती महिला की मृत्यु के बाद शरीर में decomposition (विघटन) के दौरान बनने वाली गैसें गर्भाशय पर दबाव डाल सकती हैं। इस दबाव के कारण भ्रूण आंशिक या पूर्ण रूप से शरीर से बाहर की ओर आ सकता है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कोई “सामान्य प्रसव” नहीं होता और न ही इसका मतलब यह है कि महिला मृत्यु के बाद जीवित बच्चे को जन्म देती है। यह केवल शरीर के विघटन के दौरान होने वाली एक पोस्टमॉर्टम घटना है। आधुनिक समय में, शव संरक्षण (embalming), अस्पतालों और चिकित्सा प्रक्रियाओं के कारण यह घटना अत्यंत दुर्लभ हो गई है।

ऐतिहासिक और फॉरेंसिक साहित्य में इस घटना का उल्लेख मिलता है। इसे वैज्ञानिक रूप से मान्यता प्राप्त है, लेकिन यह बहुत कम मामलों में दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर इसे अक्सर सनसनीखेज अंदाज़ में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे लोगों को लगता है कि मृत्यु के बाद भी सामान्य प्रसव संभव है, जबकि ऐसा नहीं है।

सीधी बात—“Coffin Birth” एक वास्तविक लेकिन अत्यंत दुर्लभ फॉरेंसिक घटना है, जिसमें मृत्यु के बाद शरीर में बनने वाली गैसों के कारण भ्रूण बाहर आ सकता है। इसे सामान्य प्रसव या चमत्कार समझना गलत होगा।

 #अगर औरत खुश नहीं तो वजह एक चीज जरूर होती है..🌹🌹🌹🌹🌹🌺🔥🔥🔥🔥"औरत की खुशी" - ये शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में साड़ी, गहने, घ...
08/05/2026

#अगर औरत खुश नहीं तो वजह एक चीज जरूर होती है..🌹🌹🌹🌹🌹🌺🔥🔥🔥🔥

"औरत की खुशी" - ये शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में साड़ी, गहने, घर, बच्चे, शॉपिंग जैसी तस्वीरें आती हैं। समाज ने मान लिया है कि औरत को खुश करने के लिए बस सुविधाएं दे दो, जिम्मेदारी निभा दो, तो वो संतुष्ट हो जाएगी। मगर हकीकत इससे बहुत अलग है।

अगर एक औरत अपने रिश्ते में, अपने घर में खुश नहीं है, तो 90% बार वजह सिर्फ एक चीज होती है:...भावनात्मक उपेक्षा - Emotional Neglect

पैसा, मकान, गाड़ी, स्टेटस - ये सब होने के बाद भी अगर औरत के चेहरे पर वो सुकून वाली मुस्कान नहीं है, तो समझ लीजिए उसे वो चीज नहीं मिल रही जो उसके लिए सबसे जरूरी है: *महसूस कराया जाना*

1. सुना जाना vs सुन लिया जाना
मर्द अक्सर सोचते हैं कि बीवी ने समस्या बताई तो तुरंत समाधान देना चाहिए। वो सलाह देने लगते हैं, तर्क देने लगते हैं। मगर औरत को उस वक्त समाधान नहीं चाहिए होता। उसे चाहिए होता है कि कोई उसे बिना जज किए, बिना बीच में टोके, बस सुन ले।

जब वो ऑफिस की, सास की, बच्चों की बात बताती है तो वो चाहती है कि आप फोन साइड में रखकर आंखों में देखकर कहें "हां, मैं समझ रहा हूं। ये सच में मुश्किल होगा तुम्हारे लिए।"

ज्यादातर रिश्तों में होता ये है कि मर्द सुनता है जवाब देने के लिए, समझने के लिए नहीं। और यहीं से औरत अकेला महसूस करने लगती है। भीड़ में होते हुए भी अकेली।

2. छोटी-छोटी चीजों में नजरअंदाज होना
औरतें बड़ी चीजें नहीं मांगती। उन्हें वो 50 लाख का बंगला याद नहीं रहता जो आपने उसके नाम किया। उन्हें याद रहता है वो दिन जब बुखार में आपने बिना कहे अदरक वाली चाय बना दी थी।

उन्हें याद रहता है कि आपने नोटिस किया कि आज उसने नई ईयररिंग पहनी है। याद रहता है कि आपने सबके सामने उसका मजाक नहीं उड़ने दिया।

भावनात्मक उपेक्षा तब शुरू होती है जब आप उसकी "छोटी" बातों को छोटा समझने लगते हैं। "अरे इसमें परेशान होने की क्या बात है", "तुम ज्यादा सोचती हो", "हर बात का इश्यू बना देती हो" - ये 3 वाक्य किसी भी औरत के दिल से आप को मीलों दूर कर देते हैं।

क्योंकि जब आप उसकी फीलिंग को खारिज करते हैं, तो असल में आप _उसे_ खारिज कर रहे होते हैं।

3. सराहना की भूख, साथ की प्यास
शादी के 2 साल बाद मर्द ये मान लेते हैं कि "अब तो सब सेट है, रोज-रोज क्या थैंक यू बोलूं।" मगर औरत के लिए रिश्ता कभी "सेट" नहीं होता। उसे रोज सींचना पड़ता है।

वो सुबह 6 बजे उठकर टिफिन बनाती है, घर संभालती है, ऑफिस जाती है, बच्चों को पढ़ाती है, रात को सबके सोने के बाद किचन समेटती है। और बदले में उसे चाहिए होता है सिर्फ 2 शब्द: "तुम करती बहुत हो"।

जब महीनों तक कोई उसकी मेहनत को देखता तक नहीं, सराहना तो दूर की बात, तब वो अंदर से टूटने लगती है। फिर वो चिड़चिड़ी लगने लगती है, बात-बात पर गुस्सा करने लगती है। लोग कहते हैं "नखरे कर रही है"। असल में वो नखरे नहीं, _भावनात्मक भूख_ की निशानी है।

4.शारीरिक नजदीकी से पहले भावनात्मक नजदीकी
ये सबसे ज्यादा गलत समझा जाने वाला पॉइंट है। मर्द सोचते हैं कि फिजिकल रिलेशन से औरत खुश हो जाएगी। मगर औरत के लिए सीक्वेंस उल्टा है।

पहले वो भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करना चाहती है, जुड़ी हुई महसूस करना चाहती है, सम्मानित महसूस करना चाहती है। जब दिनभर आपने उसे इग्नोर किया, उसकी बात काटी, ताना मारा, और रात को नजदीकी चाहते हैं, तो उसके लिए वो प्यार नहीं "इस्तेमाल" जैसा लगता है।

इसी वजह से वो धीरे-धीरे दूर होने लगती है। और मर्द को लगता है "पता नहीं इसे क्या हो गया है।"

✅समाधान कोई रॉकेट साइंस नहीं है। बस 3 चीजें याद रखनी हैं:

A. मौजूद रहो - Present Raho:* जब वो बात करे तो फोन नीचे रख दो। आंखों में देखो। हां-हूं करके दिखाओ कि तुम यहीं हो। रोज 15 मिनट की बिना डिस्ट्रैक्शन वाली बातचीत, 2 घंटे के महंगे डिनर से ज्यादा कीमती है।

B. मान दो - Validate Karo:* उसकी फीलिंग को गलत मत ठहराओ। अगर वो दुखी है तो "इसमें दुखी होने की क्या बात" मत कहो। बोलो "हां, तुम्हारी जगह मैं होता तो मुझे भी बुरा लगता।" बस इतना सा मान देना उसे पूरी दुनिया दे देता है।

C. जताओ - Express Karo:* "प्यार तो है ही, बोलने की क्या जरूरत" - ये सबसे बड़ा झूठ है जो मर्द खुद से बोलते हैं। जरूरत है। हर रोज है। थैंक यू बोलो। सॉरी बोलो। तारीफ करो। हाथ पकड़ो। माथा चूमो। ये फ्री की चीजें हैं, मगर इनकी कीमत करोड़ों की है।

आखिर में एक बात: औरत कोई पहेली नहीं है। वो भी इंसान है। उसे भी वही चाहिए जो आपको चाहिए - इज्जत, प्यार, और ये एहसास कि वो आपके लिए महत्वपूर्ण है।

फर्क बस इतना है कि मर्द ये चीजें मांग लेता है, औरत उम्मीद करती है कि आप खुद समझ जाओ। जब आप नहीं समझते, तो वो खामोश हो जाती है। और औरत की खामोशी, उसके गुस्से से हजार गुना ज्यादा खतरनाक होती है।

क्योंकि जब वो बोलना बंद कर दे, समझ लेना वो उम्मीद करना बंद कर चुकी है। और जिस दिन औरत उम्मीद छोड़ दे, उस दिन रिश्ता सिर्फ नाम का रह जाता है।

तो अगर आपकी औरत खुश नहीं है, तो हीरे-जवाहरात बाद में लाना। पहले उसे वक्त दो, तवज्जो दो, एहसास दो कि वो सुनी जा रही है, समझी जा रही है, सराही जा रही है।

क्योंकि औरत की खुशी का सीधा रिश्ता गहनों से नहीं, *भावनात्मक जुड़ाव* से है। और जब ये एक चीज मिल जाए, तो वो झोपड़ी को भी महल बना देती है।
#औरत #ऑर्गेज्म

*लड़का एक पैदा करेंगे,**कोठी 04 बनाएंगे,**फिर**झाडू पौछा औऱ घर में काम वाली बाई रेहाना औऱ नफीसा को रखेंगे**साइकिल, स्कूट...
05/05/2026

*लड़का एक पैदा करेंगे,*
*कोठी 04 बनाएंगे,*
*फिर*
*झाडू पौछा औऱ घर में काम वाली बाई रेहाना औऱ नफीसा को रखेंगे*

*साइकिल, स्कूटर औऱ कार क़ी मरम्मत कल्लन औऱ मुश्ताक से करवायेंगे*

*बाल व दाढ़ी जुम्मन मियाँ से बनवाएंगे*

*दूध रफीक औऱ शफीक से लेंगे*

*कपडे हुसैन और महबूब से सिलवाएंगे*

*नफीस के प्रेस में शादी का कार्ड छपवायेंगे*

*मेहंदी सहनवाज और शान मोहमद से लगाएंगे*

*आजाद का 50 हजार का बैंड बजवाएंगे,*

*मुनव्वर की आतिशबाजी छुड़वाएंगे,*

*बग्गी रईस की करेंगे,*

*टेंट रशीद का करेंगे,*

*बस खालिद भाई की करेंगे,*

*नाई फरीद को बुलाएंगे,*

*फिर अपनी लुगाइयों को आधे कपड़े पहना कर उनके बीच में सड़कों पर ठुमके लगवाएंगे,*

*फिर दारू पीकर 100,200, 500, 2000 हजार रू० के नोट बरसाएंगे,*

*Social Media पर जिहाद जिहाद चिल्लाएंगे, बढ़ती मुस्लिम आबादी का शोर मचाएंगे,*

*बन्द करो यह फालतू का रोना धोना,अगर हिंदुत्व की वास्तव में चिंता करते हो तो यह प्रतिज्ञा करो कि हिन्दू विरोधी को आज से कोई भी आर्थिक लाभ नहीं देंगे,*

*जब किसी मुस्लिम फकीर के पास न जमीन है न नौकरी फिर वह कैसे 14 बच्चे पाल रहा है क्योंकि तुम रोज उसकी झोली में 50 किलो आटा भर देते हो, इस आटे को खाकर ही वह 14 बच्चे बनाता है व रोज गाय का मांस लाता है*
*मुस्लिम आबादी का 05% प्रतिशत भाग फकीरों का है यानि देश में एक करोड़ जिहादियों की आबादी हमारे दिए आटे से पल व बढ़ रही है।*

*कल से इन जिहादियों को केवल भीख देनी ही बन्द करके देख लो न आबादी बढ़ा पाएंगे न जिहाद चला पाएंगे*

*देश की दुर्दशा का प्रमुख घटक खुद हिंदू है*

*मकान बनाओगे कलीम से*
*प्लंबर होगा अनीश*
*इलेक्ट्रीशियन होगा फारुख*
*कारपेंटर होगा सलीम*
*अगर ऐसे ही इन जिहादियों को रोजगार देते रहोगे तो कुछ वर्षों के बाद सिवाय हाथ मलने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।*

*जागो हिन्दू जागो*
*अभी नहीं तो फिर कभी नहीं*🌺🌺🙏🏻

लंदन के बस चालक का जवाब सुनिए... रोचक लेकिन सच्ची घटना*

*एक अरब मुस्लिम लन्दन में एक बस में चढ़ा और उसने बस चालक से अनुरोध किया कि "बस में बज रहे पाश्चात्य संगीत (Western Music) को तत्काल बन्द कर दे।"*

*बस चालक ने इसका कारण पूछा तो अरब मुस्लिम ने कहा कि "इस्लाम की शिक्षा के अनुसार संगीत सुनना हराम है क्यूँ कि प्यारे नबी के समय संगीत नहीं था और विशेष रूप से पाश्चात्य संगीत।"*

*बस चालक ने विनम्रतापूर्वक रेडियो बन्द कर दिया!*

*बस का दरवाज़ा खोला और अरब मुस्लिम को बस से नीचे उतर जाने का निवेदन किया!*

*अरब मुस्लिम ने इसका कारण पूछा।*

*बस चालक ने विनम्रता से उत्तर दिया - "हे अरबी भाई! प्यारे नबी के समय कोई टेक्सी नहीं थी, कोई बस नहीं थी, कोई बम नहीं थे, हवाई जहाजों का अपहरण करने वाले नहीं थे, मस्जिद में शोरगुल मचाने वाले लाउडस्पीकर नहीं थे, कोई आत्मघाती हमले नहीं होते थे, आर डी एक्स नहीं था, AK 47 नहीं थी, सर्वत्र केवल शान्ति थी।*

*इस्लामियत के नाम पर दोहरी चाल कहीं और जाकर चलाओ। चुपचाप नीचे उतर जाओ और गंतव्य तक पहुँचने के लिए ऊँट का इन्तजार करो.*..!!...

*🙏आज लिखना मेरी मजबूरी है,और पढ़ना व समझना आपकी🙏*

*नानक से पहले कोई सिक्ख नहीं था!*

जीसस से पहले कोई ईसाई नहीं था!

*मुहम्मद से पहले कोई मुसलमान नहीं था!*

ऋषभदेव से पहले कोई जैनी नहीं था!

*बुद्घ से पहले कोई बौद्ध नहीं था!*

कार्ल मार्क्स से पहले कोई वामपंथी नहीं था!

लेकिन :
*कृष्ण* से पहले *राम...*
*राम* से पहले *जमदग्नि...*
*जमदग्नि* से पहले *अत्री...*
*अत्री* से पहले *अगस्त्य ...*
*अगस्त्य से पहले पतंजलि...*
*पतंजलि* से पहले *कणाद...*.
*कणाद* से पहले *याज्ञवल्क्य...*.
*याज्ञवलक्य* से पहले...
सभी *"सनातन वैदिक"* धर्मी थे..!

*"राजनीतिक शतरंज" की इन -"11चालों" को, ध्यान से -"देखें और समझें" ....?*

*01*.
*"मुगल," "भारतीय" बन गए...? और, "भारतीय" "काफ़िर"..*

*02*.
"मोमिन" "कश्मीरी" बन गए... ?
और, "कश्मीरी पंडित", "शरणार्थी"....?

*03*.
"बांग्लादेशी"- "बंगाली" बन गये....?
और, "बंगाली", "बाहरी हिन्दू" .....?

*04*.
"सैनिको" के "हत्यारे" और
"पत्थर बरसाने वाले"....
"आंदोलनकारी" बन गए.....? और,"सेना",
"मानवाधिकार उल्लंघनकारी"....?

*05*.
*"टुकड़े- टुकड़े गैंग", "देशभक्त" बन गया...?*
और, "देशभक्त",
"ब्रांडेड कट्टर अतिवादी ......?*

*06*.
"चिता की लकड़ी",
"पर्यावरणीय चिंता" बन गई.....
और, "दफनाने" में "बर्बाद होने वाली भूमि",
"जन्मसिद्ध अधिकार" हो गई.....?

*07*.
"राखी" में इस्तेमाल किया गये
-"ऊन" से, "भेड़" को "चोट" पहुंची..? और
* "बकरीद" में -"हजारों बकरियों" का "कत्ल",
"धार्मिक स्वतंत्रता" बन गया....?*

*08*.
"तुष्टिकरण", "धर्मनिरपेक्ष" हो गया.....?
जबकि, "समानता", "कम्यूनल" हो गई....?

*9*.
"आरएसएस", "आतंकवादी" बन गया...?
और, "ओसामा जी"..., "हाफिज साहेब"..., और -"हुर्रियत",
"शांति के शिखर"......

*10*.
*“भारत माता की जय”*,
"सांप्रदायिक" हो गया....?" और,
“भारत तेरे टुकडे होंगे,”
*"फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन हो गया....?"*

*11*.“फूट डालो राज करो,” “नियम” बन गया.... ?
और...
*“सबका साथ सबका विकास” "जुमला"...?*

ज़रा "सोचो"...?

और "समझो"... कि

*"आखिर" एक - "हिन्दू बहुल देश" में ....,*
"ये सब" हुआ कैसे...???

सिर्फ पढ़ोगे ?
या फारवर्ड भी करोगे ?
नहीं ना???

मुझे पता था

*"हिन्दू" जो "ठहरे"...?*!!!

ऐसे ही सोए रहे .....?
तो - पता भी नही चलेगा..?,
"कब"...
"आतंकी" देश के "नागरिक" बन गए...?

*" हिंदू" होने के नाते, मेरी -"आप" से "विनती" है, कि कम से कम "10 लोग", अथवा -"ग्रुप" में अवश्य भेजिए।*

यह अथक प्रयास से सारी जानकारी को इकट्ठा किया गया है। इसे अपने तक ना रखे सभी हिन्दू भाइयो के व्हाट्सएप के ग्रुप तक पहुचाने में उंगलियों को काम पर लगाए।

यह संदेश आगे सभी सनातनी
हिन्दुओं को जरूर शेयर करें। 🚩🙏🏼
*जय श्रीराम* 🚩🚩🕉️. . .

!!बिना स्तन कोई स्त्री की कल्पना व्यर्थ है..!!*******स्त्री के स्तनों से जुड़ा होता है स्त्री का सारा व्यक्तित्व । जब तक ...
03/05/2026

!!बिना स्तन कोई स्त्री की कल्पना व्यर्थ है..!!
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स्त्री के स्तनों से जुड़ा होता है स्त्री का सारा व्यक्तित्व । जब तक स्त्री माँ नही बन जाती तब तक उसकी ऊर्जा पूर्णतः स्तनों तक नही पहुँचती..!!

शरीर शास्त्री ये प्रश्न उठाते रहते है। कि पुरूष के शरीर में स्तन क्यों होते है। जब कि उनकी कोई आवश्यकता नहीं दिखाई देती है। क्योंकि पुरूष को बच्चे को दूध तो पिलाना नहीं है। फिर उनकी क्या आवश्यकता है। वे ऋणात्‍मक ध्रुव है। इसलिए तो पुरूष के मन में स्त्री के स्तनों की और इतना आकर्षण है। वे धनात्‍मक ध्रुव है।

इतने काव्य, साहित्य, चित्र,मूर्तियां सब कुछ स्त्री के स्तनों से जुड़े है। ऐसा लगता है जैस पुरूष को स्त्री के पूरे शरीर की अपेक्षा उसके स्तनों में अधिक रस है। और यह कोई नई बात नहीं है। गुफाओं में मिले प्राचीनतम चित्र भी स्तनों के ही है। स्तन उनमें महत्‍वपूर्ण है। बाकी का सारा शरीर ऐसा मालूम पड़ता है कि जैसे स्तनों के चारों और बनाया गया हो। स्तन आधार भूत है।

क्‍योंकि स्तन उनके धनात्मक ध्रुव है। और जहां तक योनि का प्रश्न है वह करीब-करीब संवेदन रहित है। स्तन उसके सबसे संवेदनशील अंग है। और स्त्री देह की सारी सृजन क्षमता स्तनों के आस-पास है।

यही कारण है कि हिंदू कहते है कि जबतक स्त्री मां नहीं बन जाती, वह तृप्त नहीं होती। पुरूष के लिए यह बात सत्य नहीं है। कोई नहीं कहेगा कि पुरूष जब तक पिता न बन जाए तृप्त नहीं होगा। पिता होना तो मात्र एक संयोग है। कोई पिता हो भी सकता है, नहीं भी हो सकता है। यह कोई बहुत आधारभूत सवाल नहीं है। एक पुरूष बिना पिता बने रह सकता है। और उसका कुछ न खोये।

लेकिन बिना मां बने स्त्री कुछ खो देती है। क्योंकि उसकी पूरी सृजनात्मकता, उसकी पूरी प्रक्रिया तभी जागती है। जब वह मां बन जाती है। जब उसके स्तन उसके अस्तित्व के केंद्र बन जाते है। तब वह पूर्ण होती है। और वह स्तनों तक नहीं पहुंच सकती यदि उसे पुकारने वाला कोई बच्चा न हो।

तो पुरूष स्त्रियों से विवाह करते है ताकि उन्हें पत्नियाँ मिल सके, और स्त्रियां पुरूषों से विवाह करती है ताकि वे मां बन सकें। इसलिए नहीं कि उन्हें पति मिल सके। उनका पूरा का पूरा मौलिक रुझान ही एक बच्चा पाने में है जो उनके स्त्रीत्‍व को पुकारें।

पश्चिम में बच्चों को सीधे स्तन से दूध न पिलाने का फैशन हो गया है। यह बहुत खतरनाक है। क्योंकि इसका अर्थ यह हुआ कि स्त्री कभी अपनी सृजनात्‍मकता के केंद्र पर नहीं पहुंच सकेगी। जब एक पुरूष किसी स्त्री से प्रेम करता है तो वह उसके स्तनों को प्रेम कर सकता है। लेकिन उन्हें मां नहीं कह सकता।
केवल एक छोटा बच्चा ही उन्हें मां कह सकता है।

दीवारें टूट सकती हैं, लेकिन हौसले नहीं।इतिहास गवाह है कि जैसलमेर का 'सोनार किला' सिर्फ पत्थरों से नहीं, बल्कि वीरों के ख...
02/05/2026

दीवारें टूट सकती हैं, लेकिन हौसले नहीं।
इतिहास गवाह है कि जैसलमेर का 'सोनार किला' सिर्फ पत्थरों से नहीं, बल्कि वीरों के खून और पसीने से बना है।
13वीं सदी (1290-1298) का वो दौर, जब अलाउद्दीन खिलजी के अहंकार को जैसलमेर के दरवाजे पर 8 साल तक इंतजार करना पड़ा।

भाटी शासक रावल जैतसी ने दिखा दिया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए समय और संसाधन मायने नहीं रखते, सिर्फ जिगर चाहिए।

जब अन्न का आखिरी दाना भी खत्म हो गया, तब भी किले का दरवाजा दुश्मन के लिए नहीं खुला। यह 8 साल का घेरा भारतीय इतिहास के सबसे कठिन और गौरवशाली अध्यायों में से एक है।

नमन है उन वीरों को जिन्होंने झुकने से बेहतर लड़कर अमर होना चुना।

इतिहास में आखिरी बार, जब पूरा राजपूताना एक झंडे के नीचे था, 1527 ई. में खानवा के युद्ध से पहले राणा सांगा ने 'पाती पेरवन...
02/05/2026

इतिहास में आखिरी बार, जब पूरा राजपूताना एक झंडे के नीचे था, 1527 ई. में खानवा के युद्ध से पहले राणा सांगा ने 'पाती पेरवन' की रस्म निभाई थी।
इसके तहत राजपूताने के 7 राजा, 9 राव और 104 बड़े सरदार अपनी आपसी दुश्मनी भुलाकर एक साथ युद्ध के मैदान में उतरे थे।
इसके बाद इतिहास में कभी भी सारे राजपूत एक साथ नहीं लड़ पाए।"

ब्रह्मचर्य..अर्थात जो संभोगरत अवस्था में भी वीर्य अर्थात पारा को अधोगति अर्थात् पतन की तरफ ना ले जाकर ऊर्ध्वगति की तरफ ल...
01/05/2026

ब्रह्मचर्य..
अर्थात जो संभोगरत अवस्था में भी वीर्य अर्थात पारा को अधोगति अर्थात् पतन की तरफ ना ले जाकर ऊर्ध्वगति की तरफ ले जाए तो, वही गुरु हो जाता है। वही सच्चे अर्थो में ब्रह्मचारी है। यह तभी सम्भव होता है, जब क्रिया होती है परन्तु कर्ता कर्म से सम्बन्धित नहीं होता है। वो उस क्रिया में अनुपस्थित होता है। उपनिषदों में कहा गया है-

"वासनामुदयो भोग्ये वैराग्यस्य तदावधिः"।

जब भोगने योग्य पदार्थ की उपस्थिति में भी वासना उदित ना हो, जब भोग भी वासना रहित हो, तब वैराग्य की स्थिति जानना चाहिए"। ब्रह्मचर्य उस स्थिति का नाम है, जो देह में होते हुए भी देह में नही हैं। जिसकी देहबुद्धि ऊपर उठकर आत्मबुद्धि में रूपान्तरित हो जाये, जो शारीर से ऊपर उठकर आत्मा में रमण करने लग जाये, वो ही सच्चा ब्रह्मचारी है। वीर्य का रक्षण और ऊर्ध्वगमन ही ब्रह्मचर्य की प्रथम स्थिति है। परन्तु वो बलात् नहीं होना चाहिये। वो स्वतः होना आवश्यक है। वीर्य जब पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में नीचे की तरफ यात्रा करता है तो वो अधोगति कहलाती है और जब साधक की साधना के फलस्वरूप जब वीर्य पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से मुक्त होकर ऊर्ध्वगति की तरफ यात्रा करता है । तब ब्रह्मचर्य घटता है। यह सम्भव है, बिलकुल उसी तरह जैसे पानी शून्य तापमान से नीचे जाता है तो गुरुत्वाकर्षण का बल पाकर ठोस बर्फ बन जाता है पर जब पानी गरम होता है और तापमान शून्य से ऊपर उठता है तो भाप बनकर ऊपर की तरफ उठने लगता है। तब वो गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से मुक्त हो जाता है। जिस तरह पानी की नीचे की यात्रा उसे ठोस बनाती है। गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में ले आती है और ऊपर की तरफ यात्रा उसे भाप बनाकर गुरुत्वाकर्षण से मुक्त करती है। उसी तरह वीर्य की अधोगति मनुष्य को माया के प्रभाव में ले आती है। मृत्यु की तरफ अग्रसर करती है। वीर्य की ऊर्ध्वगति उसे माया के प्रभाव से मुक्त करके जीवन अर्थात परमात्मा की तरफ बढ़ा देती है मौत से बहूत दूर ले जाती है।

तंत्र मार्ग में कुण्डलिनी जब जागती है, तो वासना का तूफ़ान हिलोरे मारता है। कुण्डलिनी मूलतः काम ऊर्जा ही है। अगर उसे ऊपर उठने का मार्ग नहीं मिलता है, तो वो दूसरे रूप में अपनी शक्ति को प्रवाहित कर देती है। सम्भोग की चरम अवस्था करीब करीब समाधि की तरह ही होती है। यह वो क्षण है जब अपनी काम ऊर्जा को ऊपर की तरफ गति देनी होती है।

सामान्यतः अधोगति के फलस्वरूप ही वीर्य का पतन होता है और काम ऊर्जा शांत हो जाती है। कुण्डलिनी जब ऊपर के चक्रों की तरफ आगे बढ़ती है तो वो वापस नीचे उतर आती है। वासनाओं के प्रभाव में कुण्डलिनी बार बार नीचे उतर आती है परन्तु अगर कुण्डलिनी एक बार आज्ञा चक्र में प्रवेश कर जाये तो फिर वो वहां स्थिर हो जाती है और साधक शक्ति दे तो ऊपर की तरफ बढ़ जाती है। आज्ञा चक्र में प्रवेश करते ही काम वासना विलीन हो जाती है। साधक काम से ऊपर उठ जाता है। तंत्र के पथिकों ने आज्ञा चक्र में अर्ध नारीश्वर की कल्पना की है। यह कल्पना नहीं यथार्थ है। विज्ञान भी स्वीकारता है कि हर स्त्री में एक पुरुष विद्यमान है और हर पुरुष में एक स्त्री।

जब साधक या साधिका की चेतना आज्ञा चक्र में प्रवेश करती है। जब कुण्डलिनी आज्ञा चक्र का भेदन करती है तो काम ऊर्जा शक्ति ऊर्जा में रूपांतरित हो जाती है। साधक जीव संज्ञा से शिव संज्ञा में प्रविष्ट हो जाता है। आज्ञा चक्र में पुरुष साधक को अपने भीतर की स्त्री का दर्शन होता है और स्त्री साधक को अपने भीतर के पुरुष का। जैसे ही यह दर्शन मिलता है, वैसे ही बाहर की स्त्री या पुरुष विलीन हो जाता है, गुम हो जाता है। बाहर की स्त्री या पुरुष में रस समाप्त हो जाता है। जैसे ही अपने भीतर के पुरुष या स्त्री को पा लेता हैं और साथ ही आतंरिक या आध्यात्मिक सम्भोग के रहस्य को जान लेता है। जो पंचमकार का एक सूक्ष्म मकार है। यह बिलकुल उसी तरह होता है, जैसे खेचरी मुद्रा में साधक ललना चक्र से टपकने वाली मदिरा का पान करके आनंद लेता है। जैसे ही अन्तर आत्मा का सौंदर्य खिलता है। वैसे ही बाहर का सौंदर्य खो जाता है फिर संसार की स्त्री या पुरुष में कोई आकर्षण नहीं रह जाता है। कोई रस नहीं रह जाता है। यही वो समय है, जब ब्रह्मचर्य भीतर से प्रस्फुटित होता है। जब ये ब्रह्मचर्य प्रस्फुटित होता है तब सब कुछ परिवर्तित हो जाता है। रूपान्तरित हो जाता है। यही वो बिन्दु है जहाँ शिवत्व घटता है। यहीं से वासना विदा हो जाती है। जीवन में यहाँ से अधोगति की संभावना समाप्त हो जाती है। यही वास्तविक ब्रह्मचर्य है।

अघोर पथ कहता हैं- "ब्रह्मचर्य के साथ एकांतवास सबसे मूल्यवान होता है। ब्रह्मचर्य को धारण करोगे तो धीरे धीरे अपने आप एकांत को प्राप्त करते चले जावोगे और ऐसी अवस्था में वास करना ही स्थिर हो जाना, एकांतवास है। जो की साधक की सबसे मूल्यवान सम्पत्तिहोती है।

प्रेत-पितृ-तंत्रबाधा से मुक्ति============================   कुटुंब कलेश , आर्थिक तंगी , अविवाहित या दुखी दाम्पत्य जीवन ...
01/05/2026

प्रेत-पितृ-तंत्रबाधा से मुक्ति
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कुटुंब कलेश , आर्थिक तंगी , अविवाहित या दुखी दाम्पत्य जीवन , निःसंतान या बेरोजगार , भूत प्रेत की सवारी आना या किसीने ईर्ष्या भाव या वैरभाव से करवाई तांत्रिक क्रिया .. इन सब कारणों से अनेक परिवार पायमाल हो रहे है । अपनी समस्याओ से मुक्ति केलिए अनेक प्रकार के विधान पूजा करवाते है । पर कोई उपाय नही सूझते , कोई परिणाम नही पाते ओर सब व्यर्थ हो जाता है ।

किसीने पूछा था कि हमारे पितृ जो हमारे पूर्वज है वो क्यों नुकसान करेंगे ? पहले ये प्रेत ओर पितृ का फर्क समझना होगा। पहले के लोग आसुरी वृतियो से दूर रहकर घर , परिवार , कुटुंब , गांव का भला हो ऐसे सद्भाव विचार वाले थे । उनके जीव की किसी कारणवश गति नही हुई तो वो पितृलोक को प्राप्त होते थे । पितृ बनने के बाद भी वो हमेशा घर परिवार गांव का भला ही करते थे। केयुकी जो वृति जीवंत शरीर के साथ थी बादमे भी वही रहती है। और जो काम क्रोध , कपट , प्रपंच , ईर्ष्या , अहंकार जैसी आसुरी वृति के साथ मृत्यु को प्राप्त करते है हो वो प्रेतयोनि को प्राप्त होते है। अब सोचिए कि आजकल ज्यादातर लोग किस वृति के है ? वो मृत्यु के बाद किस योनि को प्राप्त करेंगे ? वो आप केलिए पितृ है पर मूल रूप तो प्रेत ही है ।

" जो दया करे वो देव और दमन करे वो प्रेत "

10 साल से बड़ी हरेक कन्या ओर स्त्रियां मस्तिष्क को ढंक के रखते थे । मासिकधर्म के समय और अमावस्या या ग्रहण जैसे कालमे ओर सूर्यास्त के बाद घर से बाहर नही जाते थे । आजके आधुनिक युग्म खुल्ले बाल , पहेरवेश ओर लावण्य दिखाते हुवे सब बाहर घूमते है । तो लोग बुरी दृष्टि से देखते है और मौका मिले तो पकड़के बलात्कार करते है ऐसे किस्से आएदिन सुनते है । ऐसी स्थितिमे आसुरी वृति की प्रेत शक्तियां भी साथमे हो जाती है और उनके साथ ही घरमे प्रवेश कर लेती है ।

पहले के समयमे ऋषिमुनियों ने गोत्र मुजब आपके देहमे जो स्थित है वो ऊर्जा शक्तिओ को ही कुलदेवी , इष्टदेव,गोत्रीज देव स्वरूप स्थापित करवाया था और सतयुग से आजतक उनकी उपासना होती थी और उनका रक्षा कवच था तो परिवार की हर आसुरी शक्तिओ से रक्षा होती थी । कलियुग व्याप्त होते ही अनेक तर्कटि सम्प्रदाय आये । लोगो पर हावी रहने केलिए भव्य मंदिरों , भ्रमजाल की ऐसी भाषा की बुद्धिजीवी लोग भी भ्रमित होकर अपनी मूल परंपराओं का त्याग करके ऐसे जुठे सम्प्रदाय ओर उनके धर्माचार्यो के दीवाने बन गए । रक्षा कवच हट गया और आसुरी शक्तिओ को घरमे प्रवेश मिल गया। जिस सम्प्रदाय ओर उनके महापुरुषों को भगवान का दरज्जा दे रहे हो कभी कोई भूत , प्रेत बाधा का कार्य करने कहिए ओर देखिए वो कितने बड़े महापुरुष है ।

ऐसा लिखना तो अच्छा नही लगता पर कही लोगो को देखकर जो अनुभूत हुवा की अनेक परिवार मूल ऋषि गोत्र से नही है पर ऐसी आसुरी शक्तिओ से चले वंश है । अब इनकेलिये कौन कुलदेवी ओर कौन इष्टदेव कैसे तय करे और उनको क्या मार्ग दिखाए ?

ऐसे तो आसुरी शक्तिओ ओर तंत्रबाधा से मुक्ति केलिए उग्र देवी देवताओं की उपासना के अनेक विधान है । दुर्गा माता , कालीमाता , हनुमानजी , भैरव विगेरे उपासना है । पर समस्या से ग्रस्त व्यक्ति या परिवार विधान करवाते करवाते थक चुके होते है और अब किसी विधानमे उनको पूर्ण विस्वास नही होता । और ये तो सहज ही है कि भाव के बिगैर किया कोई विधान , मंत्र , यज्ञ , पूजा कभी फलदायी नही होता। पर फिर भी ऐसे निराश लोग मुक्ति पा सके और स्वयं ही बिना खर्च कर सके ऐसा कुछ सरल विधान दिखाते है । सम्भव है अगर भाव हुवा तो अवश्य ही फलदायी होगा।

ऊपर बताई कोई भी समस्या से पीड़ित परिवार अति शीघ्र ही रुद्राक्ष धारण करे। घरके हरेक परिवार जन को रुद्राक्ष धारण करवा दीजिए । आसुरी शक्तियां भागने लगेगी । हो सके तो नित्य या संभव न हो तो सप्ताहमे एकबार शिवलिंग की दक्षिण दिशा पर बैठकर शिवलिंग पर जल अभिषेक कीजिये और मिल सके तो बिल्वपत्र शिवलिंग पर धाराएं । शिवलिंग के सन्मुख बैठकर शिव गायत्री मंत्र के 11 जाप कीजिये ।

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहितन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!

महादेव का गायत्री मंत्र है सर्वशक्तिशाली माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो व्यक्ति इसका नियमित रूप से जाप करता है उसे हर सुख की प्राप्ति होती है उसके जावन में शांति बनी रहती है।

शिवजी को वंदन करके अपनी समस्या से मुक्ति की प्रार्थना करे।

शिवलिंग पर धाराएं बिल्वपत्र में से एक बिल्वपत्र घर लेकर जलपत्रमे डाल दीजिए ताकि घरके हरेक सदस्य को शिवजी का चरणामृत मिले।
घरमे नित्य कुलदेवी के नाम दीप जलाए।

हरदिन सूर्यास्त के बाद आप जब भी घर आने का जो समय हो तब घर पहुचकर हनुमानजी के नाम एक तेल का दिया लगाइए। आसन पर बैठकर हनुमान चालीसा का एक पाठ कीजिये । पाठ करने के बाद 20 मिनिट तक आंखे बंद करे और रदयमे हनुमानजी बैठे है ऐसा ध्यान करिए ।ध्यान कीजिये कि हनुमानजी सीताराम सीताराम नाम का जाप कर रहे है और आप भी हनुमानजी के साथ साथ सीताराम सीताराम नाम का जाप कीजिये। सतत 20 मिनिट तक हनुमानजी का ध्यान और उनके साथ साथ सीताराम नाम जाप।

जाप के बाद हनुमानजी के समक्ष अपनी समस्या और उनसे कैसे मुक्ति मिल सके ये प्रार्थना कीजिये । थोड़े ही दिनमे हनुमानजी आप केलिए जो श्रेष्ठ होगा ऐसा संजोग पैदा करेंगे । जो आप केलिए कल्याणकारी होगा आपको वो मिलने लगेगा ।

ये विधान ऐसे सरल लगेगा पर ये शीघ्र फलदायी होते हमने कही बार देखा है । पूर्ण श्रद्धा से कीजिये

महादेव आप सभी धर्मप्रेमी जनो पर कृपा करें यही प्रार्थना सह .. श्री मात्रेय नमः

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Mohan Road
Lucknow
226101

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