17/03/2022
I hope my this post will help those who are fighting from there known one for those people who even don't know them.
देशभक्ति और कट्टरता दोनो अलग-अलग चीज़े है, देशभक्त कभी भी कट्टर नही हो सकता है।
देशभक्ति में आपके पास अपना दिमाग होता है, आप किनारे खड़े होके तथ्यो को खुद से टटोलते हो, भूतकाल से अपने खुद के घर में चली आ रही किसी पक्ष विशेष अथवा किसी विशेष राजनितिक सोच से खुद को बंधने नही देते, आप अपने आप को अलग रखते हो, स्वतन्त्र रखते हो। आप सरकार के हर उस निर्णय के साथ खड़े होते हो जो देश के लिए, देश में रहने वाले प्रत्येक लोगो के लिए सही होता है और हर उस निर्णय का विरोध करते हो जो देश और लोगो को परेशान करने वाला होता है।
कट्टर होने पर आप अपना दिमाग किसी पक्ष विशेष को सौप देते हो(वो पक्ष विशेष कोई राजनैतिक पार्टी या कोई धर्म या फिर कोई कम्पनी जिसमे आप काम करते है अथवा कोई जगह या कोई विशेष आदमी जो आपको प्रिय हो, हो सकता है।), आपकी सोचने समझने की क्षमता जैसे खो सी जाती है। आप आँखे बंद करके किसी पक्ष विशेष या किसी विशेष राजनितिक सोच के साथ खड़े हो जाते हो, उसका प्रत्येक निर्णय आपको सही लगता है, आप उसके विरोध मे कुछ सुन भी नही पाते, विरोध मे या आपसे असहमत लोगो को आप देशद्रोही तक घोसित कर देते हो या फिर उनका मजाक उड़ाते हो, आप इतना खो जाते है कि आप अपने जान पहचान वालो से लड़ते, वाद- विवाद करते है और वो भी उन लोगो के लिए जो शायद आपको जानते तक नही। आप अपने दोस्तो से, अपने सगे सम्बन्धियो से लड़ते है जिन्हें फरक पड़ता है आपके रहने या न रहने से, जिन्हें आपकी फ़िक्र होती है, और आप उन लोगों के लिए इनसे लड़ते है जिन्हें शायद आप कल रहे या ना रहे तब भी कुछ फ़र्क़ न पड़े।
🙂🙂