19/04/2020
मेरी कविता भाग-६
शीर्षक- #मित्र
वो सबसे हसीन पल था मेरी जिंदगी में जब में मिला उसे।
वो राते काली अंधकार वाली आधी रातों में कॉफी पीना पूरी रात जागकर पढ़ना-लिखना सीखा जब मिला में उसे।।
पूरी रात जगना इधर-उधर भगना बिना मतलब लड़ना मुँह फाड़कर हँसना रोना रुलाना फिर बैठकर समझाना जब मिला में उसे।
वो ट्रैन में चढ़ना फिर चलती ट्रेन से कूद जाना कुछ कहना बिना बात के,चुप रहना कभी घण्टो बिना बात के डांटना मनाना गीत गाना जब मिला में उसे।।
कॉलेज कैफ़ेट जाना जाके बिन खाये लौट आना क्योंकि अकेले न रह पाना,साथ सोना -जगना साला मरना ,उड़ते जहाज को देखकर चिल्लाना चिड़िया को देखते ही उड़ाना ,बन्दरो को चिढाना सीखा जब मिला में उसे।
पूरा दिन बातें ,याद है वो exams की राते ,पेट्रोमैक्स पे चाय बनाना जाकर दुकान से दूध लाना ,one night fight बोलकर खुद को पूरे साल बचाना सीखा जब मिला में उसे।।
पास होना या फैल होना हर बात से पहले उसे अपना रोना रोना ,ज्यादा marks आये तो overexited होना और कम marks आने पर गालियां देना सीखा जब मिला में उसे।
सड़क पे चलते लोंगो को सताना उनको चिढ़ाकर Hi-5 देना ,हर बात पे बिना मतलब हँसना ,जाने किसी बात को या जाने बिना जाने ही उंगली करना सीखा जब मिला में उसे।।
एक दिन की बात है ,हो रही थी आधी रात उसके दिमाग का झींगुर झँझनाया उसने सबको पास बुलाया ,बोला कमीना मसूरी चलना है,अभी के अभी चलना है,ना कोई बहाना ना मुझको घुमाना ,चलना है तो बताना वरना सालो मर जाना,सीखा जब मिला में उसे।
कॉलेज में जाना ,bunk मारना बिना पढ़े number लाना हर बार कहना इस sem के बाद तो में top करूँगा पर हर बार फैल हो जाना ,रोकर दिखाना सीखा जब मिला में उसे।
हमारी कभी ना खत्म होने वाली बातें वो अंधनिन्दि राते ,वो late night study वो जाना क्लास बिना हुए ready वो मुँह बनाना वो मुस्कुराना वो गाने गाना सीखा जब मिला में उसे।।
याद है मुझे वो 15 दिन अब तक, मै था dayscholar वो था hostler पर उसने बोला, मैने उठाया मेरा झोला मेरा मन बार-बार डोला पर में खुद से बोला जाना पड़ेगा पढाने उसे चाहें कोई कुछ भी कहे,तुझे पढ़ाऊंगा पास कराऊँगा, करके कुछ दिखाऊंगा ,पढ़ाया pass कराया कुछ करके दिखाया जब मिला में उसे।।
शिवमंदिर जाना चाय पीकर आना प्रसाद खाना ,सॉफ्टी लेकर सबको चिढाना ,पेडो पर बैठे बन्दरो को उकसाना ,उन्हें उकसाकर फिर खुद मुसीबत में फंस जाना सीखा जब मिला में उसे।