10/03/2026
क्रिकेट इज डेड... क्रिकेट मर गया है!!
जब ऑस्ट्रेलिया लगातार वर्ल्ड कप जीतता था, तब क्रिकेट “महान” था। जब इसी वर्ल्डकप में नेपाल ने इंग्लैंड को फाइट दी और इंडिया सुपर 8 में अफ्रीका से एकतरफा हारी तब भी क्रिकेट जिन्दा था। लेकिन अब भारत एकतरफा वर्ल्डकप फ़ाइनल जीत गया तो अचानक पेट में मरोड़ पड़ गईं। अब कुछ एक्सपर्ट कहते फिर रहे हैं “क्रिकेट मर गया”, “पिच सपाट थी”, “गेम में बैलेंस नहीं रहा”।
अच्छा, अगर पिच इतनी ही सपाट थी तो विरोधी टीम ने 250 क्यों नहीं बनाए? टॉस तो वो जीते थे, मौका उनके पास था। पहले खेलकर बड़ा स्कोर बना सकते थे, फिर भारत को दबाव में डाल सकते थे। न्यूजीलैंड ने एकतरफा अफ्रीका को धो दिया, तब किसी ने नहीं कहा- क्रिकेट मर गया है। मुझे हैरानी इस बात की नहीं है कि विदेशी लोग ऐसा बोल रहे हैं। हारने के बाद पड़ोसी मुल्क के लोग बहाने ढूँढें, यह समझ में आता है। हैरानी इस बात की है कि अपने ही देश में भी कई लोग ऐसा बोल रहे हैं। हर जीत को संदेह की नजर से देखते हैं और हर हार में बौखला जाते हैं।
एक सच्चाई और है। आजकल निगेटिव बातें ज़्यादा बिकती हैं। सोशल मीडिया पर तारीफ से ज़्यादा आलोचना वायरल होती है। क्रिकेट किसी एक मैच, एक पिच या एक जीत से नहीं मरता। क्रिकेट तब और मजबूत होता है जब कोई टीम शानदार खेलकर टूर्नामेंट जीतती है। क्रिकेट के कोर फैन्स को पता है असली क्रिकेट, टेस्ट क्रिकेट होता है लेकिन जिन देशों में क्रिकेट नहीं होता वहाँ यही फ़ॉर्मेट ही चल सकता है। इसलिए ये टूर्नामेंट होना बहुत जरूरी है। 2028 से ओलंपिक में भी यही फ़ॉर्मेट चलेगा। मैं पहले भी कह चुका हूँ, टी20 सिर्फ क्रिकेट नहीं, मनोरंजन और प्रचार प्रसार का भी माध्यम है और इसे ऐसे ही लेना चाहिए। लगातार वर्ल्डकप जीतने के बाद भारतीय टीम और भी ज्यादा फियरलेस क्रिकेट खेलेगी। 250 का स्कोर हमें हर दूसरे मैच में देखने को मिलेगा। हाँ, इसका नाम टी20 वर्ल्डकप से हटाकर वर्ल्ड टी20 कर देना चाहिए जो कि इसका मूल नाम है। मुझे आज भी याद है 2007 में जब हम पहली बार इसे जीते तो रवि शास्त्री ने कहा था- वर्ल्ड टीटी चैंपियन।