05/07/2026
राम मंदिर की सोने की रामचरित मानस ‘लापता’, दानदाता पूर्व IAS ने जताई चिंता
मोहन भागवत से मिलकर बताई थी पूरी बात, अब तक नहीं मिला कोई जवाब
#अयोध्या : श्री राम जन्मभूमि मंदिर को अपनी पूरी जीवन भर की कमाई दान कर देने वाले पूर्व IAS अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायणन ने मंदिर प्रशासन से सोने की रामचरित मानस का पता लगाने की मांग की है। उनका आरोप है कि भक्तों के दर्शन के लिए गर्भगृह में स्थापित की गई यह 5 करोड़ रुपये की दुर्लभ प्रति अचानक हटा दी गई थी और अब उसका कोई अता-पता नहीं है।
5 महीने तक हुई पूजा, फिर हटा दी गई
लक्ष्मीनारायणन ने बताया, _"शुरुआत में 5 महीने तक रामचरित मानस मंदिर में रखी गई। रोजाना इसकी पूजा होती थी। भक्त इसे देखते थे। मैं बहुत खुश था। अचानक इसे हटा दिया गया। रामचरित मानस कहां है, मैंने कई बार इसका फॉलोअप लिया, लेकिन कुछ पता नहीं चला।"_
नवरात्र 2024 के पहले दिन इस सोने की रामचरित मानस को गर्भगृह में रामलला की मूर्ति से 15 फीट की दूरी पर एक पत्थर के आसन पर विधि-विधान से स्थापित किया गया था।
155 किलो वजनी है ग्रंथ
मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व IAS अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायणन और उनकी पत्नी सरस्वती ने यह रामचरित मानस राम मंदिर ट्रस्ट को भेंट की थी।
इसकी खासियतें:
- *वजन*: 155 किलोग्राम, 1000 पेज
- *सामग्री*: 4 किलो सोना और 151 किलो तांबा
- *लागत*: लगभग 5 करोड़ रुपये
- *निर्माता*: वही वुम्मिदी बंगारू ज्वैलर्स कंपनी जिसने संसद का सेंगोल बनाया था
- *विशेषता*: हर पेज पर 24 कैरेट सोने की परत और रामचरित मानस के 10,902 छंद अंकित
RSS प्रमुख से की थी शिकायत
पूर्व IAS ने बताया कि हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से कराई गई थी। उन्होंने कहा, _"उन्होंने मेरी श्रद्धा की तारीफ़ की और वादा किया कि वे हर तरह से मेरी मदद करेंगे। लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।"_
ट्रस्ट से जवाब का इंतजार
अभी तक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मंदिर को 22 जनवरी 2024 के उद्घाटन के बाद से देश-दुनिया से 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा और कई बहुमूल्य उपहार मिल चुके है
भक्तों का कहना है कि इतनी महंगी और आस्था से जुड़ी वस्तु के संबंध में स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालु फिर से इसके दर्शन कर सके