01/10/2026
बीबीएयू में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर कार्यक्रम आयोजित: दो पीढ़ियों के बीच संवाद और सहभागिता की पहल
बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में 1 अक्टूबर 2026 को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर सामाजिक समावेशन अध्ययन केंद्र (CSSI), बीबीएयू एवं सेकेंड इनिंग्स सीनियर सिटीजन्स क्लब के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरोजिनी नगर विधानसभा के माननीय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मंच पर इंडियन बैंक के मुख्य महाप्रबंधक श्री सुधीर गुप्ता, डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी, अपोलो अस्पताल के प्रो. अमित गुप्ता, सेकेंड इनिंग्स सीनियर सिटीजन्स क्लब के संस्थापक श्री अतुल दुबे, कार्यक्रम संयोजक एवं CSSI की निदेशक प्रो. जया श्रीवास्तव, सुश्री बबिता एवं बंधन बैंक के क्लस्टर हेड श्री सौरभ सिन्हा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई।
मुख्य अतिथि एवं सरोजिनी नगर के माननीय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए उपस्थित सभी वरिष्ठजनों के प्रति आदर और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमारे बुज़ुर्ग हमारे परिवार और समाज की नींव हैं, और उनका आशीर्वाद व मार्गदर्शन हम सबके लिए सबसे बड़ी पूँजी है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए गए जनरेशन कनेक्ट प्रोग्राम की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को वरिष्ठ नागरिकों से जोड़ने की यह पहल अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय है, जो युवाओं में संवेदनशीलता के साथ-साथ बुज़ुर्गों के जीवन में अपनत्व भी लाएगी।
डॉ. सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में पार्कों और सार्वजनिक स्थलों को वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल बनाने की दिशा में कार्य किया है, ताकि बुज़ुर्ग सुरक्षित और सहज वातावरण में समय बिता सकें, टहल सकें और एक-दूसरे से मिल-जुल सकें। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों की गरिमा और सुविधा का ध्यान रखना समाज और जनप्रतिनिधियों, दोनों की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की विशेषता उसकी सुदृढ़ पारिवारिक व्यवस्था और पीढ़ियों के बीच आत्मीय संबंधों में निहित है। हमारी संस्कृति में बुज़ुर्गों को अनुभव, ज्ञान और जीवन-मूल्यों के मार्गदर्शक के रूप में सम्मान दिया जाता है, और यही समृद्ध विरासत भारत को विश्व में एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण और तीव्र शहरीकरण ने देश को आर्थिक प्रगति, शिक्षा और रोज़गार के नए अवसर दिए हैं, लेकिन इनका सामाजिक प्रभाव भी उतना ही गहरा है। रोज़गार और करियर की तलाश में युवा बड़े महानगरों और विदेशों की ओर जा रहे हैं। संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार ले रहे हैं, और जीवन की तेज़ रफ़्तार में पीढ़ियों के बीच बैठकर बात करने का समय घटता जा रहा है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में बुज़ुर्ग, विशेषकर शहरों में, अपने ही घरों में अकेलेपन का सामना कर रहे हैं। प्रो. मित्तल ने कहा कि शहरों के बढ़ते विस्तार ने मोहल्ले और पड़ोस की वह आत्मीयता भी कम कर दी है, जो कभी बुज़ुर्गों के लिए सबसे बड़ा सामाजिक सहारा हुआ करती थी।
उन्होंने कहा कि तकनीक के तीव्र विस्तार ने जहाँ जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं अनेक वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाएँ एक नई चुनौती बन गई हैं। ऐसे में युवाओं की ज़िम्मेदारी है कि वे तकनीक को पीढ़ियों के बीच दूरी नहीं, बल्कि सेतु बनाएँ। प्रो. मित्तल ने कहा कि वैश्वीकरण से हमें आधुनिकता और प्रगति अवश्य अपनानी चाहिए, लेकिन अपने पारिवारिक मूल्यों और बुज़ुर्गों के प्रति सम्मान की परंपरा को खोए बिना।
उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ विश्वविद्यालय ने जनरेशन कनेक्ट प्रोग्राम की शुरुआत की है, ताकि विद्यार्थी वरिष्ठ नागरिकों के साथ नियमित संवाद स्थापित करें, उनके अनुभवों को समझें और उन्हें सामाजिक एवं भावनात्मक सहयोग प्रदान करें। यह पहल न केवल बुज़ुर्गों के अकेलेपन को कम करेगी, बल्कि युवाओं को जीवन के अनुभव, संस्कार और मानवीय मूल्यों से भी जोड़ेगी। प्रो. मित्तल ने कहा कि यदि भारत को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाना है, तो विकास केवल आर्थिक नहीं, सामाजिक और मानवीय भी होना चाहिए, जिसमें समाज का कोई भी वर्ग, और कोई भी पीढ़ी, पीछे न छूटे। उन्होंने कहा कि जब युवा आगे बढ़कर समाज की समस्याओं को समझेंगे और उनके समाधान में अपनी भूमिका निभाएँगे, तभी डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के समता, समानता और बंधुत्व पर आधारित समाज के निर्माण का उद्देश्य सार्थक होगा।
कार्यक्रम संयोजक एवं CSSI की निदेशक प्रो. जया श्रीवास्तव ने सभागार से एक सवाल के साथ अपनी बात शुरू की: “आप में से कितने लोगों के दादा-दादी, नाना-नानी या कोई बुज़ुर्ग पड़ोसी अकेले रहते हैं?” उन्होंने इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023 का हवाला देते हुए कहा कि आज लगभग हर दस में से एक भारतीय साठ वर्ष से ऊपर है, और 2050 तक यह अनुपात लगभग हर पाँच में से एक हो जाएगा। रोज़गार और करियर के लिए बच्चों के दूर जाने से अनेक माता-पिता अकेले रह गए हैं। उन्होंने कहा, “ये बच्चे लापरवाह नहीं हैं, लेकिन शहरी भारत में अकेलापन बुढ़ापे का एक प्रमुख अनुभव बन गया है।”
सामाजिक समावेशन के परिप्रेक्ष्य से उन्होंने कहा, “हम बहिष्करण को प्रायः जाति, लिंग, विकलांगता या गरीबी के संदर्भ में देखते हैं, पर उम्र भी लोगों को हाशिये पर धकेल सकती है। जिस बुज़ुर्ग के पास चाय का एक कप साझा करने, स्मार्टफ़ोन चलाने में मदद करने या बस बात सुनने वाला कोई नहीं, वह भी सामाजिक बहिष्करण का अनुभव कर रहा है।” उन्होंने डिजिटल दूरी, बुज़ुर्गों के साथ बढ़ती साइबर ठगी, और विशेषकर अकेली व विधवा महिलाओं की दोहरी चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, “बुज़ुर्ग समाज पर बोझ नहीं, समाज की सबसे बड़ी पूँजी हैं। आज ज़रूरत है ‘देखभाल’ से आगे बढ़कर ‘सहभागिता’ की ओर जाने की।”
प्रो. श्रीवास्तव ने कुलपति की पहल पर शुरू किए गए जनरेशन कनेक्ट प्रोग्राम की कार्यप्रणाली बताते हुए कहा कि इसके तहत स्वेच्छा से जुड़े विद्यार्थी वरिष्ठ नागरिकों के साथ समय बिताएँगे: बातचीत करेंगे, पढ़कर सुनाएँगे, साथ टहलेंगे और तकनीक सीखने में मदद करेंगे। उन्होंने कार्यक्रम के बुनियादी सिद्धांत स्पष्ट किए: दोनों पक्षों की सहमति, गरिमा व निजता का सम्मान, और किसी भी प्रकार के आर्थिक लेन-देन से पूर्ण दूरी। विद्यार्थियों से उन्होंने कहा, “यह दान नहीं, दोतरफ़ा रिश्ता है। आप उन्हें तकनीक सिखाएँगे, वे आपको ज़िंदगी सिखाएँगे। आप उनके देखभालकर्ता नहीं, उनके दोस्त हैं।” अंत में उन्होंने कहा, “आज हम अपने बुज़ुर्गों के लिए जैसा समाज बनाएँगे, कल वही समाज हमारा इंतज़ार कर रहा होगा।”
इस अवसर पर कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल द्वारा सेकेंड इनिंग्स सीनियर सिटीजन्स क्लब की पत्रिका ‘सक्षम’ का विमोचन किया गया, जिसमें क्लब की गतिविधियों, उद्देश्यों, उपलब्धियों एवं वरिष्ठ नागरिकों के हित में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी समाहित है। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नागरिकों ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर अपनी प्रतिभा और उत्साह का सुंदर प्रदर्शन किया।
जनरेशन कनेक्ट प्रोग्राम के अंतर्गत सेकेंड इनिंग्स सीनियर सिटीजन्स क्लब के वरिष्ठ नागरिकों के साथ संवाद एवं आत्मीय संबंध स्थापित करने की पहल करने वाले बीबीएयू के विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इनमें विदुषी सक्सेना, भूमिका, अरुण सिंह, सलील पटेल, आदर्श कुमार तिवारी, नागेंद्र सिंह, शिवम पटेल, अश्वनी वर्मा एवं पवन बराइक शामिल हैं।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नागरिकों के हित में उल्लेखनीय कार्य करने वाली विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं एवं विद्यालयों, क्लब के उत्कृष्ट सदस्यों, तथा समाज में उल्लेखनीय योगदान के लिए मातृशक्ति को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, सेकेंड इनिंग्स सीनियर सिटीजन्स क्लब के सदस्य, वरिष्ठजन, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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