12/03/2026
13 मार्च 1940 को महान भारतीय क्रांतिकारी ऊधम सिंह ने लंदन के कैक्सटन हॉल में पंजाब के पूर्व उपराज्यपाल माइकल ओ’ड्वायर को गोली मार दी। यह घटना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण मानी जाती है। यह कार्य उन्होंने लगभग इक्कीस वर्ष पहले हुए जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेने के लिए किया था। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में हजारों निहत्थे भारतीय एक शांतिपूर्ण सभा में एकत्रित हुए थे। उसी समय ब्रिटिश अधिकारी रेजिनाल्ड डायर के आदेश पर सैनिकों ने भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिसमें सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए और हजारों घायल हो गए। उस समय पंजाब के प्रशासनिक प्रमुख रहे माइकल ओ’ड्वायर ने इस क्रूर कार्रवाई का समर्थन किया था, जिससे पूरे देश में गहरा आक्रोश फैल गया।
इस अमानवीय घटना ने ऊधम सिंह के मन को गहराई से झकझोर दिया। उन्होंने संकल्प लिया कि वे इस अन्याय का प्रतिकार अवश्य करेंगे। कई वर्षों तक अवसर की प्रतीक्षा करने के बाद उन्होंने 13 मार्च 1940 को लंदन में आयोजित एक सभा के दौरान माइकल ओ’ड्वायर को गोली मारकर जलियांवाला बाग के शहीदों का बदला लिया। घटना के तुरंत बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। न्यायालय में उन्होंने निर्भीक होकर कहा कि उन्होंने यह कार्य अपने देशवासियों के साथ हुए अत्याचार का प्रतिशोध लेने के लिए किया है। अंततः ब्रिटिश सरकार ने उन्हें दोषी ठहराया और 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल कारागार में उन्हें फांसी दे दी गई। आज ऊधम सिंह को भारत में एक महान देशभक्त और अमर शहीद के रूप में याद किया जाता है। उनका बलिदान हमें यह प्रेरणा देता है कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध साहसपूर्वक खड़े होना ही सच्ची देशभक्ति है। 🇮🇳