Vijay Mishra

Vijay Mishra सेना का वसूल
( जितना रगड़ा - उतना तगड़ा )
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13/01/2024
03/11/2023
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15/10/2023

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यह घर फौजी की है जो देश का सेवा करके बनाई हुई है ये घर मेहनत की कमाई की है ! #देवरिया #प्रेमचंद_यादव #उत्तरप्रदेश       ...
08/10/2023

यह घर फौजी की है जो देश का सेवा करके बनाई हुई है ये घर मेहनत की कमाई की है !
#देवरिया #प्रेमचंद_यादव #उत्तरप्रदेश

 #कुली नंबर36 हूं, इज्जत का खाती हूं, बच्चों को बनाऊंगी अफसर, 45 मर्दों के बीच अकेली कुली है संध्या !..“भले ही मेरे सपने...
29/09/2023

#कुली नंबर36 हूं, इज्जत का खाती हूं, बच्चों को बनाऊंगी अफसर, 45 मर्दों के बीच अकेली कुली है संध्या !..
“भले ही मेरे सपने टूटे हैं, लेकिन हौसले अभी जिंदा है। जिंदगी ने मुझसे मेरा हमसफर छीन लिया, लेकिन अब बच्चों को पढ़ा लिखाकर फौज में अफसर बनाना मेरा सपना है। इसके लिए मैं किसी के आगे हाथ नहीं फैलाऊंगी।
कुली नंबर 36 हूं और इज्जत का खाती हूं।” यह कहना है 31 वर्षीय महिला कुली संध्या का। महिला कुली को देखकर हैरत में पड़ जाते हैं लोग मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर कुली संध्या प्रतिदिन बूढ़ी सास और तीन बच्चों की अच्छी परवरिश का जिम्मा अपने कंधो पर लिए, यात्रियों का बोझ ढो रही है।
रेलवे कुली का लाइसेंस अपने नाम बनवाने के बाद बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए साहस और मेहनत के साथ जब वह वजन लेकर प्लेटफॉर्म पर चलती है तो लोग हैरत में पड़ जाते हैं और साथ ही उसके जज्बे को सलाम करने को मजबूर भी !


अमिताभ बच्चन कहते हैं ... "अपने करियर के चरम पर, मैं एक बार हवाई जहाज से यात्रा कर रहा था। मेरे बगल वाली सीट पे एक साधार...
25/09/2023

अमिताभ बच्चन कहते हैं ... "अपने करियर के चरम पर, मैं एक बार हवाई जहाज से यात्रा कर रहा था।
मेरे बगल वाली सीट पे एक साधारण से सज्जन व्यक्ति बैठे थे, जिसने एक साधारण शर्ट और पैंट पहन रखी थी। वह मध्यम वर्ग का लग रहा था, और बेहद शिक्षित दिख रहा था।

अन्य यात्री मुझे पहचान रहे थे कि मैं कौन हूँ, लेकिन यह सज्जन मेरी उपस्थिति के प्रति अंजान लग रहे थे ... वह अपना पेपर पढ़ रहे थे, खिड़की से बाहर देख रहे थे, और जब चाय परोसी गई, तो उन्होंने इसे चुपचाप पी लिया ।

उसके साथ बातचीत करने की कोशिश में मैं उन्हें देख मुस्कुराया। वह आदमी मेरी ओर देख विनम्रता से मुस्कुराया और 'हैलो' कहा।

हमारी बातचीत शुरू हुई और मैंने सिनेमा और फिल्मों के विषय को उठाया और पूछा, 'क्या आप फिल्में देखते हैं?'

आदमी ने जवाब दिया, 'ओह, बहुत कम। मैंने कई साल पहले एक फिल्म देखा था। '

मैंने उल्लेख किया कि मैंने फिल्म उद्योग में काम किया है।

आदमी ने जवाब दिया .. "ओह, यह अच्छा है। आप क्या करते हैं?"

मैंने जवाब दिया, 'मैं एक अभिनेता हूं'

आदमी ने सिर हिलाया, 'ओह, यह अद्भुत है!' तो यह बात हैं ...

जब हम उतरे, तो मैंने हाथ मिलाते हुए कहा, "आपके साथ यात्रा करना अच्छा था। वैसे, मेरा नाम अमिताभ बच्चन है!"

उस आदमी ने हाथ मिलाते हुए मुस्कुराया, "थैंक्यू ... आपसे मिलकर अच्छा लगा..मैं जे आर डी टाटा (टाटा का चेयरमैन) हूं!"

मैंने उस दिन सीखा कि आप चाहे कितने भी बड़े हो।हमेशा आप से कोई !! बड़ा !! होता है।

नम्र बनो, इसमें कुछ भी खर्च नहीं होता है….जिस प्रकार से जिस पेड़ में फल लगा होता है, वही पेड़ झुका होता है 🙏🏻🙏🏻

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25/09/2023

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एक सुपर स्टार थे .. राजेश खन्ना। शूटिंग के बाद रात तीन बजे तक स्काच पीते थे। चार बजे खाना खाते थे। शूटिंग होती थी सुबह द...
25/09/2023

एक सुपर स्टार थे .. राजेश खन्ना। शूटिंग के बाद रात तीन बजे तक स्काच पीते थे। चार बजे खाना खाते थे। शूटिंग होती थी सुबह दस बजे, पहुंचते थे, शाम चार बजे । एक दिन एक बहुत स्वाभिमानी निर्माता ने कहा काका घड़ी देख रहो हो । घमंड से चूर काका ने कहा-हम नहीं घड़ी हमारा टाइम देखती हैं हमारी घड़ी 5 लाख की है और चश्मा तीन लाख का पैसा बहुत था फेंकते भी बहुत थे ।।
निर्देशक ने बिना शूटिंग किए पैकअप किया और बोले जो वक्त की इज्ज़त नहीं करता वक्त उन्हें सबक सिखा देता है। एक समय ऐसा भी आया जब काका के पास वक़्त ही वक़्त था। ना फिल्में थीं, न शूटिंग थी, ना बीवी थी, ना बच्चे थे और न ही पैक अप कहने वाला। चमचों के साथ अपनी पुरानी फिल्मों को देख कभी खुश होते तो कभी रोते रहते। सभी साथ छोड़ गए। अकेले पीकर और दो कौर खाकर लुढ़क जाना ही उनकी नियति बन गयी थी और बाकी की कहानी सब जानते है।
ये वक़्त है जो सबका आता है लेकिन हमेशा के लिये नहीं। समय और भाग्य अगर आपके साथ नही हैं तो आपकी कीमत दो कौड़ी की है। हो सकता है कर्म और पुरुषार्थ की भी कोई महत्ता हो लेकिन कर्म करने के लिए आप जिंदा भी रहेंगे या नहीं ये आपका भाग्य तय करता है आपका पुरुषार्थ नहीं।
अच्छे समय को भरपूर जियें लेकिन बुरे वक्त के लिए भी तैयार रहें। आपके बुरे वक्त में कोई आपके साथ हो न हो अपने अच्छे समय मे आप किसी को मत दुत्कारिये। विनम्रता अच्छे समय की पूंजी है और अहंकार आपके अच्छे समय को असमय ही खत्म कर देने वाला हथियार
ये एक शाश्वत सत्य है जो सब पर बराबर लागू होता है.









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