04/10/2022
|| आखिरी दिन ||
टूर प्रोग्राम बनाकर यात्रा कराने वाली एक बड़ी एजेंसी ने चार दिन का प्रोग्राम बनाकर एक स्थानीय समाचार पत्र में अपना विज्ञापन निकाला, कि हमारी एजेंसी उत्तर प्रदेश के सात ऐतिहासिक स्थानों का सुरक्षित भ्रमण करायेगी, सभी यात्रियों के सुख सुबिधा का पूरा ध्यान रखा जायेगा, इच्छुक यात्री अपना स्थान आरक्षित करा सकतें हैं, तीस सीट वाले एक शानदार लग्जरी बस में कुल अट्ठाईस यात्रियों ने अपनी बुकिंग करायी, चलने के समय तक कुल दो स्थान रिक्त रह गया, नियत समय पर यात्रा प्रारम्भ हुई, सभी स्थानों का सुरक्षित भ्रमण कराके यात्रा के अपने शहर पहुँचने की आखिरी रात थी, शुबह आठ बजे तक लखनऊ पहुँचने वाली थी, यात्रा कर रहे सभी यात्री आपस में अपने-अपने अनुभव के बारे में एक दूसरे से चर्चा कर रहे थे, कि अचानक तेज हवा चलने लगी, हवा ऐसी थी कि क्या पाए क्या उड़ा ले जाये, धीरे-धीरे बढ़ती हुई हवा ने भयंकर तूफ़ान का रूप ले लिया, सामान्य सी रात भयंकर तूफानी रात में बदल गई, तूफ़ान बढ़ गया, बादल गरज रहे थे बिजली चमक रही थी, ऐसा लग रहा था कि किसी भी पल बिजली बस पर गिर जयेगी और बस में बैठे हुए सभी यात्रियों की जानें चली जाएगी, सब लोग बहुत डरे सहमे हुए थे, जो बस चालक था वह बहुत कुशल था, कोशिस कर रहा था कि किसी भी तरह से इस भयंकर तूफानी रात से बस को और सारे यात्रियों को बचाते हुए हम गंतव्य स्थान तक पहुँच जाय, जब उसे लगा कि अब तूफ़ान बहुत बढ़ गया है, हालत बहुत खराब होते जा रहे हैं, बस को सड़क पर चलाना बहुत मुश्किल होता जा रहा है, तो उसने सड़क के किनारे लगे एक पेड़ से कुछ दूरी पर ले जाकर बस को खड़ा कर दिया, बस को खड़ा करते देख सारे के सारे यात्री हैरान परेसान हो गये और पूछने लगे कि अरे भाई डराइबर साहब ! यह बस यहाँ क्यों रोक रहे हो ? हमें जल्दी हमारे गंतव्य तक पहुँचाओ, हम सबकी जान खतरें में है, बस ड्राईबर ने कहा- कि मुझे ऐसा लग रहा है कि इस बस में कोई तो एक ऐसा शख्श है जिसकी मृत्यु आज इस तूफ़ान से होना निश्चित है, और उसी वजह से सारी बस शंकट में आ पड़ी है, सब लोग एक दूसरे को देखने लगे और हैरान हो गये कि क्या करें ऐसी परिस्थिति में ? कैसे पता लगेगा कि किसके कारण यह सब हो रहा है,
तब बस चालक बस को सड़क के किनारे पर रोककर खड़ा कर दिया, और अपनी सीट से उठकर सभी यात्रियों के सामने आकर कहा- भाई मेरे पास इस समय इस तूफ़ान से बचने का बस एक ही हल हमारे समझ में आता है, कि एक-एक करके हर इन्सान इस बस में से बस से नीचे उतरेगा और वह जो पास में पेड़ है उसके पास जाकर उसे पकड़ कर खड़ा हो जायेगा, एक मिनट वहाँ खड़े होकर वापस आ जायेगा और बस में बैठ जाएगा, अगर इस तूफ़ान और बिजली
से उस व्यक्ति की मृत्यु होनी तय होगी तो हो जाएगी, कम से कम इस बस में बैठे बाकी लोग तो बच जायेंगे, आज यह तूफ़ान किसी एक की तलाश में है और उसके मृत्यु का समय आ गया है, यह तूफ़ान उस व्यक्ति को सबसे अलग करना चाहती है, सबको उसकी बात ठीक लगी कि भाई एक व्यक्ति की वजह से बाकी सबकी जान तो नहीं जानी चाहिए न, सब लोगों एक स्वर से उसे ठीक मान लिया और वैसा ही करने का मन बना लिया,
सभी लोग बे मन से, अनमने मन से, बिना इच्छा से, लेकिन एक-एक कर सभी यात्रियों ने बस से उतरना शुरू किया, पहला यात्री बहुत घबराते हुए, ईश्वर का जाप करते हुए बस से उतरा कि हे भगवान ! हे पवन देवता ! आज इस तूफ़ान से बचा लेना और हमें घर पंहुचा देना, हमारी बहुत जरुरत है मेरे परिवार को, वह उतरा और धीरे-धीरे डरता घबड़ाता हुआ पेड़ के पास जाकर उसे पकड़कर एक मिनट तक खड़ा हुआ, लेकिन उस समय बिजली नहीं गिरी, तो वह यात्री बहुत खुश हुआ और वापस आकर बस में बैठ गया और बोला कि नहीं-नहीं आज मेरी मृत्यु नहीं आयी है, भगवन ने हमारे उपर बहुत कृपा की और हमारी पुकार सुन ली, यह शिलशिला हर यात्री के साथ चलता रहा, यही शिलशिला चालक और यात्रा प्रबन्धक के साथ भी चला, क्योकि उसी बस में वे दोनों भी थे, वह भी गए, पेड़ को पकड़कर एक मिनट खड़े रहे और वापस आकर बस में अपनी सीट पर बैठ गए,
अब बस केवल यात्री ही बचा था, क्योकि बाकी के लोग सुरक्षित वापस आ गए थे, अब उसे लगा कि मेरी मृत्यु तो आज सौ प्रतिशत पक्की है, यह बिजली मुझे मारने के लिए ही गिरने वाली थी, अब आज तूफ़ान और बिजली गिरने के रूप में मेरी मृत्यु ही आयी हुई है, इस डर को मन में लिए हुए, भगवान का नाम जपते हुए, अपनी गलतियों का भगवान से क्षमा मांगते हुए बस से उतरा, पेड़ के पास पहुंचकर खड़ा ही हुआ था कि इतने में भयंकर तूफ़ान गड़गड़ाहट की आवाज करते हुए बिजली गिरी, लेकिन पेड़ के पास खड़े व्यक्ति पर नहीं, वहीँ पास में खड़ी हुई बस पर गिरी और बस में बैठा हर शख्स बिजली गिरने से अपनी जान गवां बैठा था,
जिन्दगी के अक्सर यह होता है कि जब हमारे साथ कुछ बुरा होता है तो हम किसी और को जिम्मेदार समझ लेते है, लेकिन जब कुछ अच्छा हो रहा होता है तब हम किसी और को श्रेय देना नहीं चाहते है,
उस बस में बैठे लोग यही नहीं समझ पा रहे थे कि वह एक व्यक्ति था जिसकी वजह से पूरे बस वालों की जान बची हुई थी, जैसे ही वह व्यक्ति बस से बाहर निकला उसी क्षण बस में बैठे हर एक शख्स की जान चली गयी, हमारे आस-पास जिन्दगी में बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें हम छोटी-बड़ी किसी भी बात का श्रेय देना नहीं चाहते है, हमारे साथ जो कुछ अच्छा होता है वह बस मेरी वजह से नहीं होता है, हमारे आस-पास के लोगों का योगदान उसमे होता है, इसलिए बारीकी से ध्यान दीजिये, जिसकी वजह से जीवन का सुख आपको मिल रहा है उसे दिल से धन्यवाद करना न भूलिए, खुशियों के लिए धन्यवाद देना सीख लीजिए आपकी खुशिया बढ़ जायेगी,
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