Gen Z samajsevi smart gram mission

Gen Z samajsevi smart gram mission Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Gen Z samajsevi smart gram mission, Lucknow, Sitapur.

27/10/2025

#

15/04/2024

Subhash Chandra Bose Yuva sangathan - SCBYS
आज के समय में युवा भारत के सबसे महत्वपूर्ण संसाधन हैं। हमें समझना होगा कि हमारी ताकत हमारी शक्तियों में नहीं, बल्कि हमारे योगदान में है। हमें अपने अधिकारों को समझना और उनकी रक्षा करने की जरूरत है।

सुभाष चंद्र बोस युवा संगठन यहाँ ताकि हम आपके साथ एक साथ खड़े हों, ताकि हम समाज में बदलाव ला सकें और अपने अधिकारों की #सुरक्षा कर सकें। हमें अपने आत्म-सम्मान को बचाने के लिए आगे बढ़ना होगा।

युवाओं, हमें अपने अधिकारों के लिए उठना होगा, संघर्ष करना होगा, और साथ में आगे बढ़ना होगा। हम बदलाव ला सकते हैं और हमें इसके लिए एक साथ काम करना होगा।

जय हिन्द। जय भारत।

*भारत की राजनीति को “युवा देश, बूढ़े नेता” के रूप में परिभाषित किया जाता है*.*भारतीय राजनीति में अपनी धाक जमाने वाले ज्य...
07/10/2023

*भारत की राजनीति को “युवा देश, बूढ़े नेता” के रूप में परिभाषित किया जाता है*.

*भारतीय राजनीति में अपनी धाक जमाने वाले ज्य़ादातर युवा नेता बड़े राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, जो सामाजिक-राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावशाली हैं.*

*सोचो मत अपना कम बढ़ाओ।*

07/10/2023

भारत की राजनीति को “युवा देश, बूढ़े नेता” के रूप में परिभाषित किया जाता है. भारतीय राजनीति में अपनी धाक जमाने वाले ज्य़ादातर युवा नेता बड़े राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, जो सामाजिक-राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावशाली हैं. हालांकि मुख्यधारा की लगभग हर राजनीतिक पार्टी का अपना एक स्टूडेंट विंग है, और ये सभी पार्टियां कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ के चुनावों में ज़ोर शोर से भाग लेती हैं, लेकिन ऐसा कोई व्यवस्थित तंत्र मौजूद नहीं है जो छात्र नेताओं को विधायी राजनीति में आगे बढ़ने में मदद कर सके और उन्हें मार्गदर्शन प्रदान कर सके. उदाहरण के लिए, 17वीं लोकसभा (2019-2024) में 40 वर्ष के कम उम्र सांसदों की संख्या महज़ 12 प्रतिशत है, वहीं स्वतंत्र भारत की पहली लोकसभा में 26 प्रतिशत सांसदों की उम्र 40 वर्ष से कम थी.

ख़ासकर, (हर बड़े) चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियां अपने घोषणापत्रों में युवाओं के लिए महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों शुरू करने की बात करती हैं, जिनका अखबारों और सोशल मीडिया के ज़रिए भारी प्रचार किया जाता है. राजनीतिक संपर्क अभियानों में बड़े पैमाने पर युवाओं को शामिल किया जाता है, और राजनीतिक पार्टियां शक्ति प्रदर्शन के लिए चुनावी रैलियों में युवाओं की भागीदारी को प्रचारित करती हैं. हालांकि, चुनाव के बाद युवाओं के मुद्दे (शिक्षा और रोज़गार) को तरजीह नहीं दी जाती, जो चुनावी राजनीति में युवाओं की कमज़ोर स्थिति को बताता है क्योंकि उनमें अपनी मांगों को मज़बूती से रखने की क्षमता नहीं है. यहां तक कि छात्र नेता जब विधायी चुनावों में शामिल होते हैं, तो उनके पास राजनीतिक सौदेबाज़ी की ताकत बेहद सीमित होती है. इस तरह से देखें तो यही लगता है कि युवाओं की मतदाता भागीदारी अगर कम है तो यह एक विचित्र घटना न होकर एक अपेक्षित परिणाम मात्र है.

07/10/2023

*भारत को अपने मूल लोकतांत्रिक सिद्धांतों को मज़बूत बनाने के लिए अपनी युवा शक्ति का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए और राजनीति और लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना चाहिए.*


01/10/2023

जवानों मोड़ सकते हो तो मोड़ो रुख जमाने का, अगर तुम कर नहीं सकते तो फिर नौजवान क्यों हो? अभी हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में यह पंक्तियाँ एक 70 वर्ष की आयु के प्रत्याशी के भाषण में सुनी| हंसी भी आई और क्षोभ भी हुआ| सभा में वक्ता ही सबसे ज्यादा आयु के थे और श्रोता सभी नौजवान ही थे| सभा के पश्चात एक युवा ने प्रश्न किया कि यदि आप विजई हुए तो रोजगार के लिए क्या कदम उठाएंगे| नेता जी के पास कोई जवाब ही न था| *नेता जी का वही घिसा पिटा जवाब था* कि एक बार जिता दीजिये फिर सब कुछ ठीक कर दूंगा| तत्पश्चात नेता जी तुरंत अपने चिर परिचित बिजली सड़क के पुराने नारों पर आ गए|



ऐतिहासिक रूप से सभी क्रांतियाँ युवाओं की ही की हुई हैं| चाहे वह जय प्रकाश नारायण का आन्दोलन हो या अन्ना का आन्दोलन हो| युवा शक्ति क्रान्ति का प्रतीक होती है| कहा भी जाता है जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है| भारत की राजनीति में भी सार्वधिक नाम कमाने वाले वही राजनीतिज्ञ रहे हैं जो युवावस्था से ही राजनीति में कूदे| चाहे वह अटल जी हों या इंदिरा जी या फिर मायावती हों ऐतिहासिक रूप से भारत वर्ष में श्री राम युवावस्था में अयोध्या के राजा हुए| 29 वर्ष की आयु में यह वही धरा है जहाँ अंग्रेजों की गुलामी में भी चन्द्र शेखर आज़ाद एवं भगत सिंह जैसे युवा क्रांतिकारी हुए|



*यह भारत का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि भारत वर्ष में लगभग सभी राजनैतिक पार्टिया युवाओं का शोषण ही करती हैं*| सभी राजनैतिक दलों के युवा प्रकोष्ठ हैं, दलों की रैलियों में भीड़ लाने का, धरना अनशन प्रदर्शन, पुलिस की लाठियां खाने का उत्तर दायित्व पूरी तरह से युवाओं का ही माना जाता है| चुनाव के समय कैम्पेनिंग करना हो या मतदाताओं को बूथ तक लाना हो, दारू पैसा बांटना हों इन सभी में युवाओं के कंधे पर ही बन्दूक रखी जाती है| पर जब संगठन में उत्तर दायित्व देने की बारी आती है या सरकार में भागीदारी की बारी आती है, तो युवाओं को अनुभव हीन बता कर उनके अधिकार से वंचित रखा जाता है| टोकन स्वरुप 5 – 10 % नियुक्तियां युवाओं की होती भी हैं तो वोह प्रायः नेता जी के परिवार के होते हैं या फिर उनके सम्बन्ध नेता जी से अच्छे होते हैं| भारत की दो तिहाई जनसँख्या 35 वर्ष से कम आयु की है| पर उनका प्रतिनिधित्व करने वाले राजनैतिज्ञ 95 % 35 वर्ष से ज्यादा आयु के हैं| सभी दलों के संगठनों में भी 35-40 वर्ष तक की आयु के नेताओं का लगभग पूरी तरह से अभाव है| जो हैं भी वोह प्रायः बड़े नेताओं के डमी उम्मीदवारों के ही रूप में हैं|



*हास्यास्पद यह भी है* कि प्रायः 50 – 60 वर्ष वालों को भी राजनीति में युवा कह कर संबोधित किया जाता है| जिस उम्र में तेंदुलकर रिटायर होते हैं उस उम्र के नेता को *युवा नेता बोला जाता है*| यह सब एक शाजिश है युवाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखने की| दुर्भाग्य यह भी है कि सरकारें जब नीतियां बनाती हैं, तो किसानों के लिए अलग नीतियां बनती हैं, व्यापारियों के लिए अलग| यहाँ तक की जाति और धर्मों तक के लिए भी नीतियां आती हैं, पर युवाओं के लिए प्रतीकात्मक इक्का दुक्का नीतियां छोड़ दी जाएँ तो युवाओं के लिए कोई नीति ही नहीं आती| बिजली, पानी, मकान, सुरक्षा आदि आदि सारे देश की समस्याएं हैं| इनको युवाओं से जोड़ना गलत| युवाओं की समस्याएं हैं रोजगार, शिक्षा, मानसिक तनाव आदि| शायद ही कोई सरकार हो जो इन समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करती हो
सिर्फ युवाओं का यूज किया जाता है युवाओं को अपने बारे में स्वयं सोचना होगा

 #सुभाष  #चन्द्र  #बोस   #युवा  #संगठन जवानों मोड़ सकते हो तो मोड़ो रुख जमाने का, अगर तुम कर नहीं सकते तो फिर नौजवान क्यों...
01/10/2023

#सुभाष #चन्द्र #बोस #युवा #संगठन

जवानों मोड़ सकते हो तो मोड़ो रुख जमाने का, अगर तुम कर नहीं सकते तो फिर नौजवान क्यों हो? अभी हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में यह पंक्तियाँ एक 70 वर्ष की आयु के प्रत्याशी के भाषण में सुनी| हंसी भी आई और क्षोभ भी हुआ| सभा में वक्ता ही सबसे ज्यादा आयु के थे और श्रोता सभी नौजवान ही थे| सभा के पश्चात एक युवा ने प्रश्न किया कि यदि आप विजई हुए तो रोजगार के लिए क्या कदम उठाएंगे| नेता जी के पास कोई जवाब ही न था| *नेता जी का वही घिसा पिटा जवाब था* कि एक बार जिता दीजिये फिर सब कुछ ठीक कर दूंगा| तत्पश्चात नेता जी तुरंत अपने चिर परिचित बिजली सड़क के पुराने नारों पर आ गए|



#ऐतिहासिक रूप से सभी क्रांतियाँ युवाओं की ही की हुई हैं| चाहे वह जय प्रकाश नारायण का आन्दोलन हो या अन्ना का आन्दोलन हो| युवा शक्ति क्रान्ति का प्रतीक होती है| कहा भी जाता है जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है| भारत की राजनीति में भी सार्वधिक नाम कमाने वाले वही राजनीतिज्ञ रहे हैं जो युवावस्था से ही राजनीति में कूदे| चाहे वह अटल जी हों या इंदिरा जी या फिर मायावती हों ऐतिहासिक रूप से भारत वर्ष में श्री राम युवावस्था में अयोध्या के राजा हुए| 29 वर्ष की आयु में यह वही धरा है जहाँ अंग्रेजों की गुलामी में भी चन्द्र शेखर आज़ाद एवं भगत सिंह जैसे युवा क्रांतिकारी हुए|



*यह भारत का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि भारत वर्ष में लगभग सभी राजनैतिक पार्टिया युवाओं का शोषण ही करती हैं*| सभी राजनैतिक दलों के युवा प्रकोष्ठ हैं, दलों की रैलियों में भीड़ लाने का, धरना अनशन प्रदर्शन, पुलिस की लाठियां खाने का उत्तर दायित्व पूरी तरह से युवाओं का ही माना जाता है| चुनाव के समय कैम्पेनिंग करना हो या मतदाताओं को बूथ तक लाना हो, दारू पैसा बांटना हों इन सभी में युवाओं के कंधे पर ही बन्दूक रखी जाती है| पर जब संगठन में उत्तर दायित्व देने की बारी आती है या सरकार में भागीदारी की बारी आती है, तो युवाओं को अनुभव हीन बता कर उनके अधिकार से वंचित रखा जाता है| टोकन स्वरुप 5 – 10 % नियुक्तियां युवाओं की होती भी हैं तो वोह प्रायः नेता जी के परिवार के होते हैं या फिर उनके सम्बन्ध नेता जी से अच्छे होते हैं| भारत की दो तिहाई जनसँख्या 35 वर्ष से कम आयु की है| पर उनका प्रतिनिधित्व करने वाले राजनैतिज्ञ 95 % 35 वर्ष से ज्यादा आयु के हैं| सभी दलों के संगठनों में भी 35-40 वर्ष तक की आयु के नेताओं का लगभग पूरी तरह से अभाव है| जो हैं भी वोह प्रायः बड़े नेताओं के डमी उम्मीदवारों के ही रूप में हैं|



#हास्यास्पद यह भी है* कि प्रायः 50 – 60 वर्ष वालों को भी राजनीति में युवा कह कर संबोधित किया जाता है| जिस उम्र में तेंदुलकर रिटायर होते हैं उस उम्र के नेता को *युवा नेता बोला जाता है*| यह सब एक शाजिश है युवाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखने की| दुर्भाग्य यह भी है कि सरकारें जब नीतियां बनाती हैं, तो किसानों के लिए अलग नीतियां बनती हैं, व्यापारियों के लिए अलग| यहाँ तक की जाति और धर्मों तक के लिए भी नीतियां आती हैं, पर युवाओं के लिए प्रतीकात्मक इक्का दुक्का नीतियां छोड़ दी जाएँ तो युवाओं के लिए कोई नीति ही नहीं आती| बिजली, पानी, मकान, सुरक्षा आदि आदि सारे देश की समस्याएं हैं| इनको युवाओं से जोड़ना गलत| युवाओं की समस्याएं हैं रोजगार, शिक्षा, मानसिक तनाव आदि| शायद ही कोई सरकार हो जो इन समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करती हो
सिर्फ युवाओं का यूज किया जाता है युवाओं को अपने बारे में स्वयं सोचना होगा

28/09/2023

क्रांतिकारी भगत सिंह
जो इतिहास में नहीं पढ़ाया गया उसे जानने की जरूरत है अभी तक यही जानते होंगे कि गांधी महान है लेकिन एक बारी वीडियो पूरा जरूर देखें

*लोकतांत्रिक भारत में युवाओं के लिए कैरियर के रूप में राजनीति**लोकतांत्रिक* भारत में युवाओं को राजनीति को एक कैरियर के र...
21/09/2023

*लोकतांत्रिक भारत में युवाओं के लिए कैरियर के रूप में राजनीति*

*लोकतांत्रिक* भारत में युवाओं को राजनीति को एक कैरियर के रूप में स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित, प्रेरित और सशक्त बनाना चाहिए राजनीति में स्वस्थ, नैतिक भागीदारी लाने में सक्षम। राष्ट्र को राजनीति में शामिल होने के लिए मध्यम वर्ग सहित सभी रंगों और पंथों के युवाओं की आवश्यकता है हमें राजनीति को एक गंदा खेल और बहाने बनाने तथा सही समय पर गलत काम करने की कला और विज्ञान के रूप में खेद महसूस करने की आवश्यकता नहीं है हमें भारतीय राजनीति के रूप, कर्म और कथन (कानून) में बदलाव कर इसे देश का कानून बनाने के बारे में सोचना होगा। भारत के प्रतिभाशाली और बहुमुखी युवाओं को राजनीति को करियर के रूप में चुनना चाहिए *हमें भारतीय राजनेताओं की धारणा को बदलने और युवाओं को राजनीति को करियर के रूप में स्वीकार करने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है*। युवा राजनेताओं को एक राजनेता में अच्छे गुणों के प्रवेश बिंदु पर जानने की जरूरत है। हमें ध्यान देना होगा कि भगत सिंह, सुखदेव, सुभाष चंद्र बोस, राज गुरु आदि सहित युवा उत्साही छात्रों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया था। हमें राजनेताओं के रूप में वांछित और सम्मानित होने के लिए वैकल्पिक मूल्यों का निर्माण करने की आवश्यकता है। वर्तमान समाज में, विपणन और आयोजन कौशल के लिए युवाओं में शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए राष्ट्र का नेतृत्व करने के लिए प्रतिभा विकसित करने और तैयार करने की आवश्यकता होती है,

Address

Lucknow
Sitapur

Telephone

+919454306372

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Gen Z samajsevi smart gram mission posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Gen Z samajsevi smart gram mission:

Share